
Rama Devi Sahu
259 days ago
धन-संपत्ति नहीं, संस्कार ही सच्ची विरासत हैं। हम बच्चों को सिखाते हैं — कमाना, सफल होना, दुनिया में चमकना… पर सनातन धर्म पूछता है — क्या हमने उन्हें जीना सिखाया? हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को राज्य दिया,पर नारद ने दिया भक्ति.. राज्य मिट गया, भक्ति अमर हो गई। उपनिषद कहते हैं — माता-पिता का धर्म है : 👉 श्रद्धा देना.. 👉 विद्या देना.. 👉 धर्म देना.. ऋषि अत्रि और अनसूया ने यही दिया,और दत्तात्रेय युगों के दीप बने। धर्म जड़ों में है… और जड़ें ही जीवन हैं। ✨ आज बच्चे सब कुछ जानते हैं—तकनीक, दुनिया, सपने… पर अपनी जड़ें भूल जाते हैं। अर्जुन भी महायोद्धा थे,फिर भी टूट गए। उन्हें उठाया कौशल ने नहीं, श्रीकृष्ण की वाणी ने। 🌳 जब जड़ें भूल जाते हैं, वृक्ष गिर जाते हैं। 🌍 जब धर्म भूल जाता है, सभ्यताएँ ढह जाती हैं। बच्चे को पालना—केवल शरीर पालना नहीं,आत्मा को पालना है। 📚 शबरी की भक्ति सुनाओ—वे सीखें समर्पण 🔥 नचिकेता की कथा सुनाओ—वे सीखें निर्भयता 🕊️ राम की मर्यादा सुनाओ—वे सीखें चरित्र कथाएँ धर्म को गहरा बोध देती हैं। कौशल मिट जाते हैं, धन खो जाता है… पर संस्कार और धर्म आत्मा में सदा जीवित रहते हैं। सनातन में हर माता–पिता शाश्वत श्रृंखला की एक कड़ी हैं। हम तोड़ दें तो धर्म मिट जाता है,हम आगे बढ़ाएँ तो ज्योति सदा जलती रहती है। इसलिए अपने बच्चों को सिर्फ भविष्य नहीं, जड़ें भी दें। संस्कार दें… धर्म दें… जीवन की कला दें। संस्कार ही वह दीप है जो पीढ़ियों को रोशन करता है। ✨
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