PRABHAT KUMAR Dec 8, 2021

🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *।। #ऊँ_गं_गणपतेय_नमः ।।* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_नमस्कार_शुभ_रात्री* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *शिवपुराण के अनुसार ये कथा माता पार्वती ने अपने शरीर पर हल्दी लगाई थी, इसके बाद जब उन्होंने अपने शरीर से हल्दी उबटन उतारी तो उससे उन्होंने एक पुतला बना दिया। उस हल्दी उबटन के पुतले में फिर उन्होंने प्राण डाल दिए और जीवन दे दिया। इस तरह से विनायक का जन्म हुआ। इसके बाद माता पार्वती ने गणेश को आदेश दिया कि तुम मेरे स्नान कक्ष के द्वार पर बैठ जाओ और दरबानी करो, तुम्हें आदेश है कि किसी को भी अंदर आने मत देना।* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *शिवजी घर आए तो उन्होंने कहा कि मुझे पार्वती से मिलना है। इस पर गणेश जी ने मना कर दिया और उन्हें अंदर जाने से रोका। शिवजी को उनके बारे में कोई आभास नहीं था। दोनों में विवाद हुआ और विवाद युद्ध में बदल गया। गुस्से में शिवजी ने अपना त्रिशूल निकाला और गणेश का सिर काट डाला।* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *पार्वती सूचना मिली तो वे बाहर आईं और रोते-रोते बताने लगीं कि उन्होंने आपने ही बेटा का सिर काट दिया। शिवजी ने पूछा कि ये हमारा बेटा कैसे हो सकता है? इसके बाद पार्वती ने शिवजी को पूरी कहानी बताई। शिवजी ने पार्वती को मनाते हुए कहा कि ठीक है मैं इसमें प्राण डाल देता हूं, लेकिन प्राण डालने के लिए एक सिर चाहिए। इस पर उन्होंने गरूड़ जी से कहा कि उत्तर दिशा में जाएं और वहां जो भी मां अपने बच्चे की तरफ पीठ कर के सोई हो उस बच्चे का सिर ले आएं।* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🔮🔮🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *गरूड़ जी भटकते रहे पर उन्हें ऐसी कोई मां नहीं मिली क्योंकि हर मां अपने बच्चे की तरफ मुंह कर के सोती है। अंतत: एक हथिनी दिखाई दी। हथिनी का शरीर का प्रकार ऐसा होता हैं कि वह बच्चे की तरफ मुंह कर के नहीं सो सकती है। गरूड़ जी उस शिशु हाथी का सिर ले आए। भगवान शिवजी ने वह बालक के शरीर से जोड़ दिया। उसमें प्राणों का संचार कर दिया। उनका नामकरण कर दिया। इस तरह श्रीगणेश को हाथी का सिर लगा।* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *#श्री_गणेश_श्लोक* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#वक्रतुण्ड_महाकाय_सूर्य_कोटि_समप्रभ।* *#निर्विघ्नं_कुरुमे_देव_सर्वकार्येषु_सर्वदा।* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *अर्थात् * 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *हे मंगलमूर्ति गणेश, आपकी मुड़ी हुई सूंढ है और बड़ा शरीर है। करोड़ों सूर्य के प्रकाश जैसा आपका तेज है। हे गणपति, मेरे हर एक कार्य में आनेवाले सारे विघ्नों को हमेशा के लिए दूर करो।* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿 *#नोट उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿

