
Rama Devi Sahu
438 days ago
🙏‼️ Radhey Radhey ‼️🙏 अजातपक्षा इव मातरं खगा: स्तन्यं यथा वत्सतरा: क्षुधार्ता: । प्रियं प्रियेव व्युषितं विषण्णा मनोऽरविन्दाक्ष दिदृक्षते त्वाम् ॥ हे कमल-नयन प्रभु, जिस प्रकार शिशु पक्षी, जिनके पंख अभी विकसित नहीं हुए होते, सदैव अपनी माता की प्रतीक्षा करते हैं कि कब वे लौटकर आएं और उन्हें भोजन दें; जिस प्रकार रस्सियों से बंधे हुए छोटे बछड़े उत्सुकता से दूध दुहने के समय की प्रतीक्षा करते हैं, कि कब उन्हें अपनी माता का दूध पीने दिया जाएगा; या जिस प्रकार एक उदास पत्नी जिसका पति घर से बाहर रहता है, सदैव उसके लौटने और सभी प्रकार से उसे संतुष्ट करने की इच्छा करती है, उसी प्रकार मैं सदैव आपकी प्रत्यक्ष सेवा करने के अवसर की लालसा करता हूं हरे कृष्ण 🙏🙏🌹
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