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*नवगुंजरा का दिव्य स्वरूप* ओडिशा की कलात्मक परंपरा में वर्णित नवगुंजरा एक अद्भुत दिव्य स्वरूप है, जिसका उल्लेख विशेष रूप से ओड़िया महाभारत और पट्टचित्र कला में मिलता है. ऐसी आस्था है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की परीक्षा लेने के लिए नवगुंजरा रूप धारण किया था. यह स्वरूप नौ विभिन्न प्राणियों के अंगों से मिलकर बना है, जो सृष्टि की विविधता में निहित एकत्व का प्रतीक माना जाता है. नवगुंजरा का चित्रण ओडिशा की पारंपरिक पट्टचित्र कला और श्री जगन्नाथ मंदिर की सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है, जहाँ यह भारतीय कल्पनाशक्ति, दर्शन और प्रतीकात्मक कला की विलक्षण अभिव्यक्ति बनकर उभरता है. नवगुंजरा केवल एक पौराणिक आकृति नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की असीम सृजनशीलता और दार्शनिक गहराई का जीवंत प्रतीक है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

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