
Rama Devi Sahu
268 days ago
🙏🦋🦋🦋 "सती अनुसूईया"🦋🦋🦋🙏 सती अनुसूईया महर्षि अत्री की पत्नी थीं। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थीं। एक दिन देव ऋषि नारद जी बारी-बारी से विष्णुजी, शिव जी और ब्रह्मा जी की अनुपस्थिति में विष्णु लोक, शिवलोक तथा ब्रह्मलोक पहुँचे। वहाँ जाकर उन्होंने लक्ष्मी जी, पार्वती जी और सावित्री जी के सामने अनुसुइया के पतिव्रत धर्म की बढ़ चढ़ के प्रशंसा की तथा कहा की समस्त सृष्टि में उससे बढ़ कर कोई पतिव्रता नहीं है। नारद जी की बातें सुनकर तीनो देवियाँ सोचने लगीं कि आखिर अनुसुइया के पतिव्रत धर्म में ऐसी क्या बात है जो उसकी चर्चा स्वर्गलोक तक हो रही है ? तीनों देवीयों को अनुसुइया से ईर्ष्या होने लगी। नारद जी के वहाँ से चले जाने के बाद सावित्री, लक्ष्मी तथा पार्वती एक जगह इक्ट्ठी हुई तथा अनुसूईया के पतिव्रत धर्म को खंडित कराने के बारे में सोचने लगी। उन्होंने निश्चय किया कि हम अपने पतियों को वहाँ भेज कर अनुसूईया का पतिव्रत धर्म खंडित कराएंगे। ब्रह्मा, विष्णु और शिव जब अपने अपने स्थान पर पहुँचे तो तीनों देवियों ने उनसे अनुसूईया का पतिव्रत धर्म खंडित कराने की जिद्द की। तीनों देवों ने बहुत समझाया कि यह पाप हमसे मत करवाओ। परन्तु तीनों देवियों ने उनकी एक ना सुनी और अंत में तीनों देवो को इसके लिए राजी होना पड़ा। तीनों देवों ने साधु वेश धारण किया तथा अत्रि ऋषि के आश्रम पर पहुँचे। उस समय अनुसूईया जी आश्रम पर अकेली थीं। साधुवेश में तीन अतिथियों को द्वार पर देख कर अनुसूईया ने भोजन ग्रहण करने का आग्रह किया। तीनों साधुओं ने कहा कि हम आपका भोजन अवश्य ग्रहण करेंगे। परन्तु एक शर्त पर कि आप हमें निवस्त्र होकर भोजन कराओगी। अनुसूईया ने साधुओं के शाप के भय से तथा अतिथि सेवा से वंचित रहने के पाप के भय से परमात्मा से प्रार्थना की कि हे परमेश्वर ! इन तीनों को छः-छः महीनें के बच्चे की आयु के शिशु बनाओ। जिससे मेरा पतिव्रत धर्म भी खण्डित न हो तथा साधुओं को आहार भी प्राप्त हो व अतिथि सेवा न करने का पाप भी न लगे। परमेश्वर की कृपा से तीनों देवता छः-छः महीने के बच्चे बन गए तथा अनुसूईया ने तीनों को निःवस्त्र होकर दूध पिलाया तथा पालने में लेटा दिया। जब तीनों देव अपने स्थान पर नहीं लौटे तो देवियाँ व्याकुल हो गईं। तब नारद ने वहाँ आकर सारी बात बताई की तीनों देवों को तो अनुसुइया ने अपने सतीत्व से बालक बना दिया है। यह सुनकर तीनों देवियों ने अत्रि ऋषि के आश्रम पर पहुँचकर माता अनुसुइया से माफ़ी माँगी और कहा कि हमसे ईर्ष्यावश यह गलती हुई है। इनके लाख मना करने पर भी हमने इन्हें यह घृणित कार्य करने भेजा। कृप्या आप इन्हें पुनः उसी अवस्था में कीजिए। आपकी हम आभारी होंगी। इतना सुनकर अत्री ऋषि की पत्नी अनुसूईया ने तीनों बालक को वापस उनके वास्तविक रूप में ला दिया। अत्री ऋषि व अनुसूईया से तीनों भगवानों ने वर मांगने को कहा। तब अनुसूईया ने कहा कि आप तीनों हमारे घर बालक बन कर पुत्र रूप में आएँ। हम निःसंतान हैं। तीनों भगवानों ने तथास्तु कहा तथा अपनी-अपनी पत्नियों के साथ अपने-अपने लोक को प्रस्थान कर गए। कालान्तर में दतात्रोय रूप में भगवान विष्णु का, चन्द्रमा के रूप में ब्रह्मा का, तथा दुर्वासा के रूप में भगवान शिव का जन्म अनुसूईया के गर्भ से हुआ। जय सती अनुसुईया माता

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Dec 5, 2025
Jai Ho Mata Anusuya ki 🙏 Subha Ratri Jii 🌹🌹

Riya Riya 💖💖
Dec 5, 2025
Jai mata rani 🙏🙏

Rama Devi Sahu
Dec 5, 2025
Dhanyawad 🌹

Sanju ❤️
Dec 5, 2025
bhut sundar ❤️👏
