Prem Aug 17, 2022

*_🚩 (((( हनुमान जी की शक्ति ))))जय जय श्री सीताराम 🚩_* """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""" _रामायण के अनुसार बाली को उसके धर्मपिता इंद्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ था।_ _इसी हार की शक्ति के कारण *बाली लगभग अजेय* था। उसने कई युद्ध लड़े और सभी में वह जीता।_ _इस स्वर्ण हार को *ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त* करके यह वरदान दिया था,कि इसको पहनकर बाली जब भी रणभूमि में अपने शत्रु का सामना करेगा,तो उसके शत्रु की आधी शक्ति क्षीण हो जाएगी।और यह *आधी शक्ति बाली को प्राप्त* हो जाएगी।_ _*यही बाली की शक्ति का राज था।*_ _बाली को इस बात का घमंड था,कि उसे विश्व में कोई हरा नहीं सकता, या कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता।_ _एक दिन की बात है *रामभक्त हनुमान वन में तपस्या* कर रहे थे।_ _उस दौरान अपनी ताकत के नशे में चूर बाली लोगों को धमकाता हुआ, वन में पहुंचा और चिल्लाने लगा कि कौन है जो मुझे हरा सकता है? किसी ने *मां का दूध पिया* है जो मुझसे मुकाबला करे।_ _हनुमानजी उसी *वन में राम नाम जप से तपस्या* कर रहे थे। बाली के चिल्लाने से उनकी तपस्या में विघ्न हो रहा था।_ _उन्होंने बाली से कहा, वानर राज आप अति-बलशाली हैं,आपको कोई नहीं हरा सकता, लेकिन आप इस तरह चिल्ला क्यों रहे हैं?_ _यह सुनकर बाली भड़क गया। उसने हनुमान जी को चुनौती दी,और यहां तक कहां की रे वानर! तू *जिसकी भक्ति* करता है,मैं *उसे भी हरा* सकता हूं।_ _अपने *आराध्य प्रभु श्रीराम* का मजाक उड़ता देख हनुमान को *क्रोध* आ गया है और उन्होंने बाली की चुनौती स्वीकार कर ली।_ _तय हुआ कि अगले दिन सूर्योदय होते ही दोनों के बीच दंगल होगा।_ _अगले दिन हनुमान तैयार होकर दंगल के लिए निकले ही थे, कि *ब्रह्माजी* उनके समक्ष प्रकट हुए।_ _उन्होंने हनुमान को समझाने की कोशिश की कि वे बाली की चुनौती स्वीकार न करे। लेकिन हनुमानजी ने कहा कि उसने मेरे *प्रभु श्रीराम* को चुनौती दी है।_ _ऐसे में अब यदि मैं उसकी चुतौती को अस्वीकार कर दूंगा, तो दुनिया क्या समझेगी। इसलिए उसे तो सबक सिखाना ही होगा।_ _यह सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- ठीक है! आप दंगल के लिए जाओ,लेकिन अपनी शक्ति का *10वां हिस्सा* ही लेकर जाओ, *शेष अपने आराध्य* के चरणों में समर्पित कर दो।_ _*दंगल से लौटकर यह शक्ति फिर हासिल कर लेना।*_ _यह सुनकर हनुमानजी मान गए,और अपनी कुल शक्ति का *10वां हिस्सा* लेकर बाली से दंगल करने के लिए चल पड़े।_ _दंगल के मैदान में हनुमानजी ने जैसे ही बाली के सामने अपना कदम रखा,ब्रह्माजी के वरदान के अनुसार,हनुमानजी की शक्ति का आधा हिस्सा बाली के शरीर में समाने लगा।_ _इससे बाली के शरीर में उसे अपार शक्ति का अहसास होने लगा। उसे लगा जैसे ताकत का कोई समंदर शरीर में हिलोरे ले रहा हो।_ _चंद पलों के बाद बाली को लगने लगा मानो उसके शरीर की नसें फटने वाली है,और रक्त बाहर निकलने ही वाला है।_ _तभी अचानक ही वहां *ब्रह्माजी* प्रकट हुए और उन्होंने बाली से कहा कि खुद को जिंदा रखना चाहते हो तो तुरंत ही हनुमान से कोसों दूर भाग जाओ, अन्यथा तुम्हारा शरीर फट जाएगा।_ _बाली को कुछ समझ में नहीं आया,लेकिन वह ब्रह्माजी को यूं प्रकट देखकर समझ गया,कि कुछ गड़बड़ है। और वह वहां से तुरंत ही भाग खड़ा हुआ।_ _बहुत दूर जाने के बाद उसे राहत मिली। शरीर में हल्कापन लगने लगा। तब उसने देखा की *ब्रह्माजी* उसके समक्ष खड़े हैं।_ _तब ब्रह्माजी ने कहा कि तुम खुद को दुनिया में सबसे शक्तिशाली समझते हो, लेकिन तुम्हारा शरीर हनुमान की शक्ति का छोटा-सा हिस्सा भी नहीं संभाल पा रहा था।_ _तुम्हें में बताना चाहता हूं, कि हनुमान अपनी शक्ति का *10 वां भाग* ही लेकर तुमसे लड़ने आये थे। सोचो यदि संपूर्ण भाग लेकर आते तो क्या होता?_ _बाली यह जानकर समझ गया, कि मैंने बहुत बड़ी भूल की थी।_ _बाद में बाली ने हनुमान जी को दंडवत प्रणाम किया और बोला:- अथाह बल होते हुए भी हनुमानजी आप शांत रहते हैं ,और रामभजन गाते रहते हैं। और एक मैं हूं जो आपके एक बाल के बराबर भी नही हूँ ,और आपको ललकार रहा था। मुझे क्षमा करें हनुमान!_ _इस प्रकार *वीर भक्त हनुमान जी* ने बाली का घमंड तोड़ दिया।_ *_((((( जय जय श्री राधे )))))_*

