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Rama Devi Sahu

135 days ago

‼️श्री राधासुधानिधि श्लोक:-२६४‼️ 🏵️श्री राधिकायै नमः🏵️ सद्योगीन्द्र सुदृश्यसान्द्ररसदानन्दैकसन्मूर्त्तयः सर्वेऽप्यद्भुतसन्महिम्न्नि मधुरे वृन्दावने सङ्गताः! ये क्रूरा अपि पापिनो न च सतां सम्भाष्य दृश्याश्च ये सर्वान् वस्तुतया निरीक्ष्य परमस्वाराध्यबुद्धिर्मम!! भावार्थ:- धाम-महिमा! अद्भुत महिमा से भरे हुए मधुर वृन्दावन में जिनका वास है, वे भले ही क्रूर, पापी व सज्जनों के दर्शन और सम्भाषण के अयोग्य हैं किन्तु वे भी योगीन्द्रों के समूह के सुन्दर दर्शन योग्य सघन-रस देने वाले एकमात्र आनन्द की मूर्ति हैं; तात्विक दृष्टि से देखकर उनके प्रति मेरी परम आराध्य बुद्धि रहे! . 🌹श्री राधे कीजे कृपा की कोर 🌹 🌺 जय श्री राधे कृष्णा जी 🌺

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