
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
58 days ago
*जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश ही मनुष्य का सबसे बड़ा तनाव है। पेड़ कभी प्रयास नहीं करता कि वो सुंदर दिखे, फूल कभी चिंता नहीं करता कि लोग उसकी खुशबू को पसंद करेंगे या नहीं, नदी कभी ये साबित करने की कोशिश नहीं करती कि वो महान है। पूरा अस्तित्व सहजता में जी रहा है।* *केवल मनुष्य ही संघर्ष में जीता है। क्योंकि उसने स्वयं को प्रकृति से अलग मान लिया है। उसने सोचा कि उसे कुछ बनकर दिखाना है। इसी बनने और साबित करने की दौड़ ने उसे भीतर से थका दिया। जैसे नदी समुद्र तक पहुँचने के लिए संघर्ष नहीं करती, वो केवल बहती है। उसका विश्वास ही उसे मंजिल तक पहुँचा देता है। मनुष्य अगर अपने भीतर के इस अहंकार को छोड़ दे तो जीवन स्वयं उसे सही दिशा में ले जाने लगता है।* 🏵️🏵️🌳🌳🌳🌳🏵️🏵️ *एक संत उपदेश दे रहे थे - मनुष्य में यदि धैर्य हो तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। तभी एक व्यक्ति ने प्रश्न किया कि क्या धैर्य से आप छलनी में पानी को ठहरा सकते हो? क्या यह संभव है?* *संत ने उत्तर दिया कि पानी के बर्फ बनने तक का धैर्य यदि आपमें है तो यह भी सम्भव है।* 🏵️🏵️🌳🌳🌳🌳🏵️🏵️ *दीया और बाती, दोनों अपनी जगह सही होते हैं.....* *आग तो कोई तीसरा ही लगा रहा होता है!* 🏵️🏵️🌳🌳🌳🌳🏵️🏵️ *वो जितनी खुद नुमाइ कर रहा है,* *खुद अपनी जग हँसाई कर रहा है।* *जरा सा जोश क्या दरिया में आया,* *समंदर की बुराई कर रहा है।* *🙏नमस्कार ☕ शुभप्रभात🙏*
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