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Prem Aug 16, 2022

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Prem Aug 13, 2022

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Prem Aug 9, 2022

*वृंदावन की मालकिन श्रीमति राधारानी....* ऐसा माना जाता है, कि सभी तीर्थों का राजा "प्रयागराज" है। एक बार "प्रयागराज" के मन में ऐसा विचार आया, कि सभी तीर्थ मेरे पास आते है, केवल वृन्दावन मेरे पास नही आता.... प्रयागराज वैकुण्ठ में गए और प्रभु से पूछा.... प्रभु, आपने मुझे तीर्थों का राजा बनाया, लेकिन वृंदावन मुझे टैक्स देने नहीं आते ?? भगवान बहुत हंसे और हंसकर बोले.... हे "प्रयाग" मैंने तुझे केवल तीर्थो का राजा बनाया, मेरे घर का राजा नहीं बनाया। बृज वृन्दावन कोई तीर्थ नही है,वो मेरा घर है.... और घर का कोई मालिक नही होता.... घर की मालकिन होती है !!!! वृन्दावन की अधीश्वरी श्रीमती राधारानी है और राधारानी की कृपा के बिना बृज में प्रवेश नहीं हो सकता.... कर्म के कारण हम शरीर से बृज में नहीं जा सकते, लेकिन मन ही मन में हम सब बृज वृन्दावन में वास कर सकते है.... भगवान कहते है.... शरीर से बृज में जाना.... इससे वह करोड़ों गुना बेहतर है, कि मन से ब्रज वृन्दावन में वास करना इसीलिए भगवान कहते है.... राधे मेरी स्वामनी, मै राधे को दास जन्म जन्म मोहे दीजियो श्री बृंदावन वास, श्री चरणो में वास ! *राधा रानी की जय*🌼🌼🚩🚩🙏🙏

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Prem Aug 8, 2022

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Prem Aug 7, 2022

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Prem Jul 31, 2022

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Prem Jul 30, 2022

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