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Rama Devi Sahu

315 days ago

नरक जाने से कैसे बचे ? ( नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) की कथा ) इस रात दीये जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दु्र्दांत असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष्य में दीयों की बारात सजाई जाती है। नरक चतुर्दशी की कथा <<<<< इस दिन के संदर्भ में एक कथा यह है कि रंति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। यह सुनकर यमदूत ने कहा कि हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक बार एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था,यह उसी पापकर्म का फल है। इसके बाद राजा ने यमदूत से एक वर्ष समय मांगा। तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है। विशेष ,,,, शास्त्रों में तीन प्राणियों को ब्राह्मण की संज्ञा दी गयी है -- १. ब्राह्मण वर्ण का मनुष्य यानि ( उच्च बौद्धिक स्तर + उच्च शैक्षणिक स्तर + धर्म ( सत्य, अहिंसा , त्याग , एवं दया ) को धारण किये हुए व्यक्ति ), ब्रह्म में विचरण करने वाला यानि आध्यात्म भाव में अध्ययन एवं अध्यापन करने वाला ही ब्राह्मण होता है ! 'ब्राह्मण' का अर्थ है- ब्रह्म को जानने वाला (ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मणः)। पुराणों में ब्रह्महत्या को अन्य पापों से बड़ा माना गया है।) २, गाय को शास्त्रों में ब्राह्मण कहा है (३) पीपल को भी शास्त्रों में ब्राह्मण कहा है ! अतः नरक से बचने के लिए गाय को शुद्ध आहार एवं पीपल को जल चढ़ाना चाहिए ! हमारे विचार से गाय से अच्छा ब्राह्मण इस कलयुग में ढूंढना मुश्किल कार्य है अतः गूढ़ार्थ === पीपल को जल चढाने से ऑक्सीजन यानि प्राण वायु का निर्माण होता है और यह पुण्य बहुत बढ़ा माना गया है ! गाय को स्वच्छ आहार खिलाने से गाय के अंदर निहित ३३ कोटि देवता प्रसन्न होते है जो पुण्य फलदायी है l 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Comments (3)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Oct 19, 2025

जी रमा जी आप को भी इस त्योहार की हार्दिक शुभकामनाएं जी 🌹💐🙏🤝🤗💞💞💞

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 19, 2025

Ji Namaste 🙏 Subha Sandhya 🌸🌿🌸🪔 Choti Diwali 🪔🌸🌿🌸

Rohit  Patel

Rohit Patel

Oct 19, 2025

🎼🎼🎼🎼