
Rama Devi Sahu
439 days ago
🙏‼️ Radhey Radhey ‼️🙏 **************************** *अमृत कथा* *एक समय की बात है गुरु और शिष्य किसी गांव से गुजर रहे थे थोड़ी दूर चलने पर गुरू जी ने शिष्य से एक कपड़े का टुकड़ा मांगा!_* *_आज्ञाकारी शिष्य ने बिना कोई विचार किए अपनी धोती का एक साईड फाड़कर गुरू जी को दे दिया,_* *_गुरू जी ने उस टुकड़े को अपने पास रख लिया थोड़ी दूर चलने पर गांव के बाहर एक खुला मैदान आया पास ही एक पहाड़ी पर बनी सड़क से एक बैलगाड़ी गुजर रही थी एक पत्थर बैलगाड़ी के टकराने से लुढ़कती हुई नीचे आई और गुरु जी के पैरों को लगी और खून बहने लगा,_* *_शिष्य ने गुरू जी को एक पेड़ के नीचे बैठाया घबराते हुए पास के गांव में जाकर एक घर से औषधी मांग कर लाया और गुरु जी के पैरों में औषधी लगाकर पट्टी बांध दी!_* *_कुछ समय बाद गुरू और शिष्य आश्रम पहुंचे वहाँ शिष्य ने गुरू मां को सारा हाल कह सुनाया गुरू जी की पत्नी ने गुरू जी के पैरों को जाकर देखा तो हैरान रह गई_* *_क्योंकि अभी भी गुरु जी के पैरों पर लगी चोट से खून बह रहा था औषधी और पट्टी तो दूसरे पैर पर बंधी थी_* *_गुरू पत्नी ने गुरू जी से पूछा:---कि आपने पहले क्यों नहीं बताया कि पट्टी गलत जगह बांधी जा रही है आप चुप क्यों रहे?_* *_तब गुरू जी ने शिष्य की ओर देखते हुए कहा ये इतना घबराया हुआ था कि इसे ध्यान ही नहीं रहा कि ये पट्टी कहाँ लगा रहा है!_* *कुछ वक्त बीतने पर शिष्य ने गुरू से पूछा:-- हे गुरूदेव ब्रह्मज्ञानी गुरू के तो कोई प्रारब्ध कर्म शेष नहीं होते हैं तो फिर आपको किस कर्म के परिणाम स्वरूप ये चोट लगी?_* *_गुरू जी ने चोट लगने,पट्टी गलत जगह बंधने, खून बहते रहने पर भी कुछ नहीं कहा था,_* *लेकिन जब शिष्य ने सवाल किया तब गुरू जी ने कहा-- ये मेरे नहीं तुम्हारे कर्मों के फल हैं_* *_शिष्य-- हैरानी से मेरे कर्मों के फल गुरू जी--- हाँ, बैलगाड़ी से टकराकर जो चट्टान लुढ़कता हुआ आ रहा था वह तुम्हारे पूर्व के प्रारब्ध कर्मानुसार तुम्हें जीवनभर के लिए अपाहिज बनाने वाला था_* *शिष्य आश्चर्य से भरा हुआ सुनता जा रहा था_* *गुरू जी-- तुमने मेरे मांगने पर कपड़े का टुकड़ दे दिया वो मैंने इसलिए मांगा था, पैरों में चोट का लगना,पट्टी का गलत जगह बांधना और घाव से खून का बहते रहना आवश्यक था उससे तुम्हारे कर्म कट गए_* *_यह सब सुनकर शिष्य बहुत लज्जित हुआ।सिर झुकाकर एक ओर किनारे खड़ा हो गया और क्षमा मांगते हुए कहने लगा_* शिष्य--गुरूदेव मुझे क्षमा करें अब मैं ऐसे कोई कर्म नहीं करूंगा जिससे आपको मेरे पाप कर्मों का फल भोगना पड़े..!! *🙏🙏🏻 श्री हरिदास 🙏🏼🙏🏽 हमारी एक गलती या पाप हमारे गुरुदेव के ऊपर १०० गुना होकर आते है 🙏🙏
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
