
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
113 days ago
*अमृत कलश* 📖 *श्रीकृष्ण ज्ञान कथा* > *शीर्षक: "एक मुट्ठी रेत और अहंकार"*🕉️💎 एक प्रतापी राजा ने श्री कृष्ण से पूछा— *"प्रभु! मैंने प्रजा के लिए बड़े-बड़े महल, तालाब और भव्य मंदिर बनवाए हैं, क्या मुझे इससे मोक्ष मिलेगा?"* 🤔🏰👑 कान्हा मुस्कुराए और राजा को साथ लेकर एक नगर की यात्रा पर निकल पड़े। रास्ते में प्रभु ने नीचे झुककर *एक मुट्ठी रेत उठाई और राजा से बोले— "राजन! जरा इस रेत के कणों को गिनकर बताओ।"* 🏜️✨ राजा हैरान होकर बोला— *"प्रभु! यह तो सर्वथा असंभव है, रेत के कण तो अनगिनत हैं।"* 😮💎 तब द्वारकाधीश बड़े शांत स्वर में बोले— *"राजन! ठीक इसी प्रकार मनुष्य की इच्छाएं और उसकी योजनाएं भी अनगिनत होती हैं। जब तक तुम्हारे भीतर 'मैंने यह किया' का अहंकार रहेगा, तब तक मुक्ति का मार्ग बंद रहेगा। पुण्य कर्म अवश्य करो, लेकिन उसे अपनी उपलब्धि मत समझो, उसे मेरी सेवा समझकर भूल जाओ।"* 🏺❤️⚖️ > *सीख:* 🌿 संसार के भौतिक निर्माण क्षणभंगुर हैं। असली पुण्य तब मिलता है जब आप अपने भीतर के 'अहंकार' का महल ढहाकर पूरी तरह प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाते हैं। 🙌🦚🧘♂️ 🪷 *।। राधे राधे ।।* 🪷
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