Sahil Grover Jan 25, 2022

समुद्र में एक नाव थी। बहुत यात्री उस नाव पर थे। एक फकीर भी था। नाव किनारे के करीब-करीब पहुंचने को थी। आशा थी कि सुबह होते-होते नाव किनारे से लग जाएगी। लेकिन आधी रात भयंकर तूफान आ गया, और नाव डगमगाने लगी। पानी के थपेड़े भीतर पानी फेंकने लगे, हवाएं तेज़ हो गईं,नाव रास्ता भटक गई और सभी यात्री चिंतित हो गए। आधी रात को सारे यात्री जग गए, हाथ जोड़ कर, घुटने टेक कर आकाश की तरफ प्रार्थना करने लगे कि हे परमात्मा! हमें बचाओ। वे सब प्रार्थनाओं में कहने लगे कि अगर हम बच गए तो इतना दान करेंगे, अगर बच गए तो तीर्थ हो आएंगे, अगर बच गए तो ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे। भगवान को आश्वासन भी देने लगे। मनुष्य की भाषा में कहें तो रिश्वत देने लगे। और धर्म की भाषा में कहें तो भगवान के सामने प्रतिज्ञाएं और व्रत लेने लगे कि हम ऐसा करेंगे, हम वैसा करेंगे,बस आप हमें बचाओ। वह फकीर था, सारे लोगों ने उससे कहा कि तुम भी प्रार्थना करो, तुम्हारी प्रार्थना वह ज्यादा सुन लेगा। क्योंकि तुम फकीर हो, निकट का तुम्हारा संबंध है, तुम्हारी बात जल्दी सुन लेगा। लेकिन वह फकीर अजीब था, वह चुपचाप बैठा रहा, और प्रार्थना में सम्मिलित नहीं हुआ। तो वे सब बहुत नाराज हो गए और उसने कहा कि तुम कैसे दुष्ट आदमी हो, तुम भगवान के निकट के मालूम होते हो, जीवन भर के फकीर हो, तुम कहोगे तो जल्दी मान लेगा। मिनिस्टर को भी उसका कोई रिश्तेदार कहता है तो जल्दी मान लेता है, भगवान भी तुम्हारी जल्दी मान लेगा। लेकिन तुम हो कि तुम चुपचाप बैठे हो।वह फकीर फिर भी चुप ही बैठा रहा। सुबह होने के करीब थी, सभी यात्री डर कर आंखों मूंद कर ईश्वर से प्रार्थना कर ही रहे थे कि वह फकीर चिल्लाया~अरे !! देखो ! किनारा करीब आ गया है।हम सब सुरक्षित हैं। वे तो सब बेचारे प्रार्थना में थे, आंख उठा कर देखा, किनारा करीब था, प्रार्थना वहीं भूल गए, अपना सामान बांधने लगे। उस फकीर ने कहा~ कहाँ गई तुम्हारी प्रार्थना?? किनारा करीब आ गया तो एक भी घुटने टेके न रहा, एक भी हाथ जोड़े नहीं रहा, सब उठाए अपना सामान बांधने लगे, और भूल गए प्रार्थना और भगवान दोनों को ही।ईश्वर को धन्यवाद कहने कोई 2 पल न रुका। दुःख में और कष्ट में प्रार्थना करना गलत नही है। मुसीबत में और प्रतिकूल परिस्थितियों में ईश्वर को याद करना गलत नही है परन्तु सुख और अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर ईश्वर को धन्यवाद देना, उनका स्मरण करना ही सच्ची प्रार्थना हैं।सुख -दुःख दोनों में ही ईश्वर का स्मरण बना रहे।वक़्त का काम तो गुजरना है, बुरा हो तो "सब्र" करो, अच्छा हो तो "शुक्र" करो... जय श्री कृष्ण..... जय श्रीराधेगोविंद🙏

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Sahil Grover Jan 22, 2022

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