
shree Rana
2 days ago
भगवान श्री राम द्वारा भगवती दुर्गा की स्तुति देवी पुराण / महाभागवत के अनुसार लंकेश रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्री राम ने भगवती दुर्गा की स्तुति इस प्रकार की थी - नमस्ते त्रिजगद्वन्द्ये संग्रामे जयदायिनी। प्रसीद विजयं देहि कात्यायनी नमोऽस्तु ते।। त्रिलोकवंदनीया ! युद्ध में विजय देनेवाली कात्यायनि ! आपको बार-बार नमस्कार है। मुझ पर प्रसन्न हों और मुझे विजय प्रदान करें। सर्वशक्तिमये दुष्टरिपुनिग्रहकारिणी। दुष्टजृम्भिणी संग्रामे जयं देहि नमोऽस्तु ते।। सर्वशक्तिमयी , दुष्ट शत्रुओं का निग्रह करनेवाली, दुष्टों का संहार करनेवाली भगवती ! संग्राम में मुझे विजय प्रदान करें। आपको नमस्कार है। त्वमेका परमा शक्ति: सर्वभूतेष्वस्थिता। दुष्टं संहर संग्रामे जयं देहि नमोऽस्तु ते।। आप ही सभी प्राणियों में निवास करनेवाली एक परा शक्ति हैं। आप संग्राम में दुष्ट राक्षसों का संहार करें और मुझे विजय प्रदान करें। आपको नमन है। त्वत्पादपंकजाद्दैन्यं नमस्ते शरणप्रिये। विनाशाय रणे शत्रून् जयं देहि नमोऽस्तु ते।। आप अपने चरण-कमल के अनुग्रह से दीनता का नाश कीजिए , युद्ध क्षेत्र में शत्रुओं का विनाश कीजिए और मुझे विजय प्रदान कीजिए। आपको नमस्कार है। ये त्वां स्मरन्ति दुर्गेषु देवीं दुर्गविनाशिनीम्। नावसीदन्ति दुर्गेषु जयं देहि नमोऽस्तु ते।। जो लोग विपत्तियों में दुर्गति का नाश करनेवाली आप देवी दुर्गा का स्मरण करते हैं , वे विषम परिस्थितियों में दुःखी नहीं होते। आप मुझे विजय प्रदान कीजिए। आपको नमस्कार है। महिषासृक् प्रिये संख्ये महिषासुरमर्दिनि। शरण्ये गिरिकन्ये मे जयं देहि नमोऽस्तु ते।। युद्ध में महिषासुर का मर्दन करनेवाली तथा शरण ग्रहण करनेयोग्य हिमालयसुता ! आप मुझे विजय प्रदान कीजिए। आपको नमस्कार है। प्रसन्नवदने चण्डि चण्डासुरविमर्दिनि। संग्रामे विजयं देहि शत्रूञ्जहि नमोऽस्तु ते।। चण्डासुर का नाश करनेवाली प्रसन्नमुखी चण्डिके युद्ध में शत्रुओं का संहार कीजिए और मुझे विजय प्रदान कीजिए। आपको नमस्कार है। रक्ताक्षि रक्तदशने रक्तचर्चितगात्रके। रक्तबीजनिहन्त्रि त्वं जयं देहि नमोऽस्तु ते।। रक्तवर्ण के नेत्रवाली, रक्तरंजित दन्तपंक्तिवाली तथा रक्त से लिप्त शरीरवाली भगवती ! आप रक्तबीज का संहार करनेवाली हैं। आप मुझे विजय प्रदान करें। आपको नमस्कार है। निशुम्भशुम्भसंहन्त्रि विश्वकर्त्रि सुरेश्वरि। जहि शत्रून् रणे नित्यं जयं देहि नमोऽस्तु ते।। शुम्भ और निशुम्भ का संहार करनेवाली, जगत् की सृष्टि करनेवाली सुरेश्वरी! आप नित्य युद्ध में शत्रुओं का संहार कीजिए और मुझे विजय प्रदान कीजिए। आपको नमस्कार है। कात्यायनि जगन्मात: प्रपन्नार्तिहरे शिवे। संग्रामे विजयं देहि भयेभ्य: पाहि सर्वदा।। शरणागतों का दुःख दूर करनेवाली, कल्याण प्रदान करनेवाली जगन्माता कात्यायनी ! युद्ध में मुझे विजय प्रदान कीजिए और भय से सदा रक्षा कीजिए। यह हम सभी जानते हैं कि भगवती दुर्गा की स्तुति करने के पश्चात् प्रभु श्री राम ने लंकेश रावण का संहार किया था।

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