B L Yadav.(CMO) Nov 29, 2021

*"किसी अच्छे कार्य को आरम्भ करना और उसको जीवन में लगातार बनाए रखना, दोनों कठिन कार्य हैं, परंतु असम्भव नहीं।"* विद्वानों ने कहा है, कि *"जो व्यक्ति किसी शुभ कार्य को आरंभ करते हैं, और उसको लगातार अपने जीवन में करते रहते हैं। कितनी ही बाधाएं आवें, फिर भी वे उस काम को बीच में छोड़ते नहीं। सब कष्टों को सहते हुए संघर्ष करते हुए भी, वे उस उत्तम कार्य को जीवन में जारी रखते हैं, ऐसे लोग उत्तम स्तर के होते हैं।"* *"कुछ लोग अच्छे कार्य को आरंभ तो कर देते हैं। परंतु कुछ समय तक करने के बाद जब बाधाएं आती हैं, कष्ट आते हैं, तो वे उनसे घबराकर उन कार्यों को बीच में ही अधूरा छोड़ देते हैं, पूरा नहीं कर पाते। ऐसे लोग मध्यम स्तर के व्यक्ति कहलाते हैं।"* *"परंतु जो लोग बाधाओं के आने के भय से किसी अच्छे कार्य को आरंभ ही नहीं करते। उन्हें हर काम बड़ा कठिन लगता है। क्या होगा, कैसे होगा, कैसे करेंगे, यदि यह बाधा आ गई तो क्या होगा, वह बाधा आ गई तो उसे कैसे दूर करेंगे, इत्यादि प्रश्नों में ही घिरे रहते हैं, और वे उत्तम कार्यों को आरंभ ही नहीं कर पाते, वे निम्न स्तर के लोग कहलाते हैं।"* अधिकतर लोग इसी तीसरे स्तर वाले होते हैं। इसलिए यह कहावत बन गई, कि *"अच्छे कार्यों को करना कठिन होता है।"* परंतु किसी भी अच्छे कार्य को आरंभ करने के लिए यदि कोई प्रेरक व्यक्ति मिल जाए, जो थोड़ा उत्साह बढ़ा दे, तो थोड़ा भी हिम्मत वाला सामान्य मनुष्य भी उस कार्य को आरंभ कर सकता है। *"यदि वह अपना उत्साह बनाए रखे, और लगातार पुरुषार्थ करता रहे, तो वह कार्य उसके अभ्यास में आ जाता है अर्थात उसे उस काम को करने की आदत हो जाती है। जब किसी काम को करने की आदत हो जाती है, फिर वह दृढ़ता से जीवन में चलता रहता है, फिर वह नहीं छूटता।"* इसलिए सभी लोगों को यह सोचना चाहिए, कि *"जैसे दूसरे लोग महापुरुष आदि, उत्तम कार्यों को करते हैं, वैसे ही हम भी करेंगे। महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर हम भी उत्तम कार्यों का आचरण करेंगे।"* और यदि अपने आसपास कोई ऐसा जीवित व्यक्ति मिल जाए, जो उत्तम कार्यों का आचरण स्वयं करता हो, तो उसके जीवन में उन उत्तम कार्यों को प्रत्यक्ष देखने पर, और अधिक प्रेरणा मिलेगी। उस प्रेरणा से आप भी उत्तम कार्यों का प्रारंभ कर सकते हैं। *"जैसे यज्ञ करना, ईश्वर की भक्ति उपासना करना, व्यायाम करना, स्वाध्याय करना, दूसरों की सहायता करना, रोगी विकलांग अनाथ मनुष्यों को सहयोग देना इत्यादि; इन सब उत्तम कार्यों को आप भी आरंभ कर सकते हैं।" "और यदि आप हिम्मत बनाए रखेंगे, तो धीरे-धीरे आप उसे अपनी आदत में भी ला सकते हैं। एक बार इन अच्छे कार्यों की आदत पड़ गई, तो फिर कोई चिंता नहीं रहेगी। आप पूरा जीवन इन उत्तम कार्यों को करते हुए वर्तमान जीवन में भी सुखी रहेंगे, और आपका भविष्य अर्थात अगला जन्म भी बहुत उत्तम अर्थात सुखदायक होगा।"* ---- *स्वामी विवेकानन्द

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B L Yadav.(CMO) Nov 28, 2021

गुरुदेव ने उद्बोधन में कहा है कि :--- 🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹 👉मधुमक्खियां कितनी एकाग्रता से विभिन्न फल फूलों को रस संचित करती है। विंभिन्न फलों की डालो पर अपना संगीत छेड़ती हुई वह अपने कार्य को दंतचित्त होकर संपन्न करती है। मधुमक्खी मधु प्राप्त करने कभी कटीली झाड़ियों और विषेले वृक्षो पर भी उसे जाना पड़ता है। लेकिन मधुमक्खी के शहद में मिठास ही रहती है। उसी प्रकार ज्ञानी पुरुष भी इस संसार में बुराइयों को त्याग कर केवल गुणो का ही संचय करते है। कभी अवगुणी से भी संपर्क हो जाता है किंतु महापुरुषों के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गुण रूपी मधु का संचय करना कठिन तो है। किंतु एकाग्रता के द्वारा उसे प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य को चाहिए की क्रोध को प्रेम से बुराई को भलाई से लोभ को उदारता से और मिथ्या को सत्य से जीते बड़ों का मान करे व मीठे वचन बोलना सर्वप्रिय बनने के साधन है। 🙏 गुरु देव के अनमोल वचनों से साभार🙏 JAI SHRI RADHE RADHE 🙏🙏🙏

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B L Yadav.(CMO) Nov 28, 2021

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B L Yadav.(CMO) Nov 27, 2021

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B L Yadav.(CMO) Nov 26, 2021

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B L Yadav.(CMO) Nov 23, 2021

*संसार में सत्य बोलने से बढ़कर कोई तपस्या नहीं है। दया से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। अपनी आत्मा के आनंद से बढ़कर कोई आनंद नहीं है।* धन से बड़ा कोई धन नहीं है। *यह ध्यान रखें जीवन में असत्य का अनावरण एक न एक दिन होता ही है।* जीवन में स्थिरता केवल सच्चाई में है। *उसको समझने में देर भले ही लग सकती है, अंततः विजय सत्य की ही होती है।* सत्य की साधना कठिन इसलिए प्रतीत होती है कि उसमें असत्य की चमक दमक नहीं है। सत्य संयम व्रत है। सत्य सारे साधनों की आधारशिला है। *कोई भी साधना कितनी भी ऊंची क्यों ना हो बिना सत्य साधना के सफल नहीं हो सकती। जो व्यक्ति जीवन में सत्य का अवलंबन ले ले लेता है उसे अन्य साधनों की आवश्यकता ही नहीं रहती है। ईमानदारी उदारता भय हिनता आदि गुण सत्य के सहचर हैं।*🙏 गुरु देव के अनमोल वचनों से साभार🙏

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