Ravi Kumar Taneja Oct 23, 2021

🪔🪔🪔🕉🪔🪔🪔 🧡इस वर्ष 24 अक्टूबर, रविवार को करवा चौथ का व्रत मनाया जाएगा।🧡 यह व्रत रखकर *सौभाग्यवती(सुहागिन)* स्त्रियाँ अपने पति की ❤दीर्घ आयु, ❤अच्छे स्वास्थ्य व ❤परम सौभाग्य की कामना करती हैं!!! 💚माई मंदिर परिवार की समस्त सुहागिन बहना श्री को करवा-चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ 💚 *❤करवा चौथ,करवा चौथ व्रत कथा, व्रत विधि❤* *🌼करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेशजी के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। छान्दोग्य उपनिषद के अनुसार करवा चौथ के दिन व्रत रखने से सारे पाप नष्ट होते हैं और जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। इससे आयु में वृद्धि होती है और इस दिन गणेशजी तथा शिवजी -पार्वती माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है।* *🌹करवा चौथ रविवार, 24 अक्टूबर,2021🌹* करवा चौथ पूजा मुहूर्त 17:43 से 18:50 चंद्रोदय 20:07 *🪴करवा चौथ व्रत कथा:*🪴 *🌻बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।* *🌻जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।* *🌻सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये।* *🌻वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।* *अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।* *🌻वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसेआश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।* *🌻इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।* *🌷करवा चौथ व्रत विधि 🌷:-* *⚘नैवेद्य : आप शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य के रूप में उपयोग में ले।* *⚘करवा : काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे उपयोग किया जा सकता है।* 🪔🪔🪔🕉🪔🪔🪔 *🏹करवा चौथ पूजन के लिए मंत्र :-* *💛ॐ शिवायै नमः’ से माता पार्वतीजी का* *💛‘ॐ नमः शिवाय’ से शिवजी का* *💛‘ॐ षण्मुखाय नमः’ से स्वामी कार्तिकेयजी का* *💛‘ॐ गणेशाय नमः’ से प्रथम पूज्य श्री गणेशजी का* तथा *💛‘ॐ सोमाय नमः’ से चन्द्रदेव का पूजन करें!!!* 🕉माँ दुर्गा का अमोघ मंत्र:- *❤देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌।* *रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥*❤ *‼️करवा चौथ की थाली ‼️* करवा चौथ की रात्रि के समय चाँद देखने के लिए आप पहले से ही थाली को सजाकर रख लेवे। थाली में आप निम्न सामग्री को रखें। •⚜दीपक •⚜करवा चौथ का कलश (ताम्बे का कलश इसके लिए श्रेष्ठ होता है ) •⚜छलनी •⚜कलश को ढकने के लिए वस्त्र •⚜मिठाई या ड्राई फ्रूट •⚜चन्दन और धुप •⚜मोली और गुड/चूरमा •⚜व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- *💙मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।💙* 🛕🛕🛕🕉🛕🛕🛕 *💞पूरे दिन निर्जला रहें💞* *दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।* *आठ पूरियों की अठावरी बनाएं, हलुआ बनाएं, पक्के पकवान बनाएं।* *पीली मिट्टी से मातागौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।