
Rama Devi Sahu
301 days ago
#पर्वतधारी_हनुमान् 🪔 जब लक्ष्मणजी जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे थे, तब सबकी आशा केवल पवनपुत्र हनुमान पर टिकी हुई थी। हनुमानजी दौड़े द्रोणाचल पर्वत की ओर… पर संजीवनी बूटी पहचानना कठिन हो गया। समय बहुत कम था ⏳ – सूर्योदय से पहले औषधि न पहुँची तो लक्ष्मणजी के प्राण बचाना असंभव! 🔥 तब महाबली हनुमान ने संकल्प लिया – "जब औषधि नहीं पहचान पा रहा तो क्यों न पूरा पर्वत ही ले चलूँ?" और देखते ही देखते… हनुमानजी ने अपने कर-कमल में पूरा द्रोणाचल उठा लिया! आकाश में वह दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अंधकार में बिजली की लकीर चमक रही हो। देवता, गंधर्व, किन्नर सब विस्मित होकर उनकी जयकार करने लगे। यही हैं हमारे संकटमोचन हनुमान – जिन्हें भजने से असंभव भी संभव हो जाता है। 🙏 🌺 हनुमान जी पर्वतधारी रूप में 🌺 सदैव अपने भक्तों के संकट हरते हैं और उन्हें विजय दिलाते हैं। 🚩🙏 जय श्रीराम 🙏

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