MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

309 days ago

|| जय श्री राधा माधव || शोभायात्रा में तेज़ DJ, ढोल या ऊँचे गीत बजाने से भगवान अधिक प्रसन्न नहीं होते। भगवान का हृदय शोर से नहीं, भाव से प्रसन्न होता है। भक्ति का मूल्य श्रद्धा, विनम्रता, शांति, सेवा और सच्चे प्रेम से है — न कि ध्वनि की तीव्रता से। ✅ शास्त्रों का सार यही है कि— > “भगवान् हृदय की पुकार सुनते हैं, शोर की नहीं।” 🔹 यदि ढोल–नगाड़ा, कीर्तन, भजन मर्यादा में, मधुर और संयमित हों — तो वह माहौल आध्यात्मिक बनता है और सबको आनंद देता है। ✅ सच्ची भक्ति के लक्षण • मन की शुद्धि • करुणा • विनम्रता • दूसरों का हित • संयम ❌ शोर-शराबा, दिखावा, अहंकार — भक्ति के विरुद्ध है। > भगवान् भाव के भूखे हैं, आवाज़ के नहीं। शांति और मर्यादा में किया गया भजन ही सच्ची पूजा है। ईश

Post media

Comments (4)