Vinay Kumar Oct 31, 2021

लक्ष्मी जी के 108 नाम 1. प्रकृती 2. विकृती 3. विद्या 4. सर्वभूतहितप्रदा 5. श्रद्धा 6. विभूति 7. सुरभि 8. परमात्मिका 9. वाचि 10. पद्मलया 11. पद्मा 12. शुचि 13. स्वाहा 14. स्वधा 15. सुधा 16. धन्या 17. हिरण्मयी 18. लक्ष्मी 19. नित्यपुष्टा 20. विभा 21. आदित्य 22. दित्य 23. दीपायै 24. वसुधा 25. वसुधारिणी 26. कमलसम्भवा 27. कान्ता 28. कामाक्षी 29. क्ष्रीरोधसंभवा, क्रोधसंभवा 30. अनुग्रहप्रदा 31. बुध्दि 32. अनघा 33. हरिवल्लभि 34. अशोका 35. अमृता 36. दीप्ता 37. लोकशोकविनाशि 38. धर्मनिलया 39. करुणा 40. लोकमात्रि 41. पद्मप्रिया 42. पद्महस्ता 43. पद्माक्ष्या 44. पद्मसुन्दरी 45. पद्मोद्भवा 46. पद्ममुखी 47. पद्मनाभाप्रिया 48. रमा 49. पद्ममालाधरा 50. देवी 51. पद्मिनी 52. पद्मगन्धिनी 53. पुण्यगन्धा 54. सुप्रसन्ना 55. प्रसादाभिमुखी 56. प्रभा 57. चन्द्रवदना 58. चन्द्रा 59. चन्द्रसहोदरी 60. चतुर्भुजा 61. चन्द्ररूपा 62. इन्दिरा 63. इन्दुशीतला 64. आह्लादजननी 65. पुष्टि 66. शिवा 67. शिवकरी 68. सत्या 69. विमला 70. विश्वजननी 71. तुष्टि 72. दारिद्र्यनाशिनी 73. प्रीतिपुष्करिणी 74. शान्ता 75. शुक्लमाल्यांबरा 76. श्री 77. भस्करि 78. बिल्वनिलया 79. वरारोहा 80. यशस्विनी 81. वसुन्धरा 82. उदारांगा 83. हरिणी 84. हेममालिनी 85. धनधान्यकी 86. सिध्दि 87. स्त्रैणसौम्या 88. शुभप्रदा 89. नृपवेश्मगतानन्दा 90. वरलक्ष्मी 91. वसुप्रदा 92. शुभा 93. हिरण्यप्राकारा 94. समुद्रतनया 95. जया 96. मंगला देवी 97. विष्णुवक्षस्स्थलस्थिता 98. विष्णुपत्नी 99. प्रसन्नाक्षी 100. नारायणसमाश्रिता 101. दारिद्र्यध्वंसिनी 102. देवी 103. सर्वोपद्रव वारिणी 104. नवदुर्गा 105. महाकाली 106. ब्रह्माविष्णुशिवात्मिका 107. त्रिकालज्ञानसम्पन्ना 108. भुवनेश्वरी ऊं महालक्ष्मी नमो नमः

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Vinay Kumar Oct 24, 2021

राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।   नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च। नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।   नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ  वै नम:। नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।   नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।   नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।   अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते। नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।   तपसा दग्धदेहाय नित्यं  योगरताय च। नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।   ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे। तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।   देवासुरमनुष्याश्च  सिद्घविद्याधरोरगा:। त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।   प्रसाद कुरु  मे  देव  वाराहोऽहमुपागत। एवं स्तुतस्तद  सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

