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Rama Devi Sahu

1 hours ago

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 28 अगस्त 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - पूर्णिमा सुबह 09:08 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा* *⛅नक्षत्र -‌ शतभिषा प्रातः 03:13 अगस्त 29 तक तत्पश्चात् पूर्वभाद्रपद* *⛅योग - अतिगण्ड सुबह 07:28 तक तत्पश्चात् सुकर्मा* *⛅राहुकाल - सुबह 10:53 से दोपहर 12:28 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:08* *⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:37 से प्रातः 05:22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा, श्रावणी उपकर्म, संस्कृत दिवस, गायत्री जयंती, गायत्री जापम, वर लक्ष्मी व्रत* *🌥️विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* 🪔 *_आरती ज्योत से जो जगाओ_* 🙏 गुरु पूर्णिमा के तीस दिन दिन बाद रक्षा पूर्णिमा है, आबू में एक गुरु शिखर है दत्त पावड़्या, माने गुरु शिखर बड़ा शिखर.. ऐसे, हे गुरु पूर्णिमा बड़े में बड़े। परमात्मा को पाने की महत्त्वपूर्ण पूर्णिमा है.. संसार और संसार की सब वस्तु लघु है लेकिन आत्मा परमात्मा के आगे बहुत नन्ही.. प्रकृति। और उसका, सारा पसारा परमात्मा के आगे बहुत नन्हा है... यह नन्हा भी बहुत, बड़ा है रॉकेट चलाते जाओ कहाँ तक पूर्ण होगा...ये *_वैज्ञानिकों_* के बस का नहीं है... एक, सेकंड में 186000 माइल्स प्रकाश की गति है... सूरज की किरण, आती है तो आठ मिनट में धरती पर मिलती है, प्रकाश की, गति से ही तुम्हारे मोबाइल की रिंग एक सेकंड में बजने लगती है, तो प्रकाश की गति इतनी तीव्र है वैज्ञानिकों ने यंत्रों से खोजते, खोजते सौ प्रकाश वर्ष, एक वर्ष में तो अरबों खरबों किलोमीटर हो जाएंगे, दो सौ प्रकाश वर्षों तक का जाँच कर लिया.. ना हूरें हैं ना शराब के चश्म, कोई कुतिया भी नहीं मिलेगी। अगर होते तो वैज्ञानिकों को पेशाब फिल्टर करके नहीं पीना पड़ता, रॉकेट में नपा तुला लेकर जाते हैं, उसके बाद अपना पेशाब ही फिल्टर करके पीना पड़ता है। अगर शराब के चश्म होते तो वैज्ञानिकों शुद्ध जल भी ढूँढ लेते, सरकारी संपत्ति का सहयोग भी मिलता ही है.. तो यह मुसलमान युवकों को भ्रमित किया जाता है कि मानव बम बटन दबाओ, काफिरों को उड़ाओ, तुम्हें हूरें मिलेगी.. कोई बीमार कुतिया भी वहाँ नहीं मिलेगी और भीड़ में मानव बम का उपयोग करते हैं, निर्दोष महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े, केवल हिन्दू नहीं होते उसमें मुसलमान भी होते हैं... मुसलमान युवकों को मानव बम का उपयोग कराते हैं, ये उनके साथ निरा धोखा है.. लेकिन *_मनोरथा दुर्जनानाम्_*, दुर्जन आदमियों के मनोरथ क्या क्या कर देते हैं, जड़वा लेते हैं.. तो *_गुरुपूनम_* आपको लगाता से ऊपर उठाता है, सबमें एक, एक में सब, एक ही सत्ता है, उस सत्ता का नाम *_परब्रह्म परमात्मा_* है, चींटी से लेकर ब्रह्मा तक उसी की सत्ता है.. लेकिन लेकिन वो सत्ता कब शुरू हुई, उसका ओर छोर नहीं है। सृष्टि के पहले भी वो था... आदि सत जब सृष्टि नहीं थी, सूरज नहीं था, तारे नहीं थे, स्वर्ग नहीं था, तब भी वो था... जो सत होता है, वही चेतन होता है, वही ज्ञान स्वरूप, आनंद स्वरूप, सामर्थ्य स्वरूप होता है, वही चेतन सबके भीतर है। जो *_संयम साधना_* करते हैं उनमें ज्ञान बढ़ता है, सामर्थ्य बढ़ता है, संकल्प शक्ति बढ़ती है.. उसी सत्ता से *_सती अनुसूया_* ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश को 6-6 महीने के बालक बना दिया... 🙏 *_उन देवों ने सती अनुसूया से कहा_* तुम अपने मर्म स्थान को दिखाकर, हमें भिक्षा दोगी तभी हम ग्रहण करेंगे। सती अनुसूया ने सोचा ऐसा करने से मेरा पुण्य नाश होता है। और अगर भिक्षा नहीं देती हूँ तो भी पुण्य नाश होता है। उसने ध्यान लगाकर देखा, आखिर ये साधु हैं कौन... उसने जान लिया कि नारद को मैंने सर्दी पाक खिलाया था और उसने जाकर ब्रह्माणी, रुद्राणी, लक्ष्मी जी के आगे मेरी प्रशंसा की। स्त्रियों को अपनी तारीफ अच्छी लगती है, लेकिन उनके आगे किसी और स्त्री की तारीफ करो तो खटाई छा जाती है। उन देवियों को लगा धरती की माई का इतना प्रभाव है तो हमारा क्या होगा... उन्होंने अपने पतियों को सती अनुसूया का प्रभाव कम करने के लिए भेजा। उन देवों ने सोचा कि इसी बहाने मनुष्य में कितना सामर्

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