
Rama Devi Sahu
105 days ago
अधिक मास में सामान्य दीपक जलाने का तो महत्व है ही, लेकिन **तुलसी की सूखी लकड़ी का दीपक** बनाकर दान करने या जलाने का महत्व शास्त्रों में अत्यंत दुर्लभ और सर्वोच्च माना गया है। पद्म पुराण और हरि भक्ति विलास के अनुसार, अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए तुलसी की लकड़ी का दीपक जलाना सबसे उत्तम कोटि का दीपदान माना जाता है। आइए जानते हैं इसके विशेष महत्व और फायदों के बारे में: ### 1. महापुण्य और मोक्ष की प्राप्ति धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति अधिक मास में तुलसी की सूखी लकड़ी का दीपक बनाकर भगवान विष्णु या कृष्ण के सामने जलाता है, उसे अनंत यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दीपदान से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और उसे अंत में बैकुंठ (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। ### 2. सीधे श्री हरि (भगवान विष्णु) की प्रसन्नता तुलसी जी भगवान विष्णु को प्राणों से भी प्रिय हैं। जब हम तुलसी की ही लकड़ी को घी में डुबोकर दीपक के रूप में प्रज्वलित करते हैं, तो भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। अधिक मास के स्वामी स्वयं पुरुषोत्तम (विष्णु जी) हैं, इसलिए इस महीने में यह उपाय सीधे उनकी कृपा दिलाता है। ### 3. पितरों की मुक्ति (पितृ दोष से शांति) ऐसा माना जाता है कि यदि अधिक मास में तुलसी की लकड़ी का दीपक जलाकर भगवान को अर्पित किया जाए, तो इससे व्यक्ति के पितृ तृप्त होते हैं। अगर परिवार में किसी भी प्रकार का पितृ दोष हो या तरक्की रुकी हो, तो इस दीपदान से वह कष्ट दूर होता है। ### 4. घर में अखंड लक्ष्मी का वास अधिक मास में इस विशेष दीपदान को करने से घर की दरिद्रता का नाश होता है। माता लक्ष्मी उस घर में स्थायी रूप से वास करती हैं जहां हरिप्रिया तुलसी की लकड़ी से भगवान विष्णु की आरती या दीपदान किया जाता है। ### 🪔 तुलसी लकड़ी का दीपक कैसे बनाएं और जलाएं? यह दीपक मिट्टी के दीये की तरह नहीं बनता, बल्कि इसमें तुलसी की लकड़ी को बत्ती (Wick) की तरह इस्तेमाल किया जाता है: 1. **सूखी लकड़ी लें:** तुलसी के पौधे से कभी भी हरी या जीवित लकड़ी न तोड़ें। जो लकड़ी अपने आप सूखकर गिर गई हो या सूख चुकी हो, केवल उसी का उपयोग करें। 2. **रुई के साथ लपेटें:** तुलसी की छोटी सी सूखी लकड़ी लें। उस पर थोड़ा सा कपूर या रुई (कपास) लपेट लें ताकि वह आसानी से जल सके। 3. **शुद्ध घी का प्रयोग:** इस तैयार बत्ती को मिट्टी या पीतल के दीपक में रखें और उसमें **गाय का शुद्ध घी** डालें। 4. **भगवान को अर्पित करें:** इस दीपक को जलाकर आप माता तुलसी के पास रख सकते हैं या फिर मंदिर में भगवान विष्णु, श्री कृष्ण या लड्डू गोपाल के सामने इससे आरती करें या उनके चरणों के पास रख दें। > **एक छोटा सा नियम:** यदि आप पूरे अधिक मास में रोज़ ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, तो अधिक मास की **एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या या द्वादशी** जैसी मुख्य तिथियों पर यह दीपदान करके भी इसका पूरा फल पा सकते हैं।

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