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Vinay Kumar Sep 12, 2021

कल रात मैंने एक "सपना" देखा.! मेरी Death हो गई.... जीवन में कुछ अच्छे कर्म किये होंगे इसलिये यमराज मुझे स्वर्ग में ले गये... देवराज इंद्र ने मुस्कुराकर मेरा स्वागत किया... मेरे हाथ में Bag देखकर पूछने लगे ''इसमें क्या है..?" मैंने कहा... '' इसमें मेरे जीवन भर की कमाई है, पांच करोड़ रूपये हैं ।" इन्द्र ने 'BRP-16011966' नम्बर के Locker की ओर इशारा करते हुए कहा- ''आपकी अमानत इसमें रख दीजिये..!'' मैंने Bag रख दी... मुझे एक Room भी दिया... मैं Fresh होकर Market में निकला... देवलोक के Shopping मॉल मे अदभूत वस्तुएं देखकर मेरा मन ललचा गया..! मैंने कुछ चीजें पसन्द करके Basket में डाली, और काउंटर पर जाकर उन्हें दो हजार की करारे नोटें देने लगा... Manager ने नोटों को देखकर कहा, ''यह करेंसी यहाँ नहीं चलती..!'' यह सुनकर मैं हैरान रह गया..! मैंने इंद्र के पास Complaint की इंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि, ''आप व्यापारी होकर इतना भी नहीं जानते..? कि आपकी करेंसी बाजु के देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांगलादेश में भी नही चलती... और आप मृत्यूलोक की करेंसी स्वर्गलोक में चलाने की मूर्खता कर रहे हो..?'' यह सब सुनकर मुझे मानो साँप सूंघ गया..! मैं जोर जोर से दहाड़े मारकर रोने लगा. और परमात्मा से दरखास्त करने लगा, ''हे ईश्वर.ये... क्या हो गया.?'' ''मैंने कितनी मेहनत से ये पैसा कमाया..!'' ''दिन नही देखा, रात नही देखा," '' पैसा कमाया...!'' ''माँ बाप की सेवा नही की, पैसा कमाया, बच्चों की परवरीश नही की, पैसा कमाया.... पत्नी की सेहत की ओर ध्यान नही दिया, पैसा कमाया...!'' ''रिश्तेदार, भाईबन्द, परिवार और यार दोस्तों से भी किसी तरह की हमदर्दी न रखते हुए पैसा कमाया.!!" ''जीवन भर हाय पैसा हाय पैसा किया...! ना चैन से सोया, ना चैन से खाया... बस, जिंदगी भर पैसा कमाया.!'' ''और यह सब व्यर्थ गया..?'' ''है ईश्वर, अब क्या होगा..!'' इंद्र ने कहा,- ''रोने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है.!! " "जिन जिन लोगो ने यहाँ जितना भी पैसा लाया, सब रद्दी हो गया।" "जमशेद जी टाटा के 55 हजार करोड़ रूपये, बिरला जी के 47 हजार करोड़ रूपये, धीरू भाई अम्बानी के 29 हजार करोड़ अमेरिकन डॉलर...! सबका पैसा यहां पड़ा है...!" मैंने इंद्र से पूछा- "फिर यहां पर कौनसी करेंसी चलती है..?" इंद्र ने कहा- *"धरती पर अगर* *कुछ अच्छे कर्म* *किये है...!* *जैसे किसी दुखियारे को* *मदद की,* *किसी रोते हुए को* *हसाया,* *किसी अनाथ बच्चे को* *पढ़ा लिखा कर* *काबिल बनाया...!* *किसी को* *व्यसनमुक्त किया...!* *किसी अपंग स्कुल, वृद्धाश्रम या* *मंदिरों में दान धर्म किया...!"* *ये सब भी बिना स्वार्थ /तारिफ की इच्छा के* "ऐसे पूण्य कर्म करने वालों को यहाँ पर एक Credit Card मिलता है...! और उसे प्रयोग कर आप यहाँ स्वर्गीय सुख का उपभोग ले सकते है..!'' मैंने कहा, "ईश्वर.... मुझे यह पता नहीं था. इसलिए मैंने अपना जीवन व्यर्थ गँवा दिया.!!" "हे ईश्वर, मुझे थोडा आयुष्य दीजिये..!'' और मैं गिड़गिड़ाने लगा.! इंद्र को मुझ पर दया आ गई.!! इंद्र ने तथास्तु कहा और मेरी नींद खुल गयी..! मैं जाग गया..! अब मैं वो दौलत कमाऊँगा जो वहाँ चलेगी..!! 🙏