* *माता गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। माता गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से मां गौरी का श्रृंगार करें।* *जल से भरा हुआ लोटा रखें।* *वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें।उसके ऊपर दक्षिणा रखें।* ●💟रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं। ●💟गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें। 💚 *🕉नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥*💚 🪔🪔🪔🕉🪔🪔🪔 *करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।* *कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।* *तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।* *रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।* *इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।* *पूजन के पश्चात आस-पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ की बधाई देकर पर्व को संपन्न करें।* *❣करवा चौथ में सरगी* *पंजाब में करवा चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरम्भ होता है। यह करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किया जाने वाला भोजन होता है। जो महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। शाम को सभी महिलाएँ श्रृंगार करके एकत्रित होती हैं और फेरी की रस्म करती हैं।* *💥इस रस्म में महिलाएँ एक घेरा बनाकर बैठती हैं और पूजा की थाली एक दूसरे को देकर पूरे घेरे में घुमाती हैं। इस रस्म के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला करवा चौथ की कथा गाती हैं। भारत के अन्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गौर माता की पूजा की जाती है। गौर माता की पूजा के लिए प्रतिमा गाय के गोबर से बनाई जाती है।* *🤍क्या अविवाहित करवा चौथ व्रत रख सकते हैं?* *करवा चौथ का व्रत शादीशुदा स्त्रियों के द्वारा ही रखा जाता है। इसके लिए आप अपने घर में बड़ी बुजुर्ग स्त्रियों की सलाह जरूर लेवे क्यों की कुछ अंचल में अच्छे वर के लिए कुंवारी लड़किया भी यह व्रत रखती हैं।* *🖤करवा चौथ व्रत में हम क्या खा सकते हैं?* *कुछ अंचल में अल्पाहार के लिए फल का उपयोग किया जाता है लेकिन इस व्रत को निर्जला करना अधिक लाभदायी होता है।* *🤎क्या आप करवा चौथ पर पानी पी सकते हैं?* *नहीं, क्यों की यह निर्जला व्रत होता है इसलिए इस दिन ना तो कुछ खाया जाता है और नाही पानी हीग्रहण किया जाता है।* *💜सरगी खाने का सही समय क्या है?* *वैसे तो इस व्रत को आप निर्जला करे तो उचित रहेगा, अन्यथा अपनी परम्पराओं के अनुसार सरगी का उपयोग करे जिसके लिए सूर्योदय से पूर्व ( प्रातः चार से पांच बाते ) तक का समय अनुकूल होता है।* *🧡करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा की जाती है?* *👣•चौथ माता की पूजा के साथ आप माता पार्वतीजी की पूजा करें और शिवजी , गणेशजी , और कार्तिकेयजी की भी पूजा अर्चना करे।* 💟माँ दुर्गा से प्रार्थना है कि सभी सुहागिन बहनों , स्त्रियों को स्वास्थ्य,आरोग्य, सौभाग्य प्रदान करे औऱ अनके पति को लम्बी आयु प्रदान करके उन्हे सौभाग्यशाली बनाए रखें !!!💟 🕉🦚💙🙏🌹🙏💙🦚🕉

