
Saumya Sharma
162 days ago
जय माता दी 🙏 नवरात्रि में तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा जी की पूजा व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️
Comments (20)

Rama Devi Sahu
Mar 21, 2026
🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयंबिके गौरी नारायणी नमोस्तुते । या देवी सर्व सर्व भुतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: 🌹 या देवी सर्व भुतेषू मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: 🌹 या देवी सर्व भुतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: जय माता दी 🙏🌹 चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्वरी । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि जय अम्बे माँ 🙏🌹🙏🌹🙏🙏

Rama Devi Sahu
Mar 21, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏

Rama Devi Sahu
Mar 21, 2026
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी और शांतिदायक है, लेकिन दुष्टों के लिए वे उतनी ही संहारक भी हैं। माँ चंद्रघंटा की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था, तब सभी देवता त्रस्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शरण में गए। * देवों का तेज: देवताओं की व्यथा सुनकर त्रिदेवों को अत्यंत क्रोध आया। उस क्रोध से तीनों के मुख से एक दिव्य ऊर्जा उत्पन्न हुई, जो बाद में दसों दिशाओं की शक्तियों के साथ मिलकर एक देवी के रूप में प्रकट हुई। * अस्त्रों का उपहार: भगवान शिव ने अपना त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, इंद्र ने अपना वज्र और घंटा, और सूर्य देव ने अपनी तलवार और तेज देवी को समर्पित किया। * महिषासुर का वध: माँ चंद्रघंटा ने अपने सिंह पर सवार होकर असुरों की सेना पर आक्रमण किया। उनके घंटे की भयानक ध्वनि से असुर मूर्छित होने लगे। अंततः माँ ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। देवी का स्वरूप माँ चंद्रघंटा का रूप स्वर्ण के समान चमकीला और दिव्य है। उनके दस हाथ हैं, जिनमें खड्ग, बाण, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। वे सिंह (शेर) पर सवारी करती हैं, जो वीरता का प्रतीक है। उनके मस्तक पर स्थित अर्धचंद्र शीतलता प्रदान करता है। महत्व और फल माँ चंद्रघंटा की उपासना करने से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ-साथ विनम्रता का भी विकास होता है। उनकी पूजा से मुख, नेत्र और शरीर का तेज बढ़ता है तथा स्वर में मधुरता आती है। पूजा मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ भोग: आज माँ को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। रंग: आज के दिन गहरा लाल रंग पहनना शुभ फलदायी होता है।

Suresh Kumar
Mar 21, 2026
राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्री वंदन मेरी बहन

Saumya Sharma
Mar 21, 2026
पोस्ट प्रशंसा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏 माता रानी कृपा करें, करें सुखद कल्याण, जीवन में खुश रहने का, मैया दें वरदान 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Mar 21, 2026
पोस्ट प्रशंसा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏 ठाकुर जी की कृपा से आपका आने वाला दिन आपके लिए शुभ फलदाई व मंगलमय रहे 🙏☺️🌹

Saumya Sharma
Mar 21, 2026
जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 जय शनिदेव 🙏 राम जी की कृपा, बजरंगबली का साथ और शनिदेव जी की शीतल छाया आपको सदैव प्राप्त हो 🙏 यही शुभकामना है 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Mar 21, 2026
जय माता दी 🙏 शरणागत दीनार्थपरित्रानणपरायण सर्व स्यार्थहरे देवी नारायणी नमोस्तुते 🙏☺️🌹 या देवी सर्वभूतेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः 🙏🌹☺️ नवरात्रि महापर्व के तृतीय दिन पूजा की हार्दिक बधाई और अनेकानेक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️ माता रानी आप सपरिवार पर अपनी कृपा बरसाएं 🙏🌹☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम बड़े भाई 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Mar 21, 2026
जय श्री राधे कृष्ण भैया जी 🙏

R k jangid phulera Jaipur
Mar 21, 2026
जय माता दी🙏 माता रानी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे🙏 गणगौर पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं🙏
