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🌹रामचरित:🌹 उत्तरकाण्ड🌹 🌹३४. सब उदार सब पर उपकारी |🌹 🌹 बिप्र चरन सेवक नर नारी ||🌹 🌹 एकनारि ब्रत रत सब झारी |🌹 🌹ते मन बच क्रम पति हितकारी ||🌹 🌹अर्थात् तुलसीदासजी कहते हैं कि रामराज्य की सुख- सम्पत्ति का वर्णन शेषजी और शारदाजी भी नहीं कर सकते ; 🌹सभी नर- नारी उदार और परोपकारी हैं तथा विप्र- चरणों के सेवक हैं |🌹 सभी पुरुषमात्र एकपत्नीव्रती हैं और स्त्रियाँ भी मन , वचन तथा कर्म से पति का हित करने वाली हैं |🌹 🌹 तात्पर्य यह है कि जहाॅं सब नर - नारी उदार ,🌹 🌹परोपकारी , विप्र- चरणों के सेवक और सदाचारी होते हैं वहीं रामराज्य जैसी सुख सम्पदा विद्यमान रहती है | जय जय सीताराम1🌹 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

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