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*अमृत कथा* *🙏परिश्रम का महत्त्व🙏* 🌺🌱🌺🌱🌺🌱🌺 एक गांव में एक धनी मनुष्य रहता था उसका नाम भैरोमल था भैरोमल के पास बहुत खेत थे उसने बहुत से नौकर और मजदूर रख छोड़े थे भैरोमल बहुत सुस्त और आलसी था वह कभी अपने खेतों को देखने नहीं जाता था अपने मजदूर और नौकरों को भेजकर ही वह काम कराता था. मजदूर और नौकर मनमाना काम करते थे वे लोग खेत पर तो थोड़ी देर काम करते थे , बाकी घर बैठे रहते थे. इधर-उधर घूमते या गप्पे उड़ाया करते थे ,खेत न तो ठिकाने से जोते जाते थे न सिंचे जाते थे और न उनमें ठीक से खाद पडती थी खेतों में बीज भी ठिकाने से नहीं पडते थे और उनकी घास(खरपतवार) तो कोई निकालता ही नहीं था इसका नतीजा यह हुआ कि उपज धीरे-धीरे घटने लगी थोड़े दिनों में भैरोमल गरीब होने लगा. उसी गांव में रामप्रसाद नामक एक दूसरा किसान था उसके पास खेत नहीं थे वह भैरोमल के ही कुछ खेत लेकर खेती करता था किंतु; था ! परिश्रमी अपने मजदूरों के साथ वह खेत पर जाता था डटकर परिश्रम करता था उसके खेत भली प्रकार जोते और सींचे जाते थे अच्छी खाद पडती थी, घास निकाली जाती थी और बीज भी समय पर बोए जाते थे उसके घर के लोग भी खेत पर काम करते थे खेत में उपज अच्छी होती थी, लगान देखकर और खर्च करके भी वह बहुत अन्न बचा लेता था थोड़े दिनों में रामप्रसाद धनी हो गया. जब भैरोमल बहुत गरीब हो गया उसके ऊपर महाजनों का ऋण हो गया तो उसे अपने खेत बेचने की आवश्यकता जान पड़ी यह समाचार पाकर रामप्रसाद उसके पास और बोला – ” मैंने सुना है! कि आप अपने खेत बेचना चाहते हैं कृपया करके आप मेरे हाथ अपने खेत बेचे मैं दूसरों से कम मुल्य नहीं दूंगा” भैरोमल ने आश्चर्य से पूछा – ” भाई रामप्रसाद मेरे पास इतने खेत भी मैं ऋणी हो गया किंतु: तुम्हारे पास धन कहां से आ गया है.तुम तो मेरे थोड़े से खेत लेकर खेती करते हो उन खेतों की लगान भी तुम्हें देनी पड़ती है और घर का भी काम चलाना पड़ता है मेरे खेत खरीदने के लिए तुम्हें किसने रुपये दिए? रामप्रसाद ने कहा – ” मुझे रुपए किसी ने नहीं दिए! रुपए तो मैंने खेतों की उपज से ही बचा कर ही इकट्ठे किए हैं आप की खेती और मेरी खेती में एक अंतर है आप नौकरों मजदूरों आदि सब से काम करने के लिए जाओ-जाओ कहते हैं आपकी संपत्ति भी चली गई मैं मजदूरों और नौकरों से पहले काम करने को तैयार होकर उन्हें अपने साथ काम करने के लिए सदा “आओ” कह कर बुलाता हूं इससे मेरे यहां संपत्ति आती है. अब भैरोमल बात समझ गया उसने थोड़े से खेत रामप्रसाद के हाथ बेच कर अपना ऋण चुका दिया और बाकी खेतों में परिश्रमपूर्वक खेती करने लगा थोड़े ही दिनों में उसकी दशा सुधर गई वह फिर सुखी और संपन्न हो गया.... 🌺🙏🌺 जय श्री राधे कृष्णा 🌺🙏🌺 शुभ प्रभात 🌺🌺🥀 आपका दिन शुभ मंगलमय हो 🌺🌺🥀 बाबा महाकाल का आशीर्वाद सदेव बना रहे 🌺🌺🥀 जय श्री महाकाल 🌺🌺🌻🌼🌻🪻🪻

Comments (3)

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Mar 1, 2026

राधे राधे जी 🙏 जय श्रीं कृष्णा. 🥀🥀🥀शुभ प्रभात वंदन मेरी बहन 🙏

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Mar 1, 2026

बहुत ही सुन्दर लेख 👌

raj  raj

raj raj

Mar 1, 2026

radhe radhe medam ji 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 good morning ji 🌹🙏🌹🙏 apka din khushiyon se bhat jaye 😊😊😊😊