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Ravi Kumar Taneja Oct 17, 2021

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Ravi Kumar Taneja Oct 14, 2021

*꧁🌹दशहरा की हार्दिक शुभकामनाये 🌹꧂* ꧁🌹जय श्री राम 🌹꧂ 🏹 *"दशहरा" के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें! दिव्यता,शक्ति और न्याय के स्वरूप प्रभु श्रीराम जी की कृपा आप सभी पर हमेशा बनी रहे।*🙏🌸🙏 ‼️शुभ मुहूर्त‼️:- *🏹विजयादशमी का पूरा दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त है अर्थात दशहरे के दिन कोई भी काम करने वाला सफल होता है।*🏹 *🏹विजयादशमी के दस सूत्र🏹* 💢दस इन्द्रियों पर विजय का पर्व है। 💢असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। 💢बहिर्मुखता पर अंतर्मुखता की विजय का पर्व है। 💢अन्याय पर न्याय की विजय का पर्व है। 💢दुराचार पर सदाचार की विजय का पर्व है। 💢तमोगुण पर दैवीगुण की विजय का पर्व है। 💢दुष्कर्मों पर सत्कर्मों की विजय का पर्व है। 💢भोग पर योग की विजय का पर्व है। 💢असुरत्व पर देवत्व की विजय का पर्व है। 💢जीवत्व पर शिवत्व की विजय का पर्व है। *🏹विजयादशमी के दिन अपने मन में जो रावण के विचार हैं काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, शोक, चिंता – इन अंदर के शत्रुओं को जीतना है और रोग,अशांति जैसे बाहर के शत्रुओं पर भी विजय पानी है। दशहरा हमे यह संदेश देता है।*🏹 ⚜मंत्र⚜:- *🌹दशहरे की संध्या को भगवान को प्रीतिपूर्वक भजे और "ॐकार" का जप करें।’*🌹 *🌹‘ॐ’ का जप करने से देवदर्शन, लौकिक कामनाओं की पूर्ति, आध्यात्मिक चेतना में वृद्धि, साधक की ऊर्जा एवं क्षमता में वृद्धि और जीवन में दिव्यता तथा परमात्मा की प्राप्ति होती है।*🌹 *🌲वनस्पति पूजन🌲* विजयदशमी पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्त्व है- 🌲एक है शमी वृक्ष, जिसका पूजन रावण दहन के बाद करके इसकी पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान किया जाता है। इस परंपरा में विजय उल्लास पर्व की कामना के साथ समृद्धि की कामना करते हैं। 🌲दूसरा है अपराजिता (विष्णु-क्रांता)। यह पौधा अपने नाम के अनुरूप ही है। यह विष्णु को प्रिय है और प्रत्येक परिस्थिति में सहायक बनकर विजय प्रदान करने वाला है। नीले रंग के पुष्प का यह पौधा भारत में सुलभता से उपलब्ध है। घरों में समृद्धि के लिए तुलसी की भाँति इसकी नियमित सेवा की जाती है l ⚘प्रभु श्री राम आपको और आपके परिवार को शांति, सुख-समृद्धि, मान-सन्मान, यश-कीर्ति प्रदान करें, ईश्वर से हमारी यही प्रार्थना है 🙏🌹🙏!!! 🕉🏹🙏🌻🙏🌻🙏🌻🙏🏹🕉

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Ravi Kumar Taneja Oct 14, 2021

🕉👣🔱जय माता दी 🔱👣🕉 🕉👣🔱माँ सिद्धिदात्री🔱👣🕉 🕉👣देवी के नवें रूप को सिद्धिदात्री कहा जाता है👣🕉 🌻देवी महागौरी आपको भौतिक जगत में प्रगति के लिए आशीर्वाद और मनोकामना पूर्ण करती हैं, ताकि आप संतुष्ट होकर अपने जीवनपथ पर आगे बढ़ें। 💥माँ सिद्धिदात्री आपको जीवन में अद्भुत सिद्धि, क्षमता प्रदान करती हैं ताकि आप सबकुछ पूर्णता के साथ कर सकें। सिद्धि का क्याअर्थ है? सिद्धि, सम्पूर्णता का अर्थ है – विचार आने से पूर्व ही काम का हो जाना। आपके विचारमात्र, से ही, बिना किसी कार्य किये आपकी इच्छा का पूर्ण हो जाना यही सिद्धि है। 💥आपके वचन सत्य हो जाएँ और सबकी भलाई के लिए हों। आप किसी भी कार्य को करें वो सम्पूर्ण हो जाए - यही सिद्धि है। सिद्धि आपके जीवन के हर स्तर में सम्पूर्णता प्रदान करती है। यही देवी सिद्धिदात्री की महत्ता है। *💥मां सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं। अंतिम दिन भक्तों को पूजा के समय अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र, जो कि हमारे कपाल के मध्य स्थित होता है, वहां लगाना चाहिए। ऐसा करने पर देवी की कृपा से इस चक्र से संबंधित शक्तियां स्वत: ही भक्त को प्राप्त हो जाती हैं। सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के बाद श्रद्धालु के लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता और उसे सभी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।* 🌲ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:🌲 के जाप से आप माँ दुर्गा के नौवें स्वरुप माँ सिद्धिदात्री की पूजा कर सकते हैं । ‼️नवरात्रि की नवमी को पहनें बैंगनी रंग के कपड़े ‼️ 🔱👣मां सिद्धिदात्री आपको और आपके परिवार को हर प्रकार से सुख-समृद्धि प्रदान करें यही मां से प्रार्थना 👣🔱 🕉🔱👣जय माता रानी 👣🔱🕉 🕉 आप सभी पर सपरिवार , माँ दुर्गा के आशीर्वाद से सुख, समृद्धि, शांति, संपत्ति, धन, धान्य, मान, सन्मान, यश, कीर्ति, एव ऐश्वर्य की वर्षा होवे 🙏🌹🙏 🕉 🙏🌹🙏 या देवी सर्वभूतेषु माँ शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🙏🌹🙏 🕉🔱👣🙏🌹🙏👣🔱🕉

