
Rama Devi Sahu
185 days ago
💯💥❤️भक्त बंधु मोहंती और सोने की थाली की कथा ओडिशा के जाजपुर में बंधु मोहंती नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह इतना निर्धन था कि कभी-कभी उसके परिवार को कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता था। उसकी पत्नी ने एक दिन तंग आकर कहा, "सुना है पुरी में आपके एक बहुत अमीर 'दोस्त' (जगन्नाथ जी) रहते हैं, क्या हम उनके पास मदद मांगने नहीं जा सकते?" पुरी की यात्रा बंधु मोहंती अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर पुरी पहुँच गए। लेकिन मंदिर के वैभव को देखकर वह सहम गए। उन्होंने सोचा, "प्रभु तो राजाओं के राजा हैं, मैं एक साधारण गरीब उनसे कुछ कैसे माँग सकता हूँ?" वे मंदिर के बाहर 'पेजा नला' (जहाँ मंदिर की रसोई का उबला हुआ पानी गिरता था) के पास बैठ गए। रात हो गई, मंदिर के कपाट बंद हो गए, और उनका परिवार भूख से व्याकुल था। बंधु मोहंती ने मन ही मन प्रभु से कहा, "हे सखा! आज मेरे बच्चे भूखे सो रहे हैं, पर आपकी इच्छा सर्वोपरि है।" प्रभु का आगमन आधी रात को जब सब सो रहे थे, एक काला सा ब्राह्मण बालक आया। उसके हाथ में एक बड़ी सोने की थाली थी, जो तरह-तरह के छप्पन भोगों से भरी थी। उसने बंधु मोहंती को जगाया और कहा, "उठो बंधु! जगन्नाथ जी ने तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के लिए यह प्रसाद भेजा है। इसे ग्रहण करो।" भूखे परिवार ने तृप्ति से भोजन किया। बालक ने कहा, "थाली यहीं रहने दो, मैं सुबह ले जाऊँगा" और वह गायब हो गया। चोरी का आरोप और चमत्कार अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने देखा कि भगवान जगन्नाथ की रत्न जड़ित सोने की थाली गायब है, तो हड़कंप मच गया। सैनिकों ने खोजबीन की और वह कीमती थाली गरीब बंधु मोहंती के पास सोई हुई अवस्था में मिली। उसे 'चोर' समझकर बंदी बना लिया गया और जेल में डाल दिया गया। बंधु मोहंती बस रोते रहे और कहते रहे, "प्रभु, यह आपकी कैसी लीला है?" उसी रात पुरी के राजा को स्वप्न में भगवान जगन्नाथ आए और क्रोध में बोले: "उसे छोड़ दो! वह मेरा परम भक्त और सखा है। उसे भोजन कराने के लिए मैं स्वयं अपनी थाली लेकर गया था। वह चोर नहीं, मेरा अतिथि है।" उपसंहार राजा तुरंत जेल गए, बंधु मोहंती के चरणों में गिर पड़े और उनसे क्षमा मांगी। उन्हें ससम्मान मंदिर लाया गया और राजा ने उनके परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी ली। आज भी पुरी के मंदिर में 'बंधु मोहंती' की भक्ति का गुणगान किया जाता है। सीख: भगवान को धन या छप्पन भोग की भूख नहीं है, वे केवल सच्चे प्रेम और अटूट विश्वास के भूखे हैं।

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