
Rama Devi Sahu
63 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 28 जून 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - चतुर्दशी प्रातः 03:06 जून 29 तक तत्पश्चात् पूर्णिमा* *⛅नक्षत्र - ज्येष्ठा मध्यरात्रि 01:08 तक तत्पश्चात् मूल* *⛅योग - शुभ दोपहर 01:30 तक तत्पश्चात् शुक्ल* *⛅राहुकाल - शाम 05:35 से शाम 07:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:44* *⛅सूर्यास्त - 07:17 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:20 से प्रातः 05:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️ विशेष - चतुर्दशी को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* 🚩 *तेजस्विनी भव* 👉 *कुसंग और सत्संग का प्रभाव* 👉 *एक युवती का भविष्य उसकी संगति से बनता है* एक माँ ने अपनी बेटी 👩🦰से पूछा— "बेटी,👩🦰 क्या तुम जानती हो कि किसी व्यक्ति का भविष्य केवल उसकी बुद्धि या सुंदरता से नहीं, बल्कि उसकी संगति से भी तय होता है ?" 👉 *बेटी ने आश्चर्य से पूछा—"माँ, क्या संगति का प्रभाव इतना बड़ा होता है?"* माँ उसे बगीचे में ले गई। वहाँ दो पौधे 🌿🌿 लगे थे । एक पौधा 🌱 माली की नियमित देखभाल में था । उसे समय पर पानी, धूप और खाद मिलती थी। वह हरा-भरा था, फूलों से लदा हुआ था। दूसरा पौधा 🌱 झाड़ियों के बीच पड़ा था। उसे न धूप ठीक से मिलती थी, न देखभाल। धीरे-धीरे वह मुरझाने लगा ।😒 माँ ने कहा— "बेटी, दोनों पौधों 🌱🌱के बीज एक जैसे थे, लेकिन वातावरण अलग था । इसलिए उनका परिणाम भी अलग हो गया । मनुष्य के जीवन में भी यही होता है।"🌿🌿 👉 आज की दुनिया में हर मुस्कुराने वाला व्यक्ति हमारा हितैषी नहीं होता । कई बार कुसंग आकर्षण, आधुनिकता और "सब ऐसा ही करते हैं" जैसी बातों का रूप लेकर हमारे सामने आता है । वह धीरे-धीरे हमारी सोच बदलता है । पहले हमें गलत बात छोटी लगने लगती है, फिर वही आदत बन जाती है और अंत में वही आदत हमारे चरित्र का हिस्सा बन जाती है ।🌿🌿 👉 कुसंग कभी यह नहीं कहता कि *"मैं तुम्हारा जीवन बिगाड़ने आया हूँ।"* वह तो मित्रता, मनोरंजन, फैशन, झूठी आज़ादी या क्षणिक सुख के रूप में आता है । जब तक उसकी पहचान होती है, तब तक कई बार बहुत कुछ खो चुका होता है—समय,🧭⏰ आत्मविश्वास, 💪 सम्मान और मन की शांति । सत्संग ठीक इसके विपरीत है। सत्संग अर्थात् जहाँ से अच्छे विचार मिलें, जहाँ से अपने माता-पिता का सम्मान करना सीखें, जहाँ अपने लक्ष्य की याद बनी रहे, जहाँ चरित्र और आत्मसम्मान मजबूत हों—वही सत्संग है। ऐसी अच्छी बातें सुनने को मिलें । एक अच्छी पुस्तक,📜 एक प्रेरणादायक शिक्षक,👩🦰👨🦱 एक संस्कारी सहेली 👧 या घर का सकारात्मक वातावरण भी सत्संग बन सकता है । 🌿 👉 एक समझदार युवती 👩🦰 जानती है कि जीवन के बड़े निर्णय हमेशा छोटी-छोटी संगतियों से प्रभावित होते हैं। 👉 जिस संगति में समय का मूल्य नहीं, वहाँ भविष्य का भी मूल्य नहीं होता । जिस संगति में मर्यादा का सम्मान नहीं, वहाँ सम्मान टिकता भी नहीं । 👉 इसलिए मित्र चुनते समय केवल यह मत देखिए कि कौन आपके साथ हँसता है, बल्कि यह देखिए कि कौन आपको गिरने से बचाता है, कौन आपकी अनुपस्थिति में भी आपका सम्मान करता है, और कौन आपको अपने लक्ष्य और संस्कारों के प्रति दृढ़ बनाता है। 🧭 *याद रखिए—* फूल 🌸 की सुगंध उसके पास रहने वालों तक पहुँच जाती है, और धुएँ की कालिख भी अपने आसपास सबको प्रभावित कर देती है। संगति का प्रभाव भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। आज यदि एक युवती अपनी संगति सही चुन ले, तो वह केवल अपना भविष्य नहीं संवारती, बल्कि अपने परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बन जाती है। क्योंकि सुंदर चेहरा कुछ समय के लिए आकर्षित कर सकता है, लेकिन सुंदर चरित्र जीवनभर सम्मान दिलाता है। और सुंदर चरित्र की नींव हमेशा अच्छी संगति पर ही रखी जाती है। 👉 "संगति सोच-समझकर चुनिए, क्योंकि वही आपके व्यक्तित्व, आपके संस्कार और आपके भविष्य की सबसे बड़ी शिल्पकार होती है।" *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
