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RAJPUT

145 days ago

लड़कियों के एक विद्यालय में नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी, लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी। सभी छात्राएं उसे देखकर तरह-तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं, तो एक छात्रा ने बातों-बातों में ही उससे पूछ लिया, "मैडम, आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की?...?? अध्यापिका ने कहा, "पहले एक कहानी सुनाती हूं।" उसने कहा, "एक महिला को बेटे की लालसा में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसे धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छानुसार बेटा पैदा कर दे। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो-रोकर दुआ करती रही...!! अध्यापिका ने आगे कहा, "दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया, लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। रोज़ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझकर शांत हो गया। फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उन्हें बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई। यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनियां से चली जाती...!! अध्यापिका की आंखों से आंसू गिरने लगे थे। उसने आंसू पोंछकर आगे कहना शुरू किया, "अब सिर्फ एक ही बेटी ज़िंदा बची थी और वह वही बेटी थी, जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था। एक दिन अचानक मां भी इस दुनियां से चली गई। इधर पांच बेटे और एक बेटी सब धीरे-धीरे बड़े हो गए...!! अध्यापिका ने फिर कहा, "पता है वह बेटी जो ज़िंदा बची रही, मैं ही हूं। मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता अब इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और अब घर में और कोई नहीं है जो उनकी सेवा कर सके। बस मैं ही उनकी सेवा और देखभाल किया करती हूं। जिन बेटों के लिए पिताजी परेशान थे, वो पांच बेटे अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहते हैं। बस कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं।"।**** (v.s.rajawat)***** वह थोड़ा मुस्कराई। फिर बोली, "मेरे पिताजी अब हर दिन शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझसे कहा करते हैं, 'मेरी प्यारी बेटी, जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ कर देना...!! अध्यापिका की कहानी सुनकर सभी छात्राएं भावुक हो गईं। यह कहानी हमें सिखाती है कि बेटी की ममता और त्याग अद्वितीय है। एक बेटी अपने पिता के लिए सबकुछ कर सकती है, सिर्फ इसलिए कि वह अपने पिता को खुश देख सके...!! एक पिता बेटे के साथ खेल रहा था। बेटे का हौंसला बढ़ाने के लिए वह जान-बूझ कर हार जा रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपटकर रोते हुए बोली, "पापा! आप मेरे साथ खेलिए, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूं...!! इस कहानी में निहित संदेश यह है कि बेटियों की ममता और प्यार का कोई मुकाबला नहीं है। वे अपने माता-पिता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए और उनके प्यार और त्याग को समझना चाहिए...!!!!!

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Comments (4)

RAJPUT

RAJPUT

Apr 7, 2026

JAY SHREE MAHAKAAL 🙏 GOOD NIGHT JI 🙏

RAJPUT

RAJPUT

Apr 7, 2026

JAY SHREE MAHAKAAL 🙏 GOOD NIGHT JI 🙏

Radhe  🌹

Radhe 🌹

Apr 7, 2026

Jai Shree Ram 🚩🙏 Jai Hanuman 🙏🌹 Good Afternoon Ji 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 7, 2026

जब मन बहुत अशांत हो जाता है और दुनिया में कोई हमारी बात समझ नहीं पाता, तब भगवान से बात करना सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। क्योंकि भगवान ही वह सच्चे श्रोता हैं जो बिना कुछ कहे हमारे मन की हर पीड़ा समझ लेते हैं। जब हम सच्चे दिल से उन्हें पुकारते हैं, तो मन को शांति मिलती है और विश्वास जागता है कि हम अकेले नहीं हैं। जीवन की हर कठिन घड़ी में ईश्वर हमारे साथ खड़े रहते हैं, बस हमें उन पर भरोसा रखना होता है। याद रखिए, सच्ची प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। 🕉️✨ 🙏🌺श्री राम कृष्ण हरि🌺🙏