+95 प्रतिक्रिया 28 कॉमेंट्स • 174 शेयर

+54 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 21 शेयर

💐तेरा वैभव अमर रहे💐 🦚आओ पक्षियों से कुछ सीखें🦚 १. रात को कुछ नही खाते।🦜 २. रात को घूमते नही।🦜 ३. अपने बच्चे को सही समय पर सिखाते हैं।🦜 ४. ठूस ठूस के कभी नही खाते। आप ने कितने भी दाने डाले हों, थोड़ा खा के उड़ जायेंगे। साथ कुछ नही ले जाते।🦜 ५. रात होते ही सो जायेंगे, सुबह जल्दी जाग जायेंगे, गाते चहकते उठेंगे।🦜 ६. अपना आहार कभी नहीं बदलते।🦜 ७. स्वयम्वर से जीवनसाथी चुनेंगे।🦜 ८. अपने शरीर से सतत् काम लेते हैं। रात के सिवा आराम नही।🦜 ९. बीमारी आई तो खाना छोड़ देंगे, तभी खायेंगे जब ठीक होंगे।🦜 १०. अपने बच्चे को भरपूर प्यार देंगे।🦜 ११. परिश्रम करने से हृदय,किडनी, लिवर के रोग नहीं होते।🦜 १२. प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितनी जरूरत है।🦜 १३. अपना घर पर्यावरण अनुकूल बनाते हैं।🦜 १४. अपनी भाषा छोड़कर दूसरों की बोली नहीं बोलते।🦜 बहुत ही शिक्षाप्रद ! हम भी इनसे कुछ सीखें तो जीवन सरल, सुंदर व सफल हो जाए। जयश्रीराम,,,,,,,^,,,,,,,,,💐

