
Rama Devi Sahu
80 days ago
अधिकमास की परमा एकादशी हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी और कल्याणकारी मानी जाती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और अधिक मास में पड़ने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परमा एकादशी का व्रत करने से जीवन में चल रही परेशानियां दूर होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन दान-पुण्य, मंत्र जाप और कथा सुनने का भी विशेष महत्व बताया गया है। वहीं इस साल परमा एकादशी का व्रत 11 जून को रखा जाएगा। साथ ही इस दिन शोभन और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त… #अधिकमास_की_परमा_एकादशी_तिथि: फ्यूचर पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि 10 जून, बुधवार को रात 12 बजकर 58 मिनट से आरंभ होगी और 11 जून, गुरुवार को रात 10 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। #अधिकमास_परमा_एकादशी_शुभ_मुहूर्त: पंचांग के मुताबिक 11 जून को परमा एकादशी पर शुभ-उत्तम मुहूर्त 05:23 ए एम से लेकर सुबह 07:07 ए एम तक है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से 04:42 ए एम तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:53 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक है। साथ ही लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर में 12:21 पी एम से दोपहर 02:05 पी एम तक है। #अधिकमास_परमा_एकादशी_विशेष_योग: इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग बन रहे हैं, जो बेहद शुभ माने जाते हैं. इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है, खासकर व्यापार और करियर से जुड़े कामों में. #परमा_एकादशी_पारण_समय: परमा एकादशी का पारण 12 जून शुक्रवार को किया जाएगा। वहीं पारण का समय 05:23 ए एम से लेकर सुबह 08:10 ए एम तक है। इस बीच में पारण करके व्रत को पूरा कर लें। #विष्णु_भगवान_के_मंत्र: 1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। 3. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। 4. ॐ विष्णवे नम: 5. ॐ हूं विष्णवे नम: #परमा_एकादशी_का_पौराणिक_महत्व: पुराणों में वर्णन मिलता है कि धन के देवता कुबेर ने भी परमा एकादशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें धनाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ था. वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, जिन्होंने अपना राज्य, परिवार और सब कुछ खो दिया था, उन्होंने भी इस व्रत का पालन किया था. इसके प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, परिवार और वैभव पुनः प्राप्त हुआ था. इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि यह एकादशी जीवन में सुख, समृद्धि और पुनःस्थापना का मार्ग खोलने वाली मानी जाती है. #अश्वमेध_यज्ञ_के_समान_पुण्य: धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि परमा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करता है, उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। #अधिकमास_परमा_एकादशी_व्रत_विधि: व्रत से एक दिन पहले (10 जून) रात में भारी भोजन न करें. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें. घर के मंदिर की सफाई कर दीपक जलाएं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पीले पुष्प विष्णु जी को और लाल पुष्प लक्ष्मी जी को अर्पित करें. गंगाजल से स्नान, तिलक और अक्षत अर्पित करें. फल, मिष्ठान और तुलसी दल के साथ भोग लगाएं,आरती करें।

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