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यह श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय का 66वाँ श्लोक है, जिसमें श्री कृष्ण ने सर्वोच्च समर्पण का मार्ग बताया है। इसका अर्थ है: "सब प्रकार के धर्मों (कर्तव्यों) का त्याग करके केवल मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो"। यह पूर्ण समर्पण और निश्चिंतता का संदेश देता है।

Comments (2)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 18, 2026

🕉️श्री नारायण नारायण धन्यवाद शुभ बुधवार हो

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 17, 2026

🙏‼️ Om Shree Paramatmane Namah ‼️🙏