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Ravi Kumar Taneja Oct 13, 2021

🕉👣जय माता दी 👣🕉 🕉🔱👣जय माँ अम्बे जय जय जगदम्बे 👣🔱🕉 🌹नवरात्रि की अष्टमी की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये 🌹 *🌻श्री दुर्गा माँ के 108 नाम (अर्थ सहित)🌻* 🌸〰️🌸〰️🌸〰️🌸 1🔱सती- अग्नि में जल ! कर भी जीवित होने वाली 2.🔱साध्वी- आशावादी ! 3🔱भवप्रीता- भगवान् ! शिव पर प्रीति रखने वाली ! 4🔱भवानी- ब्रह्मांड की निवासिनी ! 5🔱भवमोचनी- संसार को बंधनों से मुक्त करने वाली ! 6🔱आर्या- देवी ! 7🔱दुर्गा- अपराजेय ! 8🔱जया- विजयी ! 9🔱आद्य- शुरूआत की वास्तविकता ! 10🔱त्रिनेत्र- तीन आँखों वाली ! 11🔱शूलधारिणी- शूल धारण करने वाली ! 12🔱पिनाकधारिणी- शिव का त्रिशूल धारण करने वाली ! 13🔱चित्रा- सुरम्य,सुंदर ! 14🔱चण्डघण्टा- प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली ! 15🔱महातपा- भारी तपस्या करने वाली ! 16🔱मन - मनन- शक्ति ! 17🔱बुद्धि- सर्वज्ञाता ! 18🔱अहंकारा- अभिमान दूर करने वाली ! 19🔱चित्तरूपा- वह जो सोच की अवस्था में है ! 20🔱चिता- मृत्युशय्या ! 21🔱चिति- चेतना ! 22🔱सर्वमन्त्रमयी- सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली! 23🔱सत्ता- सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है! 24🔱सत्यानन्दस्वरूपिणी- अनन्त आनंद का रूप! 25🔱अनन्ता- जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं! 26🔱भाविनी- सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत! 27🔱भाव्या- भावना एवं ध्यान करने योग्य! 28🔱भव्या- कल्याणरूपा,भव्यता के साथ! 29🔱अभव्या - जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं! 30🔱सदागति- हमेशा गति में, मोक्ष दान! 31🔱शाम्भवी- शिवप्रिया, शंभू की पत्नी! 32🔱देवमाता- देवगण की माता! 33🔱चिन्ता- चिन्ता हरने वाली ! 34🔱रत्नप्रिया- गहने से प्यार! 35🔱सर्वविद्या- प्रत्येक ज्ञान का स्तोत्र ! 36🔱दक्षकन्या- दक्ष की बेटी! 37🔱दक्षयज्ञविनाशिनी- दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली! 38🔱अपर्णा- तपस्या के समय पत्ते को भी न ग्रहण करने वाली! 39🔱अनेकवर्णा- अनेक रंगों वाली! 40🔱पाटला- लाल रंग वाली! 41🔱पाटलावती- गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली! 42🔱पट्टाम्बरपरीधाना- रेशमी वस्त्र पहनने वाली! 43🔱कलामंजीरारंजिनी- पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली! 44🔱अमेय- जिसकी कोई सीमा नहीं! 45🔱विक्रमा- असीम पराक्रमी! 46🔱क्रूरा- दैत्यों के प्रति कठोर! 47🔱सुन्दरी- सुंदर रूप वाली! 48🔱सुरसुन्दरी- अत्यंत सुंदर! 49🔱वनदुर्गा- जंगलों की देवी! 50🔱मातंगी- मतंगा की देवी! 51🔱मातंगमुनिपूजिता- बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय! 52🔱ब्राह्मी- भगवान ब्रह्मा की शक्ति! 53🔱माहेश्वरी- प्रभु शिव की शक्ति! 54🔱इंद्री- इन्द्र की शक्ति! 