
Rama Devi Sahu
1 day ago
🌺 श्री तिरुपति बालाजी की कथा 🌺 दक्षिण भारत के तिरुमला पर्वत पर भगवान विष्णु श्री वेंकटेश्वर बालाजी के रूप में विराजमान हैं। भक्तों की मान्यता है कि जो श्रद्धा से बालाजी के दर्शन करता है, उसकी मनोकामना भगवान अवश्य सुनते हैं। 🙏 🌸 भगवान विष्णु का पृथ्वी पर आगमन एक समय ऋषि-मुनियों के बीच यह चर्चा हुई कि त्रिदेवों में सबसे अधिक धैर्यवान और करुणामय कौन हैं। महर्षि भृगु भगवान विष्णु की परीक्षा लेने वैकुंठ पहुँचे। उन्होंने भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर पैर रख दिया। भगवान विष्णु ने क्रोधित होने के बजाय भृगु ऋषि के पैर पकड़कर पूछा—“ऋषिवर, आपके पैर में चोट तो नहीं लगी?” भगवान का यह विनम्र व्यवहार देखकर भृगु ऋषि समझ गए कि भगवान विष्णु ही सबसे अधिक सहनशील और करुणामय हैं। लेकिन भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर माता लक्ष्मी का निवास माना जाता है। भृगु के इस व्यवहार से माता लक्ष्मी अप्रसन्न हुईं और वे वैकुंठ छोड़कर पृथ्वी पर चली आईं। 🌺 श्रीनिवास का अवतार माता लक्ष्मी की खोज में भगवान विष्णु भी पृथ्वी पर आए। वे श्रीनिवास के रूप में तिरुमला के पर्वतों पर रहने लगे। वहाँ भगवान ने एकांत में तप और निवास किया। इसी दौरान उनका परिचय राजा आकाशराज की पुत्री पद्मावती से हुआ। श्रीनिवास और पद्मावती के बीच विवाह का संबंध निश्चित हुआ। विवाह अत्यंत भव्य था। 💰 कुबेर से लिया विवाह का ऋण पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीनिवास ने अपने विवाह के लिए कुबेर से धन उधार लिया। कहा जाता है कि भगवान ने वचन दिया कि वे समय के साथ यह ऋण चुका देंगे। इसी मान्यता के कारण आज भी भक्त तिरुपति बालाजी के मंदिर में धन-संपत्ति अर्पित करते हैं। भक्तों की श्रद्धा है कि भगवान को दिया गया दान उनके प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। 🌹 माता लक्ष्मी और पद्मावती विवाह के बाद माता लक्ष्मी और पद्मावती दोनों का भगवान से संबंध जुड़ा। पौराणिक कथाओं में इस प्रसंग के अलग-अलग रूप मिलते हैं। इसी कारण तिरुपति की परंपरा में श्रीदेवी और भूदेवी सहित भगवान वेंकटेश्वर की पूजा का विशेष महत्व है। 🛕 तिरुमला में भगवान का निवास समय के साथ भगवान श्रीनिवास ने तिरुमला पर्वत पर अपना स्थायी निवास बनाया और वेंकटेश्वर बालाजी के नाम से प्रसिद्ध हुए। आज करोड़ों श्रद्धालु उन्हें भगवान विष्णु का साक्षात् स्वरूप मानकर उनके दर्शन करने तिरुमला आते हैं। 🙏 मूर्ति को पसीना आने की मान्यता भक्तों में यह भी प्रसिद्ध मान्यता है कि बालाजी की मूर्ति में दिव्य चेतना है। इसलिए कभी-कभी मूर्ति पर नमी या पसीने जैसी बूंदें दिखाई देती हैं। भक्त इसे भगवान के जीवंत और साक्षात् स्वरूप का संकेत मानते हैं। धार्मिक परंपरा में भगवान की सेवा भी जीवित व्यक्ति की तरह की जाती है—उन्हें स्नान कराया जाता है, वस्त्र पहनाए जाते हैं और विश्राम कराया जाता है। हालाँकि मूर्ति पर दिखाई देने वाली नमी के भौतिक कारणों को अलग से समझा जा सकता है; इसलिए इसे धार्मिक आस्था के रूप में देखना उचित है। इसी विश्वास के साथ भक्त कहते हैं— “गोविंदा… गोविंदा… श्री वेंकटेश्वर भगवान की जय! 🙏🌺”
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 1, 2026
*प्यारे साँवरिया* *तस्वीर तेरी दिलकश है , सूरत तेरी प्यारी है* । *जिसने भी तुझे देखा सौ जान से वारी है* । *क्या नज़र करें तुमको, क्या चीज़ हमारी है* । *ये दिल भी तुम्हारा है , ये जान भी तुम्हारी है* । **राधे राधे जय श्री कृष्णा ** शुभ रात्रि वंदन जी 🪷🙏🙏🪷

R k jangid phulera Jaipur
Nov 1, 2026
जय सियाराम जी शुभ रात्रि 🌹🙏
