
Rama Devi Sahu
130 days ago
महाभारत के युद्ध में एक पल ऐसा भी आया था जब महारथी कर्ण की मौत अर्जुन के तीरों से नहीं बल्कि साक्षात हनुमान जी के क्रोध से होने वाली थी। क्या आप जानते हैं कि अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठे शांतिप्रिय हनुमान आखिर इतने क्रोधित क्यों हो गए थे कि उनकी एक हुंकार से पूरा कुरुक्षेत्र कांप उठा था। अगर उस दिन स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें न रोका होता तो शायद महाभारत का इतिहास उसी क्षण खत्म हो गया होता। कुरुक्षेत्र का महासंग्राम अपने चरम पर था। कर्ण और अर्जुन के बीच ऐसा भयंकर युद्ध चल रहा था मानो प्रलय आ गई हो। कर्ण अपने विजय रथ पर सवार होकर अर्जुन पर विनाशकारी बाणों की वर्षा कर रहे थे। लेकिन तभी एक अनर्थ हो गया। कर्ण के धनुष से निकले कुछ अचूक बाण सीधे रथ हाक रहे श्री कृष्ण को जा लगे। उन बाणों के प्रहार से माधव का दिव्य कवच कट कर गिर गया और उनके अंगों पर घाव हो गए। अर्जुन के रथ की ध्वजा पर अदृश्य रूप में विराजमान साक्षात रुद्रावतार हनुमान जी से अपने आराध्य का यह कष्ट देखा नहीं गया। जिस प्रभु श्री राम के लिए उन्होंने लंका जला दी थी। आज उन्हीं के अवतार श्री कृष्ण को लहूलुहान देखकर हनुमान जी का महा क्रोध ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। वे भयंकर गर्जना करते हुए अपना विराट रूप धारण करके कर्ण को मारने के लिए ध्वजा से उठ खड़े हुए। उनकी उस एक गगन भेदी गर्जना से कौरव तो क्या स्वयं पांडव भी थर-थर कांपने लगे। ऐसा लगा मानो आज पूरा ब्रह्मांड ही फट जाएगा। हनुमान जी का वह प्रलयंकारी रूप देखकर महारथी कर्ण के प्राण सूख गए। उनके हाथ से धनुष छूट गया और उनका सारथी भय से जम गया। हनुमान जी के दांत कट रहे थे और उनकी आंखों से ज्वाला बरस रही थी। स्थिति को हाथ से निकलता देख भगवान श्री कृष्ण ने तुरंत हनुमान जी को रोका। माधव ने शांत स्वर में कहा, हे मारुति शांत हो जाओ। अगर तुम क्रोध में भरकर कर्ण को कुछ क्षण और ऐसे ही देखते रहे तो यह महारथी यहीं खंडित होकर भस्म हो जाएगा। हे पवन पुत्र यह तुम्हारा त्रेता युग नहीं बल्कि द्वापर युग है। यहां कोई भी तुम्हारे क्रोध तो क्या तुम्हारे तेज का एक अंश भी सहन नहीं कर सकता। अपने आराध्य श्री कृष्ण के यह वचन सुनकर हनुमान जी का क्रोध शांत हुआ और उस दिन कर्ण को एक नया जीवन दान मिला। यह घटना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि हनुमान जी की शक्ति के आगे ब्रह्मांड का कोई भी योद्धा टिक नहीं सकता। अगर आप भी बजरंगबली के इस सर्वशक्तिशाली स्वरूप को नमन करते हैं तो कमेंट्स में पूरे गर्व के साथ जय श्री राम जरूर लिखें।

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