Anupam Mohanta Oct 7, 2022

यह #स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, दूसरों के द्वारा किए गए पीड़ा कारक कार्यों से बचाव, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है। विधि: सरसों के तेल का दीपक जलाकर 108 पाठ नित्य 41 दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है। विनियोग:- ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषि:, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे सकल- राज- कुल- संमोहनार्थे, मम समस्त- रोग प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त- पाप-क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये। ध्यान:- मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।। #वडवानल_स्तोत्र :- ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम सकल- दिङ्मण्डल- यशोवितान- धवलीकृत- जगत-त्रितय वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र उदधि-बंधन दशशिर: कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार- ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व- पाप- ग्रह- वारण- सर्व- ज्वरोच्चाटन डाकिनी- शाकिनी- विध्वंसन ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दु:ख निवारणाय ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर, माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्र: आं हां हां हां हां ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा। ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु शिर:-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय नागपाशानन्त- वासुकि- तक्षक- कर्कोटकालियान् यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा। ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा। उपरोक्त हनुमद वडवानल स्तोत्र का निरंतर एक से ग्यारह पाठ करने से सभी समस्याओ का हल निश्चित मिलता है। आध्यात्मिक गुरु व तांत्रिक ज्योतिषी ;- अनुपम मोहन्ता www.swamijee.in/appointment #AnupamMohanta # hanuman

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Anupam Mohanta Oct 6, 2022

कहीं आपकी किस्मत में दो या अनेक शादियां तो नहीं, जानिए बचने के उपाय... हिंदू धर्म में विवाह को सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। विवाह के बाद पति-पत्नी दोनों का जीवन बदलता है साथ ही इनके परिवारों का भी। अधिकांश शादियां तो सफल हो जाती हैं लेकिन कुछ शादियां किसी कारण से असफल होती है। ऐसे अधिकांश लोग फिर दूसरी शादी करते हैं। ज्योतिष के अनुसार मालुम किया जा सकता है यदि किसी व्यक्ति के जीवन में दो शादी के योग होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में एक योग बताया गया है पुनर्विवाह योग यानि फिर से विवाह। कई व्यक्ति ऐसे होते है जिनका पहला विवाह सफल नहीं हो पाता और उन्हें पुन: विवाह करना पड़ता है। कुछ लोग दो से अधिक शादियां भी करते हैं। जन्म कुंडली का भाव या स्थान जीवन साथी से संबंधित होता है। स्त्री हो या पुरुष दोनों का विवाह संबंधी विचार इसी स्थान से होता है। जिस प्रकार प्रथम विवाह का स्थान कुण्डली का सातवां घर होता है उसी प्रकार दूसरी शादी का घर नवम भाव होता है। इसलिए जिनकी कुण्डली में सातवां भाव अशुभ ग्रहों के प्रभाव में होता है अथवा शुभ ग्रहों की अच्छी स्थिति नहीं होती, उनकी पहली शादी सुखद नहीं रहती है और पति-पत्नी में अलगाव की संभावना बढ़ जाती है। जिनकी कुण्डली में नवम भाव शुभ होता है उनकी दूसरी शादी हो जाती है और वह सफल भी रहती है। जिस व्यक्ति की कुण्डली में सातवें घर में गुरू नीच या अस्त होता है या सातवें में मंगल होता है उन्हें 30 वर्ष के बाद शादी करनी चाहिए। जिस व्यक्ति की इस उम्र से पहले शादी हो जाती है उनके दांपत्य जीवन में काफी ज्यादा परेशानियां रहती हैं और उनकी पहली शादी टूटने की संभावना भी बढ़ जाती है। सातवें घर में मौजूद शुक्र और सूर्य भी दांपत्य जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं। ऐसे लोगों की कुण्डली में अगर सातवें घर पर शुभ ग्रहों का प्रभाव नहीं हो तो इनकी पहली शादी कामयाब नहीं हो पाती है। दूसरी शादी करके ही यह सुखी हो पाते हैं। सूर्य यदि सप्तम हो तो तलाक होकर पुनर्विवाह होता है और जीवन साथी के साथ सदा अनबन रहती है। शुक्र के सप्तम होने पर व्यक्ति के विपरित लिंगियो से संबंध बढ़ते हैं जो तलाक का कारण बन जाता है।

