
Rama Devi Sahu
50 days ago
ओडिशा के पुरी में होने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा इस साल 16 जुलाई को निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं। यात्रा में भगवान अपनी मौसी गुंडिचा के अलावा अपनी बुआ कुंती के मंदिर भी जाते हैं, जिन्हें 'पिशि मां' कहा जाता है। ओड़िया भाषा में 'पिशि' का अर्थ बुआ होता है। महाभारत की कथा के अनुसार, माता कुंती भगवान श्रीकृष्ण की बुआ थीं। पुरी स्थित 'पिशि मां की कुटिया' में माता कुंती और 5 पांडवों के साथ भगवान श्रीकृष्ण, जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। परंपरा के तहत, रथयात्रा के दौरान भगवान का रथ पिशि मां के मंदिर के सामने कुछ समय के लिए रोका जाता है। यहां भगवान को विशेष रूप से 'पोडा पीठा' का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने अपनी बुआ से रथयात्रा के दौरान उनके घर आने का वादा किया था। इसी वजह से जब तक पिशि मां की कुटिया में उन्हें यह भोग नहीं लगता, तब तक रथयात्रा पूरी नहीं मानी जाती।

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