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Rama Devi Sahu

152 days ago

*सनातन की सीख* दुष्ट को कभी छोड़ो मत, चाहे अपना गेंद फेक कर ही विवाद मोल क्यों न लेना पड़े।क्या गेंद यूँ ही यमुना में चली गयी थी या फिर श्रीकृष्ण ने जानबूझकर गेंद यमुना में फेंकी थी..? श्रीकृष्ण ने गेंद जानबूझ कर यमुना में फेंकी थी।यमुना तो अपने तट पर बसे लोगों की अपना जल पिला रही थी, कालिया ने आकर मथुरा के पास यमुना में कब्जा कर लिया था और यमुना का जल लेने आने वालों का मौका देखकर शिकार करने लगा। कालिया के भय से गाँव वाले पलायन करने लगे और यमुना के उस तट पर नही जाते थे।गाँव वाले काफी दूर का फेरा लगाकर दूर से यमुना का जल लाते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में गेंद जानबूझकर इसलिए फेंकी थी, कि वो आने वाले युग को संदेश देना चाहते थे कि दुष्ट के भय से पलायन करना कोई उपाय नहीं है बल्कि दुष्ट के घर में घुसकर उसका मर्दन करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण संसार को बताना चाहते थे कि दुष्ट के हमले का इंतजार मत करो बल्कि खुद कोई बहाना बनाकर उसके दांत तोड़ दो, शत्रु के शक्तिशाली होने की प्रतीक्षा मत करो। बल्कि खुद ही उसके घर में गेंद फेंको और गेंद को लेने के बहाने उसके घर के भीतर घुसो, वो दुष्ट तुम पर हमला अवश्य करेगा और जब वो तुम पर हमला करे उस दुष्ट का मर्दन कर दो। और हाँ, यह भी याद रखो कि- जब कालिया का मर्दन करने उसके घर में घुसो तो उसे चुपचाप खत्म मत कर दो बल्कि बलराम, मनसुखा, आदि को गांव वालों को बुलाने भेज दो।ताकि वो भी आकर देख लें कि जिस कालिया के डर से वो लोग पलायन कर रहे थे, वो कालिया कितना कमजोर है इधर श्रीकृष्ण यमुना में कूड़े और उधर बलराम भागे गाँव की ओर।* बलराम चिल्लाए, मइया, बाबा, काका, मामा, दादा, दौड़ो, कान्हा यमुना में कूद गया है।क्या आपको लगता है कि शेषावतार बलराम भय से चिल्ला रहे थे.? बलराम भय से नहीं चिल्ला रहे थे बल्कि चाह रहे थे कि आज सारा गांव कालिया मर्दन होते देख ले। सभी देख लें कि किसी दुष्ट से डरने की नहीं बल्कि दुष्ट को नाथकर उसके सर पर सवार होने की जरूरत है। इधर हाहाकार करते गांव वाले यमुना के तट पर पहुंचे और उधर श्रीकृष्ण ने कालिया को धर दबोचा। जब श्रीकृष्ण ने कालिया की गर्दन मरोड़ दी तो वह गिड़गिड़ाया- हमने तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगाड़ा, फिर तुम मुझे क्यों मार रहे हो।श्रीकृष्ण बोले- मैं अपने ऊपर अत्याचार होने का इंतजार नहीं करता, मैं तो एक-एक दुष्ट को ढूंढ कर, उसे दण्ड देने आया हूँ। कालिया गिड़गिड़ाने लगा, साथ में उसकी पत्नियों ने भी श्रीकृष्ण के पैर पकड़ लिए और अपनी छाती पीटने लगीं, आज भी ऐसा ही होता है।आपने देखा ही होगा कि दुष्टों के परिवार छाती पीटने में बहुत माहिर होते हैं। जब सामने वाला शक्तिशाली हो तो वह रोने पीटने लगते हैं कालिया भी कसम खाने लगा, इस बार मुझे छोड़ दो, तो मैं यहां से चला जाऊंगा। श्रीकृष्ण ने कहा- मैं तेरे प्राण तो छोड़ दूंगा, लेकिन तेरे भय को तो समाप्त करना जरूरी है। एक बार तेरे भय का मर्दन हो जाय, उसके बाद अगर तू दुबारा आ भी जायगा, तो तुझसे कोई डरेगा नहीं, तब कोई और भी तुझे पीट देगा। अब तू जल के ऊपर चल, आज तेरे सर पर ही होगा नृत्य, हमें दुनिया को दिखाना है कि दुष्टों के नकेल कसकर उनके सर पर कैसे चढ़ा जाता है। और फिर संसार ने देखा, कालिया सर पर नाचते कृष्ण को श्रीकृष्ण ने यही सिखाया है कि दुष्ट को कभी छोड़ो मत, चाहे अपना गेंद उसके घर में फेक कर ही विवाद मोल क्यों न लेना पड़े.? आज भी जो अधर्मी मौका देख-देख कर हमले करते हैं, उनको समूल नष्ट करना होगा तभी विश्व में शान्ति की स्थापना हो सकेगी।चाहे इसके लिए खुद ही गेंद क्यों न फेंकनी पड़े.? जय श्रीराम जय श्री कृष्ण।🙏

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 31, 2026

🙏‼️ Shri Krishna Govind Hare Murari Hey nath Narayan Vasudeva ‼️🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Mar 31, 2026

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी है नाथ नारायण वासुदेवाय नमो नमः जय श्री राधे कृष्णा जी शुभ संध्या वंदन एवम स्नेहिल सादर नमन सदेव प्रगतिशील प्रकाशमय आनंदमय खुशियों से परिपूर्ण रहे 🙏🙏🙏☘️☘️🥀🥀