
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
148 days ago
_"क्या आपका घर 'श्वास' लेता है?"_ 🍁 ✨ क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ घरों में प्रवेश करते ही शांति का अहसास होता है… और कुछ जगहों पर अचानक बेचैनी क्यों महसूस होती है? ईंट और पत्थर से बने ये घर सिर्फ संरचनाएं नहीं हैं… इन दीवारों के भी "कान" होते हैं, जो हर आवाज और हर भावना को सुनते हैं और अपने अंदर समा लेते हैं। जिस घर में रोज झगड़े, निंदा और क्रोध होता है, वहां की दीवारें भी भारोभूत हो जाती हैं… और वह भार पूरे वातावरण में फैल जाता है। जिस घर में हंसी गूंजती है, बच्चों की मस्ती होती है, और बड़े-बुजुर्गों का मान-सम्मान होता है… वहां की दीवारें भी खुशी से झूम उठती हैं। हमारे पूर्वज 'क्रोध-भवन' अलग रखते थे ताकि गुस्सा घर की शांति को भंग न करे, आज हम अनजाने में पूरा घर ही क्रोध-भवन बना देते हैं। महंगी सजावट या फर्नीचर नहीं… बल्कि आपका प्यार, आपकी मुस्कान और आपका स्नेह ही घर का सच्चा आभूषण है। इसलिए अपने घर को "कलह-गृह" नहीं, "आनंद-धाम" बनाएं… क्योंकि आपका घर सब कुछ सुनता है — और वही ऊर्जा वापस देता है। हरे कृष्ण 🍁

Comments (2)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Apr 5, 2026
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमः धन्यवाद

Pannalal panchal
Apr 4, 2026
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