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Anupam Mohanta Oct 5, 2022

फिल्मो में या सीरियलो में रावण के चरित्र को जैसा दिखाया जाता है जनमानस के मन में ऐसा ही चित्र रावण को लेकर बना है। ये सच है रावण में कुछ अबगुण था पर इसका मतलब ये नही रावण सारे अवगुण बुराई प्रतीक है। रावण में बहुत अहं भाव था जिसके प्रतिनियती स्वरूप रावण मारा गया, पर रावण के अंदर जितना अबगुण या अहं भाव था उससे कहि गुना ज्यादा भाव आजकल की तथकथित मनुष्य में भी क्या नही है.....? इसलिए दशहरे के मौके पर भले ही आप बुराई के प्रतीक मान कर कितना ही रावण का पुतला जला ले समाज से बुराई कभी खत्म नही होगा, जबतक न हम हमारे मन से बुराई करने की आदतों नही छुड़ेंगे ...... लंका सूत्र /रावण संहिता तो है ही और यह भी सत्य है कि मृत लोक में आने से पूर्व सभीका किरदार तय था समाजिक सुधार हेतु एक प्रकार का सशक्त नाट्य कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन था जिस के संदेश को द्वापर में भगवत गीता ने स्पष्ट कर दिया मुझे ज्ञानी नही कथा वाचक ,नही अंहकारी नही भक्त चाहिए । रावण सब कुछ था यदि वह सीता जी का हरण नही करता ,अहंकार को अनिमंत्रित नही करता -उसे अपने ज्ञान पर आवश्यकता से अधिक विश्वास था उसे यह भी मान था के तीनो त्रिलोक में उस से बड़ा शिव भक्त कोई नही है, यही उसके निधन के मूल कारण था। वर्न उस से बड़ा दार्शनिक तत्कालीन समाज में मुझे नही मिला वह विश्व का प्रथम ब्यक्ति है जिस ने ladies force कि स्थापना कि और सीता को उसकी संरक्षण में रक्खा । रावण संगीत विशारद था। रावण जैसा महान पण्डित व गुणधर चारो युगों में बहुत कम ही प्रादुर्भाव हुए। #रावण #दशहरा #Ravan