55🔱कौमारी- किशोरी! 56🔱वैष्णवी- अजेय! 57🔱चामुण्डा- चंड और मुंड का नाश करने वाली! 58🔱वाराही- वराह पर सवार होने वाली! 59🔱लक्ष्मी- सौभाग्य की देवी! 60🔱पुरुषाकृति- वह जो पुरुष रूप धारण कर ले! 61🔱विमिलौत्त्कार्शिनी- आनन्द प्रदान करने वाली! 62🔱ज्ञाना- ज्ञान से संपन्न ! 63🔱क्रिया- हर कार्य में निपुण: ! 64🔱नित्या- अनन्त! 65🔱बुद्धिदा- ज्ञान देने वाली! 66🔱बहुला- विभिन्न रूपों वाली! 67🔱बहुलप्रेमा- सर्व प्रिय! 68🔱सर्ववाहनवाहना- सभी वाहन पर विराजमान होने वाली! 69🔱निशुम्भशुम्भहननी- शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली! 70🔱महिषासुरमर्दिनि- महिषासुर का वध करने वाली! 71🔱मधुकैटभहंत्री- मधु व कैटभ का नाश करने वाली! 72🔱चण्डमुण्ड विनाशिनि- चंड और मुंड का नाश करने वाली! 73🔱सर्वासुरविनाशा- सभी राक्षसों का नाश करने वाली! 74🔱सर्वदानवघातिनी- संहार के लिए शक्ति रखने वाली! 75🔱सर्वशास्त्रमयी- सभी सिद्धांतों में निपुण! 76🔱सत्या- सच्चाई की मूरत! 77🔱सर्वास्त्रधारिणी- समस्त हथियारों को धारण करने वाली! 78🔱अनेकशस्त्रहस्ता- हाथों में कई हथियार धारण करने वाली! 79🔱अनेकास्त्रधारिणी- अनेक हथियारों को धारण करने वाली! 80🔱कुमारी- सुंदर किशोरी! 81🔱एककन्या- कन्या! 82🔱कैशोरी- जवान! 83🔱युवती- नारी! 84🔱यति- तपस्वी! 85🔱अप्रौढा- जो कभी पुराना ना हो,चिरयोवनी ! 86🔱प्रौढा- जो पुराना है! 87🔱वृद्धमाता- शिथिल! 88🔱बलप्रदा- शक्ति देने वाली! 89🔱महोदरी- ब्रह्मांड को संभालने वाली! 90🔱मुक्तकेशी- खुले बाल वाली! 91🔱घोररूपा- एक भयंकर दृष्टिकोण वाली! 92🔱महाबला- अपार शक्ति वाली! 93🔱अग्निज्वाला- मार्मिक आग की तरह! 94🔱रौद्रमुखी- विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरे वाली ! 95🔱कालरात्रि- काले रंग वाली! 96🔱तपस्विनी- तपस्या में रत ! 97🔱नारायणी- भगवान नारायण की विनाशकारी रूप! 98🔱भद्रकाली- काली का भयंकर रूप! 99🔱विष्णुमाया- भगवान विष्णु का जादू! 100🔱जलोदरी- ब्रह्मांड में निवास करने वाली! 101🔱शिवदूती- भगवान शिव की राजदूत! 102🔱करली - हिंसक ! 103🔱अनन्ता- अविनाशी! 104🔱परमेश्वरी- प्रथम देवी! 105🔱कात्यायनी- ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय! 106🔱सावित्री- सूर्य की बेटी! 107🔱प्रत्यक्षा- वास्तविक! 108🔱ब्रह्मवादिनी- वर्तमान में हर जगह वास करने वाली! 🕉🔱🌼👣माँ दुर्गा के समस्त नाम दिव्यता, ऊर्जा और शक्ति से परिपूर्ण हैं👣 🌼🔱🕉 🕉👣जय माता दी 👣🕉 ⚘"ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।"⚘ ⚘ || ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै: ||⚘ 🕉 आप सभी पर माँ दुर्गा के आशीर्वाद से सुख, समृद्धि, शांति, संपत्ति, धन, धान्य, मान, सन्मान, यश,कीर्ति,एव ऐश्वर्य की वर्षा होवे 🕉 🙏🌹🙏 या देवी सर्वभूतेषु माँ शांति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः 🙏🌹🙏 शुभ रात्री स्नेह वंदन जी 🙏🌺🙏 🕉🔱👣🐅🙏🌷🙏🐅👣🔱🕉