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PRABHAT KUMAR Dec 7, 2021

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 💥💥 *। #जय_श्री_राम_जय_जय_महावीर_हनुमान।* 💥💥 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *🌜 मधुर सपनों के साथ शुभ रात्रि प्रिय आदरणीय साथियों 🌛* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *#हनुमान_पुराण की कथा के अनुसार #केसरी_राज के साथ विवाह करने के बाद भी कई सालो तक #अंजना को पुत्र सुख की प्राप्ति नही हुई | वह #मंतग_मुनि के पास जाकर पुत्र प्राप्ति का मार्ग पूछने लगी | ऋषि ने बताया की वृषभाचल पर्वत पर #भगवान_वेंकटेश्वर की पूजा अर्चना और तपस्या करो | फिर गंगा तट पर स्नान करके #वायु_देव को प्रसन्न करो | तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी |* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *मुनि के बताये मार्ग के अनुसार पुत्र की कामना में #अंजना ने सभी तप पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और धैर्य से किये और #वायु_देव को प्रसन्न करने में सफल रही |#वायु_देव ने उन्हें दर्शन देकर आशीष दिया की उनका ही रूप उनके पुत्र के रूप में अवतरित होगा |* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *एक बार अति सुन्दर रूपवती अंजना पुष्पों की फुलवारी के बीच खेल रही थी | तभी अचानक तेज हवा के झोंके ने उनके वस्त्र खिसका दिए | उन्हें अनुभव हुआ की कोई उनके अंगो को स्पर्श कर रहा है | #अंजना क्रोधित हो गयी तभी #पवन_देव प्रकट हुए | उन्होंने बताया की वे अव्यक्त रूप से मानसिक संकल्प द्वारा उसे पुत्र प्रदान कर रहे है | इस तरह माँ #अंजना गर्भवती हो गयी और उन्होंने #हनुमान के रूप में महाशक्तिशाली पुत्र को जन्म दिया |* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *इसी कारण #हनुमान को #पवनपुत्र , #केसरीनंदन आदि नामो से जाना जाता है |* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

