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Rama Devi Sahu

13 days ago

कहीं बाहर दान-पुण्य मत करो… पहले अपने घर में पुण्य कमाओ। एक बार एक व्यक्ति एक संत के पास गया और बोला— “महाराज! मैं बहुत दान-पुण्य करना चाहता हूँ। गरीबों को भोजन करवाऊँ, वस्त्र दान करूँ और मंदिर में चढ़ावा चढ़ाऊँ… ताकि मेरे जीवन में सुख-शांति आए।” संत मुस्कुराए और बोले— “बहुत अच्छी भावना है… लेकिन पहले घर जाकर एक काम करो।” व्यक्ति ने पूछा,“क्या करूँ महाराज?” संत ने कहा— “अपनी माता-पिता से पूछना कि उन्हें क्या पसंद है। बाज़ार से वही चीज़ अपने हाथों से खरीदकर लाना। उन्हें अपने हाथों से देना। उनके लिए अच्छे वस्त्र लाना। उनके पास बैठना… उनके पैर दबाना… और सबसे जरूरी—उनसे प्रेम से दो शब्द बोलना।” व्यक्ति थोड़ा हैरान हुआ। बोला—“महाराज, इससे मेरा पुण्य कैसे बढ़ेगा?” संत ने कहा— जिस माता ने तुम्हें जन्म देने के लिए अपनी नींद छोड़ी, जिस पिता ने तुम्हारे भविष्य के लिए अपनी इच्छाएँ छोड़ीं, उनके चेहरे पर मुस्कान लाना भी किसी तीर्थ से कम नहीं। तुम संसार भर में दान करते फिरो,लेकिन अगर तुम्हारे अपने माता-पिता तुम्हारी प्रतीक्षा में बैठे हों और तुम्हारे पास उनके लिए समय न हो, तो अपने भीतर झाँककर देखना… कहीं तुम्हारा पुण्य बाहर और तुम्हारा धर्म घर के भीतर तो नहीं छूट गया ??? कहा जाता है कि एक वृद्ध माता-पिता अपने बेटे से केवल धन नहीं चाहते। वे चाहते हैं.... थोड़ा सा समय… दो मीठे शब्द… कभी सिर पर रखा हुआ हाथ… कभी साथ बैठकर भोजन… और कभी इतना भर— “माँ, आपको किसी चीज़ की जरूरत तो नहीं?” यकीन मानिए, जिस दिन माता-पिता के हृदय से आपके लिए सच्चे मन से— “खुश रहो बेटा… भगवान तुम्हें सुख दे…” निकल जाता है, उस दिन आपके जीवन में ऐसा आशीर्वाद उतरता है जिसे कोई बाज़ार खरीद नहीं सकता। माता-पिता का आशीर्वाद केवल शब्द नहीं होता। वह वर्षों की तपस्या, त्याग और ममता से निकली हुई वह शक्ति है, जो संतान के जीवन में अदृश्य सहारा बनकर चलती है। इसलिए… 🌸 दान करना है तो पहले घर में प्रेम बाँटिए। 🌸 सेवा करनी है तो पहले माता-पिता की सेवा कीजिए। 🌸 वस्त्र देने हैं तो पहले उनके लिए अच्छे वस्त्र लाइए। 🌸 भोजन करवाना है तो कभी प्रेम से अपने हाथों से खिलाइए। 🌸 आशीर्वाद चाहिए तो उनके चरणों में बैठ जाइए। मंदिर में भगवान के सामने हाथ जोड़ने से पहले, घर में अपने माता-पिता के सामने प्रेम से हाथ जोड़कर देखिए… शायद आपको वहीं वह भगवान मिल जाए, जिसे आप वर्षों से बाहर खोज रहे हैं। और यदि माता-पिता इस संसार में नहीं हैं, तो उनकी स्मृति में किसी जरूरतमंद की सहायता कीजिए, उनके नाम से अन्न-वस्त्र का दान कीजिए और मन से कहिए— “जहाँ भी हों, मुझे अपना आशीर्वाद देते रहिए।” जिस घर में माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान रहती है, उस घर में लक्ष्मी से पहले आशीर्वाद प्रवेश करता है। 🙏 🌺 राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा 🌺

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