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Ravi Kumar Taneja Oct 13, 2021

🕉👣जय माता दी 👣🕉 🕉🔱👣जय माँ महागौरी👣🔱🕉 🌹🔱👣सौन्दर्य का प्रतीक : माँ महागौरी👣🔱🌹 🕉देवी माँ का आठवाँ स्वरुप है,महागौरी🕉 🌹🔱👣महागौरी का अर्थ है: - वह रूप जो कि सौन्दर्य से भरपूर है, प्रकाशमान है - पूर्ण रूप से सौंदर्य में डूबा हुआ है। जो दिव्यता, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है 🌹👣🔱 🔱👣 प्रकृति के दो छोर या किनारे हैं: - एक माँ कालरात्रि जो अति भयावह, प्रलय के समान है, और दूसरा माँ महागौरी जो अति सौन्दर्यवान, देदीप्यमान, शांत है - पूर्णत: करुणामयी, सबको आशीर्वाद देती हुईं। यह वो रूप है, जो सब मनोकामनाओं को पूरा करता है।क्यों है,देवियों के नौ रूप? ⚜यह भौतिक नहीं, बल्कि लोक से परे आलौकिक रूप है, सूक्ष्म तरह से, सूक्ष्म रूप। इसकी अनुभूति के लिये पहला कदम ध्यान में बैठना है। ध्यान में आप ब्रह्मांड को अनुभव करते हैं। इसीलिये बुद्ध ने कहा है, आप बस देवियों के विषय में बात ही करते हैं, जरा बैठिये और ध्यान करिये। ईश्वर के विषय में न सोचिये। *⚜शून्यता में जाईये, अपने भीतर। एक बार आप वहां पहुँच गये, तो अगला कदम वो है, जहां आपको सभी विभिन्न मन्त्र, विभिन्न शक्तियाँ दिखाई देंगी, वो सभी जागृत होंगी।* ⚜बौद्ध मत में भी, वे इन सभी देवियों का पूजन करते हैं। इसलिये, यदि आप ध्यान कर रहे हैं, तो सभी यज्ञ, सभी पूजन अधिक प्रभावी हो जायेंगे। नहीं तो उनका इतना प्रभाव नहीं होगा। यह ऐसे ही है, जैसे कि आप नल तो खोलते हैं, परन्तु गिलास कहीं और रखते हैं, नल के नीचे नहीं। पानी तो आता है, पर आपका गिलास खाली ही रह जाता है। या फिर आप अपने गिलास को उलटा पकड़े रहते हैं। 10 मिनट के बाद भी आप इसे हटायेंगे, तो इसमें पानी नहीं होगा। क्योंकि आपने इसे ठीक प्रकार से नहीं पकड़ा है। ⚜सभी पूजा, ध्यान के साथ शुरू होती हैं,और हजारों वर्षों से इसी परम्परा या प्रथा का अनुसरण किया जाता है। ⚜ऐसा,पवित्र-आत्मा के सभी विविध तत्वों को जागृत करने के लिये, उनका आह्वान करने के लिये किया जाता है। हमारे भीतर एक आत्मा है। उस आत्मा की कई विविधताएँ हैं, जिनके कई नाम, कई सूक्ष्म रूप हैं,और नवरात्रि इन्हीं सब से जुड़ी है। ⚜इन सभी तत्वों का इस धरती पर आह्वान,जागरण और पूजन करना,यही नवरात्रि पर्व का ध्येय है। *🔱ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:🔱* के जाप से आप माँ दुर्गा के आठवें स्वरुप माँ महागौरी की पूजा कर सकते हैं । ‼️नवरात्रि की अष्टमी को पहनें गुलाबी रंग के कपड़े ‼️ ‼️ *जय माता महागौरी रानी दी*‼️ 🔱सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके! शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते!!🔱 🌟शुभ प्रभात वंदना जी🌟 ⚛🦢 महागौरी माता रानी के आशीर्वाद से आप और आपका परिवार हमेशा खुश रहे,स्वस्थ रहें,मस्त रहें और आपकी सभी मनोकामनाएं और इच्छाएं पूरन हो 🦢 ⚛ जय मां अम्बे जय जय जगदम्बे 🙏🌹🙏 🔱 *जय माता रानी दी*🔱 *🔱जयकारा शेरांवाली दा* *बोलो सच्चे दरबार की जय...🔱* 🕉🔱👣🙏🌼🙏🌼👣🔱🕉