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Anupam Mohanta Aug 3, 2022

#पत्नी_को_वश_में_करने_के_टोटके पत्नी को वश में करने के टोटके, स्त्रियां स्वभाव से चंचल मन की और महत्वाकांक्षी होती हैं। बदले हुए जमाने में स्मिार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने उसके मन-मिजाज को और भी बदल दिया है। देश-दुनिया के तरह-तरह की चीजों से उसके रहन-सहन का तौर-तरीका बदल रहा है। ऐसे में हर स्त्री की महत्वाकांक्षा काफी बढ़ गई है। वह अपने जीवनसाथी पर तमाम जरूरतों के पूर्ति के लिए दबाव डालती है। उसे अपने इशारे पर चलने के लिए बाध्य करती है। इसमें कमी आने पर कई बार घोर विरोधी भी बन जाती है। घर में खाने की टेबल से लेकर बेड तक पर कलह का माहौल बना रहता है। उसकी कर्कशा बोली और ताने मारने की आदतों से पति परेशान हो जाता है। दिनभर का थकामांदा घर आए पति को सुकून की जिंदगी नहीं मिलती है। किसी पुरुष की मानसिक पीड़ा तब और बढ़ जाती है जब मालूम होता है कि उसकी पत्नी उसके वश में नहीं है, या फिर वह किसी और को चाहने लगी है। पत्नी को वश में करने के टोटके इस तरह की पत्नी को वश में लाने के लिए टोने-टोटके, वशीकरण मंत्र और अनुष्ठान के उपाय बहुत ही कारगर होते हैं। पहले कुछ सरल उपाय पर एक नजर डालते हैं। धूप दिखानाः विशेष किस्म के धूप के धुंए से पत्नी को अपने वश में किया जा सकता है। इस धूप में लाल चंदन, इलायची, सिंदूर कंगनी और काकड़सिंगी का मिश्रण का होता है, दैनिक पूजा-पाठ के दौरान इस टोटके को अपनाया जा सकता है। तिलक लगानाः एक और आसान उपाय दैनिक पूजा पाठ के दौरान पत्नी के माथे पर खास किस्म का तिलक लगाने का भी हो सकता है। इसके लिए कमल के पत्ते पर गोरोचन से अपनी पत्नी का नाम लिखें। उसके बाद उसे पीसकर तिलक बना लें। अनार की लकड़ीः पत्नी को वश में करने के लिए पूर्वा फाल्गुनि नक्षत्र में अनार की लकड़ी तोड़ लाएं। उसे धूप दिखाकर लोगांे से नजर बचाकर अपनी दाएं वांह में बांध लें। नाराज पत्नी को आकर्षित करने और उसके शिकायती गुस्से को दूर करने का यह अचूक उपाय है। मिश्रित लेपः यह उपाय पत्नी को अपने विश्वास में लेकर किया जा सकता है। हल्दी, घी, सरसो, पान और गौमूत्र से बने लेप को पत्नी के शरीर पर लगाने से वह वश में आ जाती हैं। ध्यान रहे कि ऐसा करते समय पत्नी को इसका जरा भी एहसास नहीं होना चाहिए कि आपके द्वारा किया जाने वाला कार्य उसे वश में बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। वैसे इसे पत्नी को सौंदर्य बढ़ाने या सेहतमंद बने रहने के बहाने का उपयोग बता सकते हैं। विशेष अनुष्ठानः पत्नी को वश में करने का यह उपाय काफी सावधानी से एकांत में किया जाता है। इसके लिए विशेष मंत्र का 108 बार जाप करना जरूरी है। अनुष्ठान और मंत्र जाप की शुरूआत किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की प्रथम तिथि से की जा सकती है। पत्नी को वश में करने के टोटके अष्टमी के दिन आहूतियों के साथ मंत्र सिद्ध हो जाता है। इसकी शुरूआत के लिए एकांत कमरे में पूरब की ओर मुंह कर आसन लगाएं। अपने सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं। उसे पत्नी का साक्षी मानते हुए प्रथमा से सप्तमी तक मंत्र का 108 बार जाप करें। मंत्र जाप के दौरान मंत्र के अमूक शब्द की जगह पत्नी का नाम लें। अंष्टमी के दिन शाकल्य, गुड़, गुग्गल और घी की मिश्रित सामग्रियों से 108 आहूतियां दें। इस तरह से सिद्ध मंत्र के प्रयोग के समय किसी खाने की वस्तु के सामने सात बार उसे मन में पढें। उसके बाद खाने की वस्तु पर फूंक मारें और उसे पत्नी को खिला दें। इसके प्रभाव से पत्नी के स्वभाव में बदलाव दिखेगा। धीरे-धीरे वह आपके वश में आ जाएगी। इस अनुष्ठान के लिए मंत्र इस प्रकार हैः- काली चिड़िया चिग-चिग बोले, काली बनकर जाए। अमुक को वश में कराए न कराए, तो यति हनुमंत की आन। एक लाख मंत्र जाप और संकल्पः पत्नी के वशीकरण के लिए यह आजमाया हुआ उपाय है, जिसके लिए होली, दीपावली या ग्रहण के दिन बताए गए मंत्र का एक लाख बार जाप कर सिद्ध किया जाता है। मंत्र की सिद्ध होने के बाद पुष्य नक्षत्र में किसी भी रविवार को अरंड की एक सूखी डाल तोड़ लाएं। डाल को झटके के साथ एक बार में तोड़ा जाना चाहिए। सूखी डाल को जलाकर काजल बनाएं। उस काजल को पत्नी की शरीर के किसी भी हिस्से पर लगा दें। यह पत्नी को वशीभूत करने का अचूक उपाय है। सिद्ध किया जाने वाला मंत्र इस प्रकार हैः- ओम नमो काली भैरू! काली रात, काला चाल्या आधी रात, काला रेत मेरा वीर, पर नारी के राखे सीर, बेगी जा छाती घ्र ला, सूती हो जो जगाया ला, शब्द सांचा पिण्ड कांचा पफूरो मंत्रा ईश्वरी वाचा। मंत्रित मिठाई से वशीकरणः किसी अन्य पुरुष के आकर्षण में बंधी या नाराज चल रही पत्नी का वशीकरण अभिमंत्रित मिठाई के उपयोग से भी किया जा सकता है। इसक लिए एक विधि अपनाकर मंत्र को सात दिनों तक जाप से सिद्ध किया जाता है। इसकी शुरूआत किसी शनिवार की रात से की जानी चाहिए और अगले शनिवार की रात्री को समाप्त किया जाना चाहिए। इसके अगले 21 दिनों के बाद मिठाई पर मंत्र पढ़कर मंत्रित करने के बाद उसे पत्नी को प्रेम के साथ खिला देना चाहिए। मिठाई अगर पत्नी के पसंद की होनी चाहिए। मंत्र इस प्रकार हैः- पैरों की मिट्टी से वशीकरणः एक खास छोटे से मंत्र को शनिवार से शनिवार तक एक माला जाप के साथ सिद्ध करने के बाद पत्नी के पैरो के नीचे की मिट्टी से उसका वशीकरण किया जा सकता है। इस तरह से सिद्ध मंत्र को मिट्टी पर सात बार पढ़ा जाता है। अभिमंत्रित मिट्टी को पत्नी के सिर पर उसकी नजर बचाकर डाल दिया जाता है। इससे पत्नी की नाराजगी दूर हो जाती है और उसकी कर्कशा वाणी मंे भी बदलाव आ जाता है। मनोवांंिछत परिणाम मिलते हैं। सिद्ध किया जाने वाला मंत्र हैः- भगवते रुद्राय सर्वजगमोहनं कुरू कुरू स्वाहा! For Appointment: www.swamijee.in/appointment #kalivashikaran

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