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PRABHAT KUMAR Dec 6, 2021

🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🌙🌙🌙 *#हर_हर_महादेव_ॐ_नमः_शिवाय* 🌙🌙🌙 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *🌜 मधुर सपनों के साथ शुभ रात्रि प्रिय आदरणीय साथियों 🌛* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *पुराणों में शिव का नाम ‘रुद्र’ रूप में आया है। रुद्र संहार के देवता और कल्याणकारी हैं ,, विष्णु की भांति शिव के भी अनेक अवतारों का वर्णन पुराणों में प्राप्त होता है।शिव की महत्ता पुराणों के अन्य सभी देवताओं में सर्वाधिक है।* *जटाजूटधारी, भस्म भभूत शरीर पर लगाए, गले में नाग, रुद्राक्ष की मालाएं, जटाओं में चंद्र ,गंगा की धारा, हाथ में त्रिशूल एवं कटि में बाघम्बर और नंगे पांव रहने वाले शिव कैलास धाम में निवास करते हैं,,पार्वती उनकी पत्नी अथवा शक्त्ति है। गणेश और कार्तिकेय के वे पिता हैं।* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *शिव भक्त्तों के उद्धार के लिए वे स्वयं दौड़े चले आते हैं। सुर-असुर और नर-नारी—वे सभी के अराध्य हैं।शिव की पहली पत्नी राजा दक्षराज की पुत्री थी, जो दक्षयज्ञ में आत्मदाह कर चुकी थी। उन्हे अपने पिता द्वारा शिव का अपमान सहन नहीं हुआ था। इसी से उन्होने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।'सती' शिव की शक्त्ति थी। सती के पिता दक्षराज शिव को पसंद नहीं करते थे। उनकी वेशभूषा और उनके गण सदैव उन्हें भयभीत करते रहते थे। एक बार दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया और शिव का अपमान करने के लिये शिव को निमन्त्रण नहीं भेजा। सती बिना बुलाए पिता के यज्ञ में गई। वहां उसे अपमानित होना पड़ा और अपने जीवन का मोह छोड़ना पड़ा। उसने आत्मदाह कर लिया। जब शिव ने सती दाह का समाचार सुना तो वे शोक विह्वल होकर क्रोध में भर उठे। अपने गणों के साथ जाकर उन्होंने दक्ष-यज्ञ विध्वंस कर दिया। वे सती का शव लेकर इधर-उधर भटकने लगे। तब ब्रह्माजी के आग्रह पर विष्णु ने सती के शव को काट-काटकर धरती पर गिराना शुरू किया। वे शव-अंग जहां-जहां गिरे, वहां तीर्थ बन गए। इस प्रकार शव-मोह से शिव मुक्त्त हुए।बाद में तारकासुर के वध के लिए शिव का विवाह हिमालय पुत्री उमा (पार्वती) से कराया गया। परन्तु शिव के मन में काम-भावना नहीं उत्पन्न हो सकी। तब कामदेव को उनकी समाधि भंग करने के लिए भेजा गया। परंतु शिव ने कामदेव को ही भस्म कर दिया। बहुत बाद में देवगण शिव पुत्र—गणपति और कार्तिकेय को पाने में सफल हुए तथा तारकासुर का वध हो सका।शिव के सर्वाधिक प्रसिद्ध अवतारों में अर्द्धनारीश्वर अवतार का उल्लेख मिलता है। ब्रह्मा ने सृष्टि विकास के लिए इसी अवतार से संकेत पाकर मैथुनी-सृष्टि का शुभारम्भ कराया था।* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *शिव पुराण में शिव के भी दशावतारों का वर्णन मिलता है, उनमें महाकाल, तारा, भुवनेश, षोडश, भैरव, छिन्नमस्तक गिरिजा , धूम्रवान, बगलामुखी, मातंग और कमल नामक अवतार हैं । भगवान शंकर के ये दसों अवतार तन्त्र शास्त्र से सम्बन्धित हैं। ये अद्भुत शक्त्तियों को धारण करने वाले हैं।* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *शिव के अन्य ग्यारह अवतारों में कपाली , पिंगल , भीम , विरुपाक्ष , विलोहित , शास्ता , अजपाद , आपिर्बुध्य , शम्भु , चण्ड तथा भव का उल्लेख मिलता है। ये सभी सुख देने वाले शिव रूप हैं , दैत्यों के संहारक और देवताओं के रक्षक हैं। इन अवतारों के अतिरिक्त्त शिव के दुर्वासा , हनुमान , महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ , द्विजेश्वर , हंसरूप , अवधूतेश्वर , भिक्षुवर्य , सुरेश्वर , ब्रह्मचारी , सुनटनतर्क , द्विज ,अश्वत्थामा , किरात और नतेश्वर आदि अवतारों का उल्लेख भी 'शिव पुराण' में हुआ है।* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *शिव के बारह ज्योतिर्लिंग भी अवतारों की ही श्रेणी में आते हैं! ये बारह ज्योतिर्लिंग हैं* *सौराष्ट्र में ‘सोमनाथ*’, *श्रीशैल में ‘मल्लिकार्जुन*’, *उज्जयिनी में ‘महाकालेश्वर*’, *ओंकार में ‘अम्लेश्वर / ओंकारेश्वर*’, *हिमालय में ‘केदारनाथ*’, *डाकिनी में ‘भीमेश्वर*’, *काशी में ‘विश्वनाथ*’, *गोमती तट पर ‘त्र्यम्बकेश्वर*’, *चिताभूमि में ‘वैद्यनाथ*’, *दारुक वन में ‘नागेश्वर*’, *सेतुबन्ध में ‘रामेश्वर’ और* *शिवालय में ‘घुश्मेश्वर’।* *अन्य देवगण* *पुराणों में ब्रह्मा, वरुण, कुबेर, वायु, सूर्य, यमराज, अग्नि, मरुत, चन्द्र, नर-नारायण आदि देवताओं के अवतारों का वर्णन बहुत कम संख्या में है उनके प्रसंग प्रायः इन्द्र के साथ ही आते हैं।* *#द्वादश_ज्योतिर्लिंगों_की_महिमा* *भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग भागों में स्थित हैं। इन्हें बारह ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। शिवपुराण में इन ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। इनके दर्शन मात्र से सभी तीर्थों का फल प्राप्त होता है।* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

