Rama Devi Sahu Aug 19, 2022

Dt.19.08.2022.( Friday ) Good Morning Everyone ❤️ 🙏‼️🙏‼️🙏‼️🙏‼️🙏*अधर्म की वृद्धि के कारण जब, जिस समय भगवान अपना प्रकट होना आवश्यक समझते हैं, तभी प्रकट हो जाते हैं।* ईश्वर प्रेमी, धार्मिक, सदाचारी मनुष्यों, निरपराधी, निर्बल आदि प्राणियों पर जब बलवान व दुराचारी मनुष्यों का अत्याचार बढ़ जाता है तथा दुर्गुण एवं दुराचार का अधिक फैलाव होता है, दुराचारों में वृद्धि हो जाती है, उसी समय भगवान अवतार लेते हैं। साधुओं के परित्राण, दुष्टों का संहार और धर्म की स्थापना- इन तीनों की एक साथ आवश्यकता होने पर भगवान् का अवतार होता है। भगवान् विष्णु के चौबीस अवतारों में से मुख्य एक हैं : “भगवान श्रीकृष्ण।” भगवान् कृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि के समय हुआ था। उन्हीं के जन्म एवं प्राकाट्‌य दिवस को ‘जन्माष्टमी’ पर्व के रूप में सनातन धर्म समाज द्वारा अत्यन्त उल्लास एवं श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाता है। वैष्णव धर्म के उपासक, कृष्णोपासक भगवान् कृष्ण के इस जन्मोत्सव को कृष्णपक्ष की अष्टमी को उनकी पूजा-उपासना के साथ मनाते हैं। कृष्ण के बालस्वरूप की आराधना-उपासना के अन्तर्गत उनके ईश्वरीय स्वरूप का चिन्तन-मनन किया जाता है। बाल कृष्ण की विभिन्न बाल-लीलाओं को आधार बनाकर नाटक, परिसंवाद या नृत्य तथा आकर्षक प्रदशर्नियों एवं झांकियों द्वारा असीम श्रद्धा-भाव के साथ यह त्योहार मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी का महत्त्व: कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार सनातनियों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक महत्त्व रखता है । *भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र एवं जीवन से हमें विविध दर्शन एवं ज्ञान का बोध होता है। इनमें वे योगी हैं, प्रेमी हैं, तपस्वी हैं, महान् पुरुषार्थी हैं, कर्मवादी हैं, दार्शनिक हैं, प्रजापालक हैं, नेतृत्व करने वाले मित्र-सखा हैं, अवतारी पुरुष हैं, लीलाधारी हैं, मनुजधर्मी हैं, लोकरंजक हैं, लोक-संस्थापक हैं, धर्म-संस्थापक हैं, साधुओं के रक्षक हैं, दुष्कर्मो का नाश करने वाले हैं।* उनका जीवन सम्पूर्ण मानव-समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के समय श्रद्धालु उनके इन्हीं सभी रूपों की उपासना करते हैं । जन्माष्टमी मनाने के विषय में श्रीमद्‌भागवत पुराण की कथा के अनुसार द्वापर युग में मथुरा का राजा कंस था, जो कि बहुत ही अत्याचारी और निर्दयी शासक था। अपनी बहिन देवकी से वह पहले तो बहुत प्रेम करता था, किन्तु जब उसने आकाशवाणी सुनी कि बहिन देवकी की आठवीं सन्तान उसकी मृत्यु का कारण बनेगी, तो कंस देवकी का वध करने को उद्यत हो गया । वसुदेव ने कंस को आश्वासन दिया कि जब उनकी आठवीं सन्तान होगी, तब वह उन्हें बन्दी बना ले । जो भी सन्तान होगी, उसे वे कंस को सौंप देंगे । इस आश्वासन के बाद भी कंस ने देवकी और वसुदेव को कैद में डाल दिया । इसके बाद एक-एक कर उनकी सातों सन्तानों को बड़ी ही निर्दयता से मार डाला । आठवीं सन्तान श्रीकृष्ण के प्रकट होते ही रातों-रात कारागृह के द्वार अपने आप खुल गये। वर्षाकाल में यमुना का चढ़ा हुआ जलस्तर उतर गया। वसुदेव शिशु कृष्ण को नन्दग्राम नन्दबाबा और यशोदा के यहां छोड़ आये। यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया। कालान्तर में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और वे मथुराधीश बने। यशोदा के यहां पालित-पोषित बाल कृष्ण ने अनेक लीलाएं कीं। उन्होंने अपने चमत्कार से पूरे गोकुलवासियों को मोहित कर रखा था। समूचा गोकुल ग्राम कृष्ण जी का भक्त था। श्रीकृष्ण जहां गायों को चराने जाते थे, वहीं अपनी बांसुरी के मधुर स्वर से सभी को मोहित कर देते थे। कृष्ण ने बचपन में कालिया नाग का मर्दन किया, पूतना का वध किया, चामुर-मुष्ठिर जैसे राक्षसों को मारा। जरासंध का वध किया, कंस के अत्याचार से पीड़ित मथुरा की प्रजा को मुक्ति दिलायी । वहीं राधारानी एवं गोपियों के साथ रास-लीलाएं कीं, माता यशोदा और नन्द बाबा को अपनी बाल-लीलाओं, माखन चोरी आदि से लुभाया। वे अपने हर रूप में लोकरंजनकारी, लोकहितकारी, लोकनायक की छवि में सामने आते रहे। महाभारत के समय धर्म और अधर्म के बीच हुए युद्ध में उन्होंने पाण्डवों का साथ दिया। अर्जुन को कर्म का सन्देश दिया। आत्मा एवं परमात्मा के रहस्य को समझाया। योगयोगेश्वर रूप में अपने मित्र ‘उद्धव’ के ज्ञान के गर्व को नष्ट किया। ‘सुदामा’ जैसे दरिद्र मित्र के साथ मित्र-धर्म निभाया। ब्रजवासियों को इन्द्र पूजन के स्थान पर गिरिधर की पूजा करने का सन्देश देकर परम्पराभजक का कार्य किया। वे सभी रूपों में जन को प्रिय थे। उनका यह रूप लोकप्रियता की असीम सीमा तक पहुंचता है। उनके भक्त देश में ही नहीं, विदेशों में भी हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। - ईश्वर सत्य है - 🚩 राधे राधे 🙏 जय श्री कृष्ण 🚩

+5 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 53 शेयर