+109 प्रतिक्रिया 25 कॉमेंट्स • 212 शेयर

+97 प्रतिक्रिया 23 कॉमेंट्स • 77 शेयर

कैसे करें आरती ? घर में कैसा और कौनसा दीपक, बाती जलाएं? क्या है नियम ? दीपक से सम्बंधित हर जानकारी 【शास्त्र प्रमाण सहित पढ़िए जब भी आप आरती करें तो पहले भगवान के सामनें ॐ बनाने का प्रयास करें (यानी ॐ में घुमाए)। फिर 👉आरती को कितनी बार घुमाना चाहिए ? आदौ पाद चतुष्तले च विष्णौः द्वौ : नाभि देशे मुखबिम्ब एकैम् । सर्वेषु चांगेषु च सप्तवाराः नारार्तिकं भक्त जनस्तु कुर्यात् सबसे पहले भगवान के श्री चरणों की चार बार नाभि की दो बार मुख की एक बार और फिर भगवान के समस्त श्री अंगों में यानी सिर से चरणों तक सात बार आरती घुमाएं। इसका कारण है (4+2+1+7 = 14) इस तरह से आरती करने में चौदहों भवन जो भगवान में समाए हैं उन्ह तक आपका प्रणाम पहुंचता है। (आरती हमेशा श्री चरणों से ही प्रारम्भ करनी चाहिए) 👉कितने दीपों से आरती करें ?? हमारे शास्त्रों में कहा है- वर्तिकाः सप्त वा पंच कृत्वा वा दीप वर्तिकाम् कुर्यात् सप्त प्रदीपेन शंख घण्टादिवाद्यकैः ।। यानी आरती को पंचमुखी ज्योति या सप्तमुखी ज्योति से करना ही सर्वोतम है, जिसमें साथ साथ शंख और घन्टी अवश्य चले। 👉दीपक को कैसे और कहाँ रखें ? कालिका पुराण में आता है- सर्वसहा वसुमती सहते न त्विदं द्वयम् । अकार्यपादघातं च दीपतापं तथैव च ॥ दीपक को धरती पर रखने से धरती पर ताप बड़ता है, इसलिए कभी दीपक को घरती पर न रखें। कालिका पुराण में ही कहा है- "न चैव स्थापेयदीपं साक्षातभूमौ कदाचन" (दीपक को आसन या थाली में ही रखें) दीपक को स्थापित कर, उसका पूजन कर और उसको प्रज्ज्वलित करने (यानी जलाने) के बाद हाथ को प्रक्षालित (जल से धोना या हाथों पर छीटा देना) अवश्य किया जाए, ऐसा वारह पुराण में आता है- दीपं स्पृष्ट्वा तु यो देवी मम कर्माणि कारयेत् । तस्यापराधाद्वैभूमे पापं प्राप्नोति मानवः ॥ (ऐसा न करने से पाप का भागीदार होता है) 👉घी का दीपक जलाएं या तेल का ??? घृतेन दीपो दातव्य: तिल तैलेन वा पुनः (शास्त्रों में या तो शुद्ध घी का या तिल के तेल का दीपक जलाने का प्रमाण है, पर सरसों, नारियल आदि का कहीं नहीं ) इसी के साथ ध्यान रखिए - "घृत दीपो दक्षिणेस्यात तैलदीपस्तु वामत:" घी का दोपक हमेशा भगवान के दक्षिण तरह यानी (right side) और तिल के तेल का दीपक वाम भाग यानी left side रखा जाता है। 👉दीपक का मुख किस और हो ? आहानिक सूत्रावली में आता है- आयुर्दः प्रांगमुखो दीपो धनदः स्यादु उदंग मुखः । प्रत्यंगमुखो दुखदोऽसौ हानिदो दक्षिणामुखः ॥ (दीपक का मुख पूर्व दिशा में होगा तो वह आयु बढाने वाला होगा, उत्तर की तरफ वाला धन-धान्य देने वाला होता है, पश्चिम की तरफ दुख और दक्षिण की तरफ हानि देने वाला होता है) 👉अब अगला प्रश्न है कि कौन से बाती ? घी के दीपक में हमेशा कपास(रुई) की बाती और तिल के तेल में लाल मौली की बाती लगाई जाए, इसके बारे में शस्त्र कहता है- 【दीप घृतं दक्षे तैलयुक्तं च वामतः । दक्षिणेच सितावर्ति वामतो रक्तः वर्तिकाम् ॥ 】 परन्तु घी को तेल के साथ मिलाकर कभी भी दीप में न डालें। 👉दीपक की लोह कैसी हो ? (कालिका पुराण से) लभ्यते यस्य तापस्तु दीपस्य चतुरगुंलात् । न स दीप इति ख्यातो ह्येघव हिन्स्तु स श्रुतः । (अगर दीपक की लोह चार उंगल से ऊपर का ताप दे रही है तो वह दीपक नहीं अग्नि है। दीपक की लोह 4 अंगुल से कम हो दीपक में से चड़चड़ की आवाज न आए और न ही दीपक में से धुंआ उठे, इस प्रकार की लोह सर्वश्रेष्ठ है) अब कुछ नियम सुनें - आरती कभी भी अखण्ड दीप या उस दीप से न करें जो आपने पूजा के लिए जलाया था। - आरती कभी भी बैठे-बैठे न करें। - आरती हमेशा दाहिने हाथ से करें। - कोई आरती कर रहा हो तो उस समय उसके ऊपर से ही हाथ घुमाना नही चाहिए, यह काम आरती खत्म होने के बाद करें - आरती के बीच में बोलने, चींखने, छिंखने आदि से आरती खंडित होती है, - दीपक की वयवस्था इस प्रकार करें कि वह पूरी आरती में चलें - आरती कभी भी उल्टी न घुमाएं, आरती को हमेशा, Clockwise (यानी दक्षिणावर्त, जैसे घड़ी चलती है) में घुमाएं। जय सनातन धर्म🙏❤️🚩 जय श्री राम🙏❤️🚩

+68 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 15 शेयर

+195 प्रतिक्रिया 61 कॉमेंट्स • 271 शेयर

+81 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 86 शेयर

+49 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 23 शेयर