🌹VANITA KALE Sep 14, 2021

* भगवान गणेश एकदंत की कथा * *भगवान गणेश देवी पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। एक बार की बात है जब भगवान शिव और देवी पार्वती अपने शयन कक्ष सोने का कमरा में विश्राम कर रहे थे। उस समय देवी पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि वह उनके कक्ष कमरे के बाहर पहरा दें और किसी को भी अंदर न आने दें। मां की आज्ञा गणेश जी के लिए आदेश थी। उन्होंने वैसा ही किया और कक्ष के बाहर पहरा देने लगे।* *उसी समय अचानक परशुराम वहां पहुंच गए। परशुराम भगवान शिव से मिलने के लिए बहुत उत्साहित थे। दरअसल उस समय पृथ्वी पर राजा कार्त्तवीर्य का अत्याचार बहुत बढ़ गया था और परशुराम ने इसी कारण उसे मार दिया था। यह खबर भगवान शिव को देने के लिए ही वह कैलाश भगवान शिव का निवास स्थान पहुंचे थे।* *भगवान शिव के कक्ष की ओर परशुराम को तेजी से बढ़ता देख गणेश जी उनके रास्ते में आ गए और उन्हें रुकने को कहा लेकिन परशुराम भगवान शिव से मिलने के लिए बहुत उत्सुक थे इसलिए उन्होंने कहा कि मुझे भगवान शिव से मिलना ही है।* *परशुराम की इस बात को सुनकर गणेश जी बोले ‘मैं आपको अंदर जाने नहीं दे सकता। मां ने किसी को भी अंदर न आने का आदेश दिया है।’* *गणेश जी की यह बात सुनकर परशुराम गुस्से से लाल हो गए। उन्होंने कहा ‘तुम मुझे भगवान शिव से मिलने से नहीं रोक सकते। तुम नहीं जानते मैं कौन हूं।’* *इस पर गणेश जी ने कहा ‘आप कोई भी हों उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मेरे लिए मां का आदेश सबसे जरूरी है। मैं आपको किसी भी सूरत में अंदर नहीं जाने दे सकता।’* *गणेश जी की इन बातों से परशुराम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह बोले ‘अगर तुम मुझे अंदर नहीं जाने दोगे तो मैं तुम्हे हटाकर जबरन अंदर जाऊंगा।’ इतना कहकर परशुराम आगे बढ़ते हैं लेकिन गणेश जी पर

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🌹VANITA KALE Sep 10, 2021

☜☆☞🕉️आप सभी बहन भाई काे 🕉️.. गणेश चतुर्थी की ढेर सारी शुभकामनाएं...!!👏🌰🌰🌰🌰🌰🌰🌰🌰 *गणेश जी को कभी भी विदा नहीं करना चाहिए क्योंकि विघ्न हरता ही अगर विदा हो गए तुम्हारे विघ्न कौन हरेगा।।* क्या कभी सोचा है गणेश प्रतिमा का विसर्जन क्यों? अधिकतर लोग एक दूसरे की देखा देखी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। और 3 या 5 या 7 या 11 दिन की पूजा के उपरांत उनका विसर्जन भी करेंगे। आप सब से निवेदन है कि आप गणपति की स्थापना करें पर विसर्जन नही विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता हैं। क्योंकि गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गये थे। वहाँ लाल बाग के राजा कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश जी को अपने यहाँ बुलाया और कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था जितने दिन गणेश जी वहां रहे उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि व सिद्धि वहीँ रही इनके रहने से लालबाग धन धान्य से परिपूर्ण हो गया। तो कार्तिकेय जी ने उतने दिन का गणेश जी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया यही पूजन गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। अब रही बात देश की अन्य स्थानों की तो गणेश जी हमारे घर के मालिक हैं। और घर के मालिक को कभी विदा नही करते वहीँ अगर हम गणपति जी का विसर्जन करते हैं तो उनके साथ लक्ष्मी जी व रिद्धि सिद्धि भी चली जायेगी तो जीवन मे बचा ही क्या। हम बड़े शौक से कहते हैं गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ इसका मतलब हमने एक वर्ष के लिए गणेश जी लक्ष्मी जी आदि को जबरदस्ती पानी मे बहा दिया। तो आप खुद सोचो कि आप किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करोगे, किस प्रकार दीपावली पूजन करोगे और क्या किसी भी शुभ कार्य को करने का अधिकार रखते हो जब आपने उन्हें एक वर्ष के लिए भेज दिया। इसलिए गणेश जी की स्थापना करें पर विसर्जन कभी न कर

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