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ॐ श्री वराहाय विष्णवे नमः 🙏 🗓️ वराह जयंती: 13 सितंबर 2026, रविवार 🗓️ तृतीया तिथि: सुबह 07:08 बजे से 14 सितंबर सुबह 07:06 बजे तक वराह जयंती भगवान विष्णु के वराह अवतार के प्राकट्य का पावन पर्व है। पौराणिक परंपरा के अनुसार हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को रसातल में ले जाने पर भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया और सृष्टि का संतुलन पुनः स्थापित किया। वराह जयंती का त्यौहार भारत के विभिन्न हिस्सों में बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है, मथुरा में भगवान वराह का अति प्राचीन मंदिर है, यहाँ यह उत्सव भव्य स्तर पर मनाया जाता है। तिरुमला में स्थित भु वराह स्वामी मंदिर में भी इस दिन भगवान वराह की पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान वराह या भगवान विष्णु का स्मरण करें। पूजा में दीप, धूप, पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। श्रद्धानुसार अभिषेक करें और “ॐ वराहाय नमः” मंत्र का जाप करें। वराह जयंती हमें सिखाती है कि धर्म का एक महत्वपूर्ण रूप पृथ्वी, प्रकृति और जीवन की रक्षा करना भी है। भगवान वराह सभी के मन में साहस, कर्तव्य और धर्मनिष्ठा का भाव जगाएं।

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