
Rama Devi Sahu
104 days ago
“ये क्या अनर्थ करने जा रहे हो? रात में शव जलाने से बहुत बड़ा पाप हो जाएगा… रुक जाओ!” श्मशान घाट की ओर बढ़ते कदम अचानक ठिठक गए। चारों ओर गहरा अंधेरा, ठंडी हवा की सिसकारियां और दूर कहीं कुत्तों के रोने की आवाज माहौल को और भयावह बना रही थी। कुछ लोग डरकर पीछे हट गए, लेकिन एक युवक अपने पिता के शव को लेकर अड़ा रहा। उसके चेहरे पर दुख था, आंखों में आंसू थे… और दिल में जिद। उसका नाम था रोहित। उसके पिता एक धर्मात्मा व्यक्ति थे, लेकिन दुर्भाग्य से उनका निधन सूर्यास्त के बाद हुआ। गांव के बुजुर्गों ने समझाया—“सुबह तक इंतजार करो, यही शास्त्रों का नियम है।” लेकिन रोहित ने गुस्से में कहा—“मृत्यु का समय किसी के हाथ में नहीं, तो अंतिम संस्कार के लिए इंतजार क्यों?” उसी रात, अंधेरे श्मशान में चिता जलाई गई। जैसे ही आग की लपटें उठीं, हवा अचानक भारी हो गई। ऐसा लगा मानो आसपास कोई अनदेखी शक्तियां जाग उठी हों। पेड़ों की परछाइयां अजीब तरह से हिलने लगीं… और सन्नाटा चीखने लगा। किसी ने डरकर कहा—“भागो… ये प्रेतों का समय है!” कहते हैं, जैसा कि Garuda Purana में वर्णित है, सूर्यास्त के बाद आत्मा को मार्ग दिखाने वाला दिव्य प्रकाश समाप्त हो जाता है। रात का अंधकार आत्मा को दिशाहीन कर देता है और नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। जब चिता की आग बुझी, तो रोहित को लगा कि उसने अपना कर्तव्य निभा दिया… लेकिन असली भय तो अभी शुरू हुआ था। अगली रात से उसके घर में अजीब घटनाएं होने लगीं। दरवाजे अपने आप खुलने लगे, ठंडी हवाएं कमरे में घूमने लगीं और रात के सन्नाटे में किसी के कराहने की आवाज आने लगी। एक रात रोहित ने सपने में अपने पिता को देखा—उनका चेहरा पीड़ा से भरा था। उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “बेटा… तुमने जल्दी क्यों की? मुझे रास्ता नहीं मिला… मैं भटक गया हूं…” रोहित की नींद टूट गई। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, शरीर पसीने से भीगा हुआ था। अब उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था। वह समझ गया कि शास्त्रों के नियम सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा की शांति के लिए बनाए गए हैं। अगली सुबह वह गांव के पंडित के पास गया, रोते हुए बोला—“मुझे कोई उपाय बताइए… मैंने अपने पिता को कष्ट में डाल दिया।” पंडित ने गंभीर स्वर में कहा—“जब नियमों को तोड़ा जाता है, तो परिणाम भी भोगने पड़ते हैं… लेकिन प्रायश्चित का मार्ग हमेशा खुला रहता है।” इस घटना के बाद रोहित ने हर विधि-विधान का पालन किया, पूजा-पाठ किया और अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। धीरे-धीरे वह भय कम होने लगा… लेकिन उस रात की गलती उसे जीवनभर याद रही। 👉 सीख: मृत्यु के बाद के नियम केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा को सही दिशा देने के लिए बनाए गए हैं। अज्ञान और जल्दबाजी कभी-कभी ऐसी गलती करवा देती है, जिसका असर इस दुनिया से आगे तक जाता है। जय विष्णु भगवान् 🙏🏻

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