
Rama Devi Sahu
266 days ago
राम ब्रम्ह परमार्थ रूपा। श्री राम उत्तम पुरुष है, वे परम अर्थ रूप को प्रगट करते है, पुरुष का अर्थ धर्म अर्थ काम मोक्ष है, उत्तम पुरुष का पांचवां पुरुषार्थ प्रेम और छठवां सेवा, प्रेम से सेवा करने पर उत्तम पुरुष होते है। इससे वह ब्रम्ह,यानी विचारना और आगे बढ़ना। श्री कृष्ण कहते हैं,हे पार्थ में ईश्वर हूं। यानी दृष्टा हूं, कैसा ईश्वर जिसके छै भाइयों की हत्या हो गई और माता पिता निरपराध कैद है और स्वयं सबके पैर धोते और झूठे पत्तल उठते है। सभी अत्याचारियों के अत्याचार को समाप्त किया पर कभी राजा नहीं बने। एक ब्रम्ह है दूसरे ईश्वर। यह है भारतीय संस्कृति की जड़। उनको आदर्श बनाकर भारत के लोकनायक जय जय जय कार कर निकल पड़े, सेवा करने । कौन रोकेगा इन परमार्थी सेवकों को।

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