
Rama Devi Sahu
2 days ago
शरद पूर्णिमा की वह दिव्य रात... यमुना के तट पर, वृंदावन के फूलों से सजे कुंज में, पूर्ण चंद्र अपनी सोलह कलाओं से चमक रहा है। मंद-मंद सुगंधित पवन बह रही है, और उस पवन में श्री कृष्ण की बांसुरी का स्वर घुला है। वह आह्वान है - रास का आह्वान। जैसे ही मुरली की तान गूंजी, श्री राधा रानी अपनी सखियों के साथ दौड़ पड़ीं। आज न कोई लोक है, न लाज, केवल प्रेम है। और फिर प्रारंभ हुआ महारास — बीच में नीलमणि जैसे साँवले श्री कृष्ण, और चारों ओर स्वर्ण-आभा सी दमकती श्री राधा और उनकी सखियाँ। ऐसा अद्भुत दृश्य कि प्रत्येक गोपी को लगता है - "कृष्ण मेरे ही सामने हैं, मेरा ही हाथ थामे हैं।" एक कृष्ण अनेक रूपों में बंट गए, और हर राधा के साथ एक कृष्ण नृत्य कर रहे हैं। श्री कृष्ण के मुकुट पर मोरपंख चंद्रमा की चांदनी में हिल रहे हैं, पीताम्बर लहरा रहा है। श्री राधा के पायल की झंकार, चूड़ियों की खनक, और घुंघरुओं की रुनझुन से पूरा ब्रह्मांड नाच उठा है। पैरों के नीचे रंग-बिरंगी फूलों की रंगोली, ऊपर से देवता फूल बरसा रहे हैं, मयूर नाच रहे हैं, यमुना भी थम कर यह दृश्य देख रही है। यह कोई साधारण नृत्य नहीं, यह है **आत्मा का परमात्मा से मिलन**। जहाँ राधा हैं - वहाँ प्रेम है, और जहाँ कृष्ण हैं - वहाँ प्रेम का उत्सव है। राधा के बिना कृष्ण अधूरे, और कृष्ण के बिना राधा। यही है महारास - प्रेम की पराकाष्ठा, भक्ति की पूर्णता। राधे-राधे!❤️🌺🙏
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Oct 25, 2026
सुख समृद्धि की मंगल कामना के साथ में आपको शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाए 🙏🌹

Suresh Kumar (Krishan premi)
Oct 25, 2026
राधे राधे जी 🙏 जय श्रीं कृष्णा
