Singh N Jan 17, 2022

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Singh N Jan 7, 2022

कुरान पर चले थे केस.... बहुत कम लोग जानते है कि सन 1986 में दिल्ली में कुरान पर केस चला था. .......और कुरान की 26 आयतों को दिल्ली कोर्ट ने विवादित, अमानवीय एवम शर्मनाक घोषित किया था......उस समय जो जज थे उनका नाम जस्टिस z.s.Lohat था.... हुआ ये था कि दिल्ली के इन्द्रसेन शर्मा और राजकुमार आर्य नामक दो व्यक्तियों ने कुरान की आयतों को दीवारों पर लिखवा दिया था.....जिसमे लिखा था कि जो इस्लाम को न माने उसे कत्ल कर दो इत्यादि। ये सब देखकर मुस्लिम भड़क गए.....दोनो को गिरफ्तार कर लिया गया... और दोनो को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जस्टिस लोहाट के सामने पेश किया गया....दोनो की तरफ से यह दलील दी गयी कि हुज़ूर हमने वही लिखा है जो कुरान कहती है...... जस्टिस लोहाट ने जजमेंट देने से पहले दिल्ली,यूपी के कई मुल्ला मौलवियों को सफाई देने के लिए बुलाया था,किन्तु एक भी मुल्ला मौलवी हाज़िर न हुआ.....बल्कि राजनीतिक दवाब बनाकर केस ही खारिज करने की कोशिश की जा रही थी क्योंकि हकीकत सामने आचूकी थी.... जस्टिस लोहाट ने अलग अलग पब्लिकेशन की कुरान मंगवाई थी,जो हिंदी,उर्दू एवम अंग्रेज़ी भाषा मे थी ताकि इंटरप्रिटेशन का प्रॉब्लम न हो....किन्तु एक भी मौलवी सामने न आया..... जिस से सब कुछ साफ साफ साबित हो गया और जज साहब ने जजमेंट दिया.... 31 जुलाई 1986 को जस्टिस लोहाट ने दोनो आरोपियों को बाइज्जत बरी करते हुए यहां तक कहा कि मुल्ला मौलवियों से अपील है कि इस किताब को बदले….. इसमें सुधार करे... ये ईश्वर की किताब कैसे हो सकती है???? इतना ही नही ,सन 1920 में जब मुस्लिम समुदाय ने ओछी हरकते करते हुए कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी का नारा दिया, तब उस समय इस्लाम के प्रकांड विद्वान चंपू पंडित ने किताब लिखी जिसका नाम था "रंगीला रसूल".....ये किताब मोहम्मद पर थी।। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण तो महायोगी थे और उनकी गीता पूरी दुनिया के वैज्ञानिक पढ़ चुके है और सभी ने पढ़कर उसकी तारीफों में पुल बांधे.... चाहे महान आइंस्टीन हो या परमाणु बम का अविष्कार करने वाले ओपेनहेमर जिन्होंने गीता का 11वा अध्याय पढ़ने के बाद परमाणु बम बनाया था... किन्तु जब मोहम्मद पर ये रंगीला रसूल किताब लिखी गईं और मुस्लिम सम्प्रदाय भड़क उठा...तब इलाहाबाद हाई कोर्ट में केस चला. .उस समय अंग्रेज़ो का शासन था... ब्रिटिश जज ने मुल्ला मौलवियों को बुलाया औऱ पूँछा की इस किताब में क्या गलत है ?? सभी मुल्ला मौलवियों ने उस किताब को पूरा सही बताया...उसमे कुछ गलत नही बताया... और इस तरह चंपू पण्डित के खिलाफ केस खारिज कर दिया गया....किन्तु केस खत्म होने के बाद भी चंपू पण्डित पर मुस्लिम समुदाय द्वारा हमले जारी थे क्योंकि उन्होंने रसूल की सच्चाई जो बया कर दी थी.... हैरानी की बात ये है कि मीडिया ने कभी भी इस केस का आजतक जिक्र न किया..... बताइये.... भारतीय मीडिया वामपंथ की जकड़ में जो है ...मुस्लिम परस्त.... ये केस गूगल में भी बड़ी मुश्किल से ढूढने से मिलता है.... क्योंकि नेहरू ने इन केसों को रिकॉर्ड से हटवाने की कोशिश की....बाद में दिल्ली केस जिसमे जस्टिस लोहाट ने कुरान के खिलाफ फैसला दिया था उसका जिक्र कलकत्ता हाई कोर्ट में किया गया. ..और राजनीतिक दवाब ,कांग्रेस के राज के कारण तत्कालीन कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जस्टिस लोहाट के फैसले को नजरअंदाज किया.....और इसे इस्लाम का व्यक्तिगत मुद्दा घोषित कर दिया.... वही कृष्ण गीता में कहते है कि ममैवांशो जीव लोके जीव भूत सनातनः..... अर्थात संसार का प्रत्येक जीव मेरा ही अंश है एवम सनातन है.....अर्थात किसी से भी द्वेष मत करो चाहे वो मुझे मानता हो या न मानता हो.... यही कारण है कि आजतक श्रीमद्भगवद गीता के खिलाफ एक भी केस नही चला बल्कि आधुनिक अमेरिका के जनक एमर्सन कहते है कि मुझे मेरे सारे प्रश्नों का उत्तर बाइबिल एवम कुरान में नही बल्कि गीता में मिला...... ऐसे और पोस्ट देखने के लिए और राष्ट्रीय हिन्दू संगठन से जुड़ने के लिए क्लिक करें 👇👇 https://kutumbapp.page.link/o1ffVzXe6CyD2eDs9