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Ravi Kumar Taneja Oct 12, 2021

🕉🔱👣जय श्री माँ दुर्गा👣🔱🕉 🕉🔱👣मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है👣🔱🕉 🔱माँ का यह स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है किन्तु सदैव शुभ फलदायक है। अतः भक्तों को इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए । देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है। 🔱संसार में कालो का नाश करने वाली देवी कालरात्री ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है l 🔱दुर्गा सप्तशती के प्रधानिक रहस्य में बताया गया है कि जब देवी ने इस सृष्टि का निर्माण शुरू किया और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का प्रकटीकरण हुआ उससे पहले देवी ने अपने स्वरूप से तीन महादेवीयों को उत्पन्न किया। 🔱सर्वेश्वरी महालक्ष्मी ने ब्रह्माण्ड को अंधकारमय और तामसी गुणों से भरा हुआ देखकर सबसे पहले तमसी रूप में जिस देवी को उत्पन्न किया वह देवी ही कालरात्रि हैं। देवी कालरात्रि ही अपने गुण और कर्मों द्वारा महामाया, महामारी, महाकाली, क्षुधा, तृषा, निद्रा, तृष्णा, एकवीरा, एवं दुरत्यया कहलाती हैं। 🔱जय माँ कालरात्रि माता🔱 ‼️दुर्भाग्य नाशक उपाय‼️ आज एक माला :- 🌷ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ कालरात्रि देव्यै नम: 🌷 और एक माला 🌷ॐ शं शनैश्चराय नम:🌷 की जाप करें। माता रानी की कृपा से आपकी संपूर्ण मनोकामनाएं पूरी होगी, तथा सुख और सौभाग्य में वृद्घि होगी🙏🌹🙏 🕉🔱👣माँ कालरात्रि की आरती👣🔱🕉 ⚘कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतार॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें। महाकाली माँ जिसे बचाबे॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥ 🕉🔱👣🙏🌷🙏👣🔱🕉 🌷👣माँ दुर्गा की आरती👣🌷 🌷जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ ॐ जय…🙏🌷🙏 🕉🔱👣🙏💥🙏👣🔱🕉

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