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Vinay Kumar Sep 5, 2021

🍯गुड़ के शौकीन गोपाल 🍯 किसी गांव में छज्जूमल नाम का एक गुड़ बेचने वाला अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहता था। उसकी पत्नी हर रोज गोपाल जी को भोग लगाती आरती करती उनका पूरा ध्यान रखती थी। उधर छज्जूमल दूर गांव में जाकर गुड़ बेचता था। इसी तरह उनकी जिंदगी अच्छे से चल रही थी। उसके बेटे बहुत नेक थे। परंतु दुर्भाग्यवश छज्जूमल की पत्नी अचानक चल बसी। छज्जूमल बहुत उदास रहने लगा। फिर भगवान् की जो इच्छा मान कर फिर वह अपने काम वापस जाने लगा। उसके बेटे उसको समझाते बाबा अब हम अच्छा कमा लेते हैं हैं आप अब घर बैठे परन्तु छज्जूमल ना माना। उसकी पत्नी रोज गोपाल जी को भोग लगाती थी। उसको तो भोग लगाना आता नहीं था। परंतु अब थोड़ा सा गुड़ ठाकुर जी के आगे रख देता ठाकुर जी तो मीठे के शौकीन। उनको तो गुड़ खाने का चस्का लग गया। अब रोज काम जाने से पहले गोपाल जी को थोड़ा सा गुड़ भोग लगा देता था। एक दिन दोनों बेटे बोले बाबा घर की मरम्मत करवानी हैं तो थोड़ा सा सामान इधर-उधर करना पड़ेगा। बाबा बोला ठीक, तो उन्होंने गोपाल जी को भी अलमारी में भूलवश रख दिया। घर का काम शुरू हो गया पर गोपाल जी को अब गुड़ का भोग ना लगता। *छज्जूमल अब रोज की तरह गांव में गुड़ बेचने गया रास्ते में थोड़ा सा विश्राम करने के लिए एक वृक्ष के नीचे बैठ गया। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी तभी छज्जूमल कि आंख लग गई। तभी उसे लगा कि कोई उसे उठा रहा है और कह रहा है बाबा आज गुड न दोगे। छज्जूमल ने एक दो बार अनसुना कर दिया उसे लगा कि कोई सपना है पर जब उसे कोई लगातार हिलाता जा रहा था और बोल रहा था... तो अचानक वह उठा और देखता है कि 6- 7 साल का बालक उसे कह रहा है कि बाबा आज गुड़ ना दोगे। छज्जूमल मन मे सोचने लगा कि मैंने तो इस बालक को कभी गुड़ न दिया फिर उसने सोचा कि गांव में ही किसी का बच्चा होगा। छज्जूमल ने कहा हां बेटा ले लो। तो उसे थोड़ा सा गुड़ दे दिया। गुड़ लेकर वह बालक गुड़ को मुंह में डालकर आहा आहा मीठा-मीठा कह कर वहां से भाग गया। अब तो रोज ही वह बालक छज्जूमल को मिलता उससे गुड़ लेता और नाचता गाता! मीठा-मीठा कह कर भाग जाता। छज्जूमल भी बच्चा समझकर उसको रोज गुड़ दे देता। अब घर का काम पूरा हो गया तो उस दिन घर में हवन पूजन रखा गया। छज्जूमल अब गुड़ बेचने ना गया। परंतु वह बालक तो अपने समय पर उस जगह पहुंच गया। अब छज्जूमल वहां ना आया। बालक ने तो घर जाकर मैया की जान खा ली, और ता ता थैया मचाने लगे, बोले मुझे तो गुड़ ही चाहिए ! मैया ने बहुत समझाया बर्फी मिठाई सब लाकर दिए लेकिन वह तो कहते मैं तो गुड़ ही खाऊंगा। मैया से बालक का रोना सहन न हुआ। और छज्जूमल के घर का पता पूछते पूछते उसके घर पहुंच गई। जाकर कहती बाबा मेरे बालक हो तो आपने गुड़ की आदत डाल दी आज आप आए नहीं ना आए तो गुड़ खाए बिना वह मान नहीं रहा। जो छ्ज्जूमल को उस बालक पर बड़ा प्यार आया उसने उसको अपनी गोद में बिठाया और गोदी में बिठा कर गुड़ खिलाने लगा। पता नहीं क्यों उस बालको गुड़ खिलाते खिलाते छज्जूमल की आंखों में अश्रु धारा बह निकली। हृदय में अजीब सी हलचल होने लगी। गुड़ खाकर बालक मीठा मीठा कह कर अपने घर चला गया। हवन पूजन के बाद में फिर गोपाल जी की मूर्ति को रखा गया। अगले दिन छज्जूमल नियम से गोपाल जी को गुड़ का भोग लगाकर काम पर चला गया। रास्ते में उसी जगह पर रुका! अब तो उसे भी उस बालक को गुड़ खिलाने की जल्दी थी । परंतु वह बालक आया ही नहीं.. ऐसे ही तीन-चार दिन बीते जो उसका मन बहुत बेचैन हुआ कि कहीं बालक बीमार तो नहीं। उसने गांव जाकर सबको बालक के बारे में पूछा, तो सब ने कहा ऐसा तो यहां कोई भी बालक नहीं रहता। वह हैरान परेशान होकर घर पहुंचा। घर पहुंच कर जब वह मंदिर में बैठा तो गोपाल जी की तरफ देखा वह मंद- मंद मुस्कुरा रहे थे। जैसे वह कह रहे हो बाबा जी मैं वही बालक हूं.. छज्जू मल का माथा ठनका कि वह सोचने लगे कि यह तो साक्षात गोपाल जी मुझसे गुड़ खाने आते थे। वह कहने लगे हे गोपालजी! धन्य हो आप। गोपाल जी की ओर देख के उसकी आंखों में अश्रु धारा बहने लगी। 🍂 राधे राधे तो बोलना पड़ेगा 🍂 🌹🙏🌹जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹

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