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Singh N Jan 7, 2022

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Singh N Nov 26, 2021

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Singh N Nov 25, 2021

****** *24 नवंबर 1675 की तारीख गवाह बनी थी, हिन्दू के हिन्दू बने रहने की !!* दोपहर का समय और जगह चाँदनी चौक दिल्ली लाल किले के सामने जब मुगलिया हुकूमत की क्रूरता देखने के लिए लोग इकट्ठे हुए पर बिल्कुल शांत बैठे थे ! लोगो का जमघट !! और सबकी सांसे अटकी हुई थी ! शर्त के मुताबिक अगर गुरु तेग बहादुरजी इस्लाम कबूल कर लेते हैं, तो फिर सब हिन्दुओं को मुस्लिम बनना होगा, बिना किसी जोर जबरदस्ती के ! औरंगजेब के लिए भी ये इज्जत का सवाल था समस्त हिन्दू समाज की भी सांसे अटकी हुई थी क्या होगा? लेकिन गुरु जी अडिग बैठे रहे। किसी का धर्म खतरे में था धर्म का अस्तित्व खतरे में था तो दूसरी तरफ एक धर्म का सब कुछ दांव पे लगा था ! हाँ या ना पर सब कुछ निर्भर था। खुद चल के आया था औरगजेब, लालकिले से निकल कर सुनहरी मस्जिद के काजी के पास,,, उसी मस्जिद से कुरान की आयत पढ़ कर यातना देने का फतवा निकलता था ! वो मस्जिद आज भी है ! *गुरुद्वारा शीष गंज, चांदनी चौक, दिल्ली !* के पास पुरे इस्लाम के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न था ! आखिरकार जब इसलाम कबूलवाने की जिद्द पर इसलाम ना कबूलने का हौसला अडिग रहा तो जल्लाद की तलवार चली और प्रकाश अपने स्त्रोत में लीन हो गया । ये भारत के इतिहास का एक ऐसा मोड़ था जिसने पुरे हिंदुस्तान का भविष्य बदलने से रोक दिया । *हिंदुस्तान में हिन्दुओं के अस्तित्व में रहने का दिन !!* सिर्फ एक हाँ होती तो यह देश हिन्दुस्तान नहीं होता ! *गुरु तेग बहादुर जी* जिन्होंने हिन्द की चादर बनकर तिलक और जनेऊ की रक्षा की उनका अदम्य साहस भारतवर्ष कभी नही भूल सकता । कभी एकांत में बैठकर सोचिएगा अगर गुरु तेग बहादुर जी अपना बलिदान न देते तो हर मंदिर की जगह एक मस्जिद होती और घंटियों की जगह अज़ान सुनायी दे रही होती। 24 नवम्बर का यह इतिहास सभी को पता होना चाहिए ! इतिहास के वो पृष्ठ जो पढ़ाए नहीं गये ! 🙏💐🚩🚩🚩🚩 💐🙏 *वाहे गुरु जी का खालसा !!* *वाहे गुरूजी की फ़तेह !!* 🙏🙏🙏🙏

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Singh N Nov 18, 2021

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