
प्रभा त्रिपाठी
434 days ago
#जयजगन्नाथ भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु बीमार क्यूँ होते हैं** (एक प्रेम कथा) भगवान जगन्नाथ हर साल ज्येष्ठ स्नान पूर्णिमा के बाद से 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते हैं। ऐसा हर साल जगन्नाथ पुरी रथयात्रा से 15 दिन पहले होता है ! आखिर हर साल भगवान जगन्नाथ बीमार क्यों पड़ते हैं ? इसका जवाब माधवदास और भगवान जगन्नाथ की कहानी से जुड़ा मिलता है जो भक्त और भगवान के प्रेम को दर्शाता है _ माधवदास एक बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। दुनियादारी से उन्हें कोई सरोकार नहीं था। एक साधारण परिवार में जन्में माधवदास के परिवार के सदस्य धीरे-धीरे उनका साथ छोड़ते गए। जब माधवदास की पत्नी भी एक बीमारी के कारण अपने अंतिम दिन गिन रही थी, तो माधवदास ने उनसे बहुत ही सरल स्वभाव से पूछा- "तुम भी मुझे छोड़कर जा रही हो। अब मैं किसी भरोसे रहूंगा। कौन मुझसे प्रेम करेगा। मैं अब कहां सुरक्षित महसूस करूंगा?" यह कहकर माधवदास रोने लगे। माधवदास की पत्नी भी भगवान जगन्नाथ की परम भक्त थी। मृत्यु के करीब आ चुकीं उनकी पत्नी ने माधवदास से कहा कि वे पुरी में भगवान जगन्नाथ की शरण में चले जाएं। उनसे ज्यादा उन्हें कोई भी प्रेम नहीं कर सकता। माधवदास स्वभाव से बहुत सरल थे। उन्हें दुनियादारी की समझ नहीं थी। छल-कपट से दूर माधवदास बहुत ही सरल भाव से मंदिर के सामने लगे एक पेड़ की छांव के नीचे बैठ गए। जब मंदिर के पुजारी माधवदास को प्रसाद देने आए, तो माधवदास ने प्रसाद लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने प्रभु भगवान जगन्नाथ के हाथों से ही प्रसाद ग्रहण करेंगे। माधवदास ने पुजारी से भगवान जगन्नाथ को बुलाने के लिए कहा। पुजारी हैरानी से माधवदास को देखते रहे। इस तरह भूखे-प्यासे रहकर माधवदास ने हठ कर लिया कि वे केवल भगवान जगन्नाथ के हाथों से ही अन्न ग्रहण करेंगे। माधवदास जी की सरलता देखकर भगवान जगन्नाथ का मन पिघल गया और वे रूप बदलकर माधवदास के पास अन्न लेकर पहुंचे लेकिन माधवदास ने अन्न ग्रहण करने से मना कर दिया। माधवदास ने कहा कि उन्हें इस संसार में सबसे ज्यादा विश्वास भगवान जगन्नाथ पर है। वे केवल उनके हाथ से ही अन्न खाएंगे। यदि भगवान जगन्नाथ अभी तक उनसे मिलने नहीं आए, तो साफ है कि वे माधवदास को अपना मित्र नहीं बनाना चाहते। माधवदास जी ने रूप बदलकर आए भगवान जगन्नाथ को गले लगाकर रोते हुए पूछा कि तुम बताओ मित्र! जगन्नाथ जी उनके प्रेम को क्यों नहीं समझ पा रहे हैं। इतना सुनकर भगवान जगन्नाथ जी भावुक हो उठे और उन्होंने माधवदास को अपने वास्तविक रूप में दर्शन देकर अन्न ग्रहण कराया ! माधवदास कई वर्षों तक पुरी में रहकर भगवान जगन्नाथ जी की भक्ति करते रहे और हर रोज उनके दर्शन करते। दोनों मित्र बन गए। कई वर्षों बाद प्रकृति चक्र घूमा और माधवदास युवा अवस्था से वृद्धावस्था में प्रवेश करने लगे। इस समय के दौरान माधवदास जी बीमार पड़ गए। उनकी बीमारी में भगवान जगन्नाथ ने दिन-रात उनकी सेवा की। बीमारी से कमजोर हो चुके माधवदास ने एक दिन भगवान जगन्नाथ से कहा-प्रभु! आप तो जगत के स्वामी हैं, तो क्या आप मेरी बीमारी ठीक नहीं कर सकते?" इसके जवाब में भगवान जगन्नाथ ने कहा- "मित्र माधवदास! मैं तुम्हें मोक्ष देना चाहता हूं। पिछले जन्म के कर्म भोगने के बाद तुम पवित्र हो जाओगे। अभी तुम्हारी बीमारी के बस 15 दिन बचे हैं।" प्रभु जगन्नाथ की बात सुनकर माधवदास ने कराहते हुए कहा-"प्रभु! लेकिन मुझे अत्यंत पीड़ा हो रही है।" यह सुनते ही प्रभु जगन्नाथ ने एक चमत्कार किया और माधवदास की 15 दिनों की बची हुई बीमारी की पीड़ा अपने ऊपर ले ली। इस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा थी। माधवदास ठीक हो गए लेकिन प्रभु जगन्नाथ बीमार पड़ गए। इस तरह कुछ समय बाद माधवदास जी को मोक्ष मिला और तब से प्रभु जगन्नाथ अपने परम भक्तों की 15 दिनों की बीमारी अपने ऊपर ले लेते हैं और हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन से अगले 15 दिनों के लिए बीमार पड़ते हैं और एकांतवास में चले जाते हैं। प्रबल प्रेम के पाले पड़ के, प्रभु को नियम बदलते देखा अपना मान भले टल जाए, भक्त का मान न टलते देखा* जय जगन्नाथ महाप्रभु 🙏🙏 हरे कृष्ण हरे कृष्ण 🙏♥️♥️ #bhakti #radhekrishna #जगन्नाथ
Comments (4)

neeraj
Jun 22, 2025
जय स्वामी जगन्नाथ

विद्या सागर शुक्ल
Jun 22, 2025
जय श्री जगन्नाथ

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Jun 22, 2025
ॐ नमः शिवाय 🙏

Rama Devi Sahu
Jun 22, 2025
Nilachal Nivasaya Nityaya Paramatmane ‼️ Balabhadra Subhadrabhyam Jagannathyte Namah 🙏🌹🌹
