
Rama Devi Sahu
41 days ago
क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर माता लक्ष्मी ने भगवान जगन्नाथ के रथ को क्यों तोड़ दिया था? सुनने में यह घटना भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन इसके पीछे छिपी है प्रेम, विरह और मान-मनुहार की एक अद्भुत दिव्य कथा। हर साल ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकलती है, जिसे देखने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर यानी अपनी मौसी के घर की यात्रा पर निकलते हैं। लेकिन इस यात्रा में माता लक्ष्मी उनके साथ नहीं जातीं और श्रीमंदिर में ही विराजमान रहती हैं। कई दिनों तक भगवान के वापस न लौटने पर माता लक्ष्मी उन्हें लेने के लिए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। लेकिन जब भगवान जगन्नाथ तुरंत लौटने के बजाय बाद में आने का आश्वासन देते हैं, तो माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी नाराजगी में देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के रथ **'नंदीघोष'** का एक हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती हैं। इसी घटना को **'रथ तोड़ने'** की परंपरा कहा जाता है। इसके बाद माता लक्ष्मी मुख्य मार्ग से नहीं, बल्कि एक गुप्त रास्ते से श्रीमंदिर लौट जाती हैं। इस दिव्य प्रसंग को **'हेरा पंचमी'** के रूप में मनाया जाता है, जो आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आयोजित होता है। इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है और इस अनूठी परंपरा का विधि-विधान से निर्वहन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह घटना क्रोध की नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विरह, मान-मनुहार और पुनर्मिलन की प्रतीक है। अंततः भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाते हैं और उनके सम्मान को स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि हेरा पंचमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रेम, सम्मान और रिश्तों की गरिमा का जीवंत प्रतीक भी मानी जाती है।

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