
Deep
21 days ago
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं। मृगाधीश चर्मांबरम् मुण्डमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥

Comments (3)

Rama Devi Sahu
Sep 21, 2026
महामृत्युंजय मंत्र 🕉️🙏 ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध के समान सर्वत्र व्याप्त हैं और सभी का पालन-पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल अपने बंधन से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु और सभी बंधनों से मुक्त करके अमृतत्व का आशीर्वाद दें। ॐ नमः शिवाय। 🕉️🙏🔱

Shah 🩷
Sep 7, 2026
🔱 गंगाधराय, शिव गंगाधराय 🔱 हर-हर भोले, नमः शिवाय। 🕉️🙏🏻

Hansu parjapti Prajapati
Sep 7, 2026
har har mahadev 🔱 mahadev har 🌹👏