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PRABHAT KUMAR Dec 5, 2021

💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢 *#ऊँ_सूर्य_देवाय_नमः* 💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *सभी आदरणीय साथियों को रात्रि कालीन वंदन* 🙏🙏🙏 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *आज बड़ा इतवार या बड़ा रविवार का दिन है, आज के दिन भगवान सूर्य की उपासना व पूजा विधा है। भाद्र मास के शुक्ल पक्ष में बड़ा इतवार पर रविवार को सूर्य देव के भक्त प्रात: काल स्नान-ध्यान कर व्रत का अनुष्ठान करते हैं। भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देकर जल अर्पण कर हवन-पूजन होती है।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *हिन्दू धर्म के परम्परा अनुसार देवी-देवताओं की आराधना के लिए आज के पर्व व त्यौहार का विशेष महत्व है। अपनी किरणों से जगत में उजियारा कर रश्मियों से चैतन्यता, शक्ति व ऊर्जा का संचार करने वाले भगवान सूर्य की पूजा का अत्यन्त महात्म्य है। वृहद रविवार को श्रद्धालुओं द्वारा व्रत अनुष्ठान की परम्परा सदियों से चली आ रही है। इस मौके भगवान का ध्यान कर मंत्र जाप व हवन-पूजन किया जाता है। इस मौके पर नदियों में डुबकियां लगाकर पुरोहितों को दान देने कर परंपरा है। जिसकी तैयारियां उत्साह से की जा रही है। आचार्य गौरीशंकर शास्त्री के अनुसार शनिवार को आज दिन व रात-बराबर समय के होंगे। जिसका खगोल शास्त्र में व्यापक वर्णन है।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#बड़े_इतवार_की_पूजा_विधि,* *#बड़े_रविवार_की_पूजा_विधि* *1 – सुबह सूर्योदय से पहले ही उठकर स्नान करें। अगर संभव हो तो घर पर पानी में गंगाजल डालकर नहाएं।* *2 – फिर आप भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।* *3 – सूर्य देव को जल चढ़ाते समय सूर्य के वरूण रूप को प्रणाम करते हुए ऊं रवये नम: मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना करना चाहिए।* *4 – भगवान सूर्य देव को जल चढ़ाने के बाद धूप, दीप से सूर्यदेव का पूजन करें। सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन का दान करें।* *5 – अपनी क्षमता और श्रद्धानुसार इन में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#भगवान_सूर्य_देव_को_प्रसन्न_करने_के_उपाय* *1 – सुबह – सुबह सूर्योदय के समय लाल फूल, और कुंकुम से सूर्यदेव की पूजा करें। लाल वस्त्र भी अर्पित करें।* *2 – किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक रत्न तांबे की अंगूठी में अपनी अनामिका अंगुली में धारण करें।* *3 – जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ के अनुसार गेहूं का दान करें। इससे भी सूर्य के दोष कम होते हैं।* *4 – लाल चंदन की माला से सूर्य देव के मन्त्र ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। यह जाप कम से कम 5 बार करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢

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PRABHAT KUMAR Dec 4, 2021

🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️ *#जय_श्री_शनिदेव_महाराज* 🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_शुभ_रात्रि_कालीन_वंदन* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *बड़ा चमत्कारी है ये तेल। तेल के बारह अचूक उपाय जो बदल दें आपका भाग्य, जरूर करें ?* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *तेल शनि से संबंधित पदार्थ है। तेल का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। तेल के कई फायदे भी हैं और नुकसान भी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *चमेली का तेल: को हर मंगलवार या शनिवार को सिन्दूर और चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए। नियमित रूप से हनुमानजी को धूप-अगरबत्ती लगाना चाहिए। हार-फूल अर्पित करना चाहिए। हनुमानजी को चमेली के तेल का दीपक नहीं लगाया जाता बल्कि तेल उनके शरीर पर लगाया जाता है। ऐसा करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *सरसों का तेल: एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपनी छाया देखकर उसे शनिवार के दिन शाम को शनिदेव के मंदिर में रख आएं। इसके अलावा आप अलग से शनिदेव को तेल चढ़ा भी सकते हैं। इस उपाय से आपके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *तिल का तेल: तिल के तेल का दीपक 41 दिन लगातार पीपल के नीचे प्रज्वलित करने से असाध्य रोगों में अभूतपूर्व लाभ मिलता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है। भिन्न-भिन्न साधनाओं व सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए भी पीपल के नीचे दीपक प्रज्वलित किए जाने का विधान है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *शारीरिक कष्ट दूर करने के लिए: शनिवार को सवा किलो आलू व बैंगन की सब्जी सरसों के तेल में बनाएं। उतनी ही पूरियां सरसों के तेल में बनाकर अंधे, लंगड़े व गरीब लोगों को यह भोजन खिलाएं। ऐसा कