
Rama Devi Sahu
1 day ago
पावन एवं कल्याणकारी एकादशी व्रत धन्य है भारत की पुण्यभूमि और भारत की सनातन संस्कृति ! जिसने मानव को उच्च , उदात्त एवं भगवद्भक्त बनाने में व्रत की भूमिका को काफी महत्व दिया है। हमारे व्रतों का संबंध आत्मदर्शन , देवदर्शन और निरामयता से जुड़ा हुआ है। वर्ष में कोई भी दिन ऐसा नहीं रहता , जिस दिन कोई व्रत , पर्व आदि न हो। हमारी संस्कृति की नींव इसी पर टिकी हुई है। यही कारण है कि रोम , ग्रीस , मिस्र और बेबीलोन जैसी प्राचीन सभ्यताएं और संस्कृतियां काल के प्रवाह में विलुप्त हो गईं , वहीं भारत की सनातन संस्कृति अक्षुण्ण रही। व्रत का प्रधान उद्देश्य आत्म-शुद्धि तथा परमात्मा-चिंतन है। संसार में नाना प्रपञ्चों में फंसे रहने के कारण हमें परमात्म-चिंतन का अवसर कम ही मिलता है। व्रत के दिन यह अवसर सहज सुलभ हो जाता है। व्रत तीन प्रकार की बताई गई है - १ कायिक व्रत - हिंसा आदि के त्याग को " कायिक " व्रत कहते हैं। २ वाचिक व्रत - कटु वाणी , पिशुनता (चुगली) तथा निंदा के त्याग और सत्य तथा हितयुक्त मधुर भाषण करना " वाचिक व्रत " कहलाता है। ३ मानसिक व्रत - काम , क्रोध , लोभ आदि षड् विकारों से रहित रहना तथा मन से प्रभु का स्मरण एवं ध्यान करना मानसिक व्रत कहलाता है। उपर्युक्त तीनों व्रत ज्ञानेंद्रियों , कर्मेंद्रियों तथा मन के माध्यम से किए जाते हैं। हम सभी जानते हैं कि मानव में पांच ज्ञानेंद्रियां , पांच कर्मेंद्रियां और एक मन - ये सभी मिलकर एकादश (ग्यारह) होते हैं। एकादशी व्रत को पांच ज्ञानेंद्रियों, पंच कर्मेंद्रियों और मन - इन सभी 11 इंद्रियों के संयम के रूप में भी देखा जाता है। कहा गया है - पञ्च ज्ञानेन्द्रियाण्येव पञ्च कर्मेन्द्रियाणि च। मन: संयम्य धर्मार्थी चरेत् एकादशी व्रतम्।। (भगवत् गीता में भगवान श्री कृष्ण मन की गणना इन्द्रियों में ही करते हैं - " इन्द्रियाणां मन: च अस्मि " अर्थात् इंद्रियों में मैं मन हूं। " मन: षष्ठानीन्द्रियाणि " में भी मन को इन्द्रिय ही घोषित करते हैं।) पुराणों में पद्म पुराण की विशेष महिमा है। इसके सृष्टिखंड में विभिन्न तिथि , मास तथा नक्षत्र में होनेवाले व्रत का वर्णन है। उत्तरखंड में वर्ष भर की 26 एकादशी व्रतों का विधान तथा उनके माहत्म्य की कथाएं विस्तार से दी गई हैं। 12 मास में 24 तथा अधिकमास में दो अर्थात् कुल 26 एकादशियां होती हैं। सभी के भिन्न-भिन्न नाम हैं। एकादशी का आरंभ मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष से किया जाता है। यह मास भगवान का विग्रह माना जाता है। भगवान घोषणा करते हैं - " मासानां मार्गशीर्षोऽहम् "। महीने के अनुसार दोनों पक्ष के एकादशियों के नाम :--- मास कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष मार्गशीर्ष उत्पन्ना मोक्षदा पौष सफला पुत्रदा माघ षट्तिला जया फाल्गुन विजया आमलकी चैत्र पापमोचनी कामदा वैशाख वरुथिनी मोहिनी ज्येष्ठ अपरा निर्जला आषाढ़ योगिनी विष्णुशयनी श्रावण कामिका पुत्रदा भाद्रपद अजा पद्मा आश्विन इंदिरा पापांकुशा कार्तिक रम्भा प्रबोधिनी पुरुषोत्तम मास कमला कामदा ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को चंद्रमा की एकादश कलाओं का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। चंद्रमा का प्रभाव शरीर एवं मन सभी पर पड़ने से इस स्थिति में शरीर की अस्वस्थता और मन की चंचलता स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है। कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सूर्य मंडल द्वारा 11 कलाओं का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। इसी कारण उपवास द्वारा शरीर को संभालना और इष्ट पूजन द्वारा मन को संभालना - एकादशी व्रत विधान का मुख्य रहस्य है। एकादशी को हरिवासर कहा गया है। भविष्य पुराण का वचन है - शुक्ले वा यदि वा कृष्णे विष्णुपूजनतत्पर:। एकादश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोरपि।। अर्थात् विष्णुपूजा-परायण होकर शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों की ही एकादशी में उपवास करना चाहिए। मिथिलेश ओझा की ओर से आप जैसे ' व्रती ' को नमन एवं वंदन।

Comments (8)

Rama Devi Sahu
Sep 22, 2026
🙏 परिवर्तिनी एकादशी की अनंत मंगलकामनाएं! 🪷✨ भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र एकादशी तिथि है। इसे जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना, व्रत, मंत्र-जप और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। 🌸 पोस्ट में दिए गए मंत्र में भगवान श्रीकृष्ण के सत्, चित् और आनंद स्वरूप का स्मरण करते हुए उन्हें जगत की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय का कारण तथा तीनों प्रकार के तापों का नाश करने वाला बताया गया है। ✨ इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना करें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और अपने मन में श्रद्धा एवं भक्ति का भाव रखें। श्रीहरि की कृपा सभी पर बनी रहे। 🙏 परिवर्तिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं!

Rama Devi Sahu
Sep 22, 2026
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Rama Devi Sahu
Sep 22, 2026
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Rama Devi Sahu
Sep 22, 2026
🙏 परिवर्तिनी एकादशी की अनंत मंगलकामनाएं! 🪷✨ भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र एकादशी तिथि है। इसे जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना, व्रत, मंत्र-जप और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। 🌸 पोस्ट में दिए गए मंत्र में भगवान श्रीकृष्ण के सत्, चित् और आनंद स्वरूप का स्मरण करते हुए उन्हें जगत की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय का कारण तथा तीनों प्रकार के तापों का नाश करने वाला बताया गया है। ✨ इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना करें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और अपने मन में श्रद्धा एवं भक्ति का भाव रखें। श्रीहरि की कृपा सभी पर बनी रहे। 🙏 परिवर्तिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं!

swapnil
Sep 22, 2026
एकादशी ki हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को

Kalobaran mondal
Sep 22, 2026
Joy Sri krishna radhe radhe radhe radhe

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Sep 22, 2026
पार्श्व अकादशमी की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामना अखंड सौभाग्यवती सौभाग्यशाली भव एवं आयुष्मति भव ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जगत पालनहार नारायण हरि आशीर्वाद कृपा से सपरिवार को दीर्घायु यश वैभव सुख शांति समृद्धि प्रदान हो 🚩🚩🚩🙏

