
Rama Devi Sahu
242 days ago
"होली खेलूं कहि कबीररंग दे चुनरिया। राम नाम का रंग लागीमन की चुनरिया॥ काम क्रोध मद लोभ मोह कोडारो हृदय निकार। ज्ञान की पिचकारीप्रेम का रंग भर लाय॥ कबीर ऐसी होली खेलिएसाँचा शब्द की मार। धन्य-धन्य वह होलीराम रंगी चुनरिया॥"

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
