
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
60 days ago
*अमृत कथा* 🛑 *मीरा चरित भाग 3️⃣9️⃣* 🛑 *श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव* *आज जन्माष्टमी है। राज मन्दिर और श्यामकुंज में प्रातः से ही उत्सव की तैयारियाँ होने लगीं। मीरा का मन आज बहुत विकल है। वह स्वगत कहने लगी 'दस जन्माष्टमियाँ निकल गई, सूनी ही गयीं सब... क्या आज भी? नहीं, नहीं ऐसा नहीं होगा। आज प्रभु अवश्य पधारेंगे। बाहर गये हुए लोग, भले नौकरी पर गये हों, सभी पुरुष तीज तक घर लौट आते हैं। फिर आज तो उनका जन्मदिन है. कैसे न आयेंगे भला? पति के आने पर स्त्रियाँ कितना तो शृंगार करती हैं! रात हो भले, पर सिर धोयेंगी ही। खवासिनें अगरु की धूप दे-देकर उनके केश सुखाती हैं। कोई मेंहदी लगाती है, कोई सुगंध लगाती है, *चोटी-तिलक-भूषण-वस्त्र आदि को देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई त्यौहार हो। तब.... तब मैं भी क्यों न पहले से ही शृंगार धारण कर लूँ? कौन जाने, कब पधार जायें वे!' *अब मीरा उमंग में बोल पड़ी—'ए मंगला! जा, मेरे लिये उबटन सुगंध, द्रव्य, अगरु, धूप सब तैयार करके ले आ तो। और हाँ, बलदेव दादा की बहू (खवासिन) को बुला ला मुझे स्नान कराने के लिये। चम्पा! तू भाबू से मेरे सब आभूषण और सबसे सुन्दर पोशाक ले आ। ठहर; वह सोने के डंकों के काम की पोशाक है न नीले रंगकी, वही ले आना।' *सभी को प्रसन्नता हुई कि मीरा आज शृंगार कर रही है। बाबा बिहारी दास जी की इच्छा थी कि आज रात मीरा चार भुजा नाथ के यहाँ होने वाले भजन-कीर्तन में उनका साथ दे। बाबा की इच्छा जानकर मीरा बड़ी असमंजस में पड़ी। थोड़े सोच विचार के पश्चात् वह स्वयं बाबा बिहारी दास जी के पास गयी- 'बाबा! श्री कृष्ण जन्म-समय के पूर्व, रात्रि के प्रथम प्रहर में मैं चार भुजा नाथ के मन्दिर में आपकी आज्ञा का पालन करूँगी, फिर यदि आप आज्ञा दें तो मैं जन्म के समय श्यामकुंज में आ जाऊँ?' 'अवश्य बेटी! उस समय तो तुम्हें श्यामकुंज में ही होना चाहिये। मेरी बहुत इच्छा थी कि एक बार मन्दिर में तुम मेरे साथ गाओ। बड़ी होने पर तो तुम महलों में बंद हो जाओगी। कौन जाने, ऐसा योग फिर कब मिले!' नख से शिख तक शृंगार किये मीरा चार भुजा नाथ के मन्दिर में राव दूदाजी और बाबा बिहारी दास जी के बीच तानपूरा लेकर बैठी हुई पद गायन में बाबा का साथ दे रही है..!! ✍️क्रमशः *🌼🌻श्री कृष्णं वन्दे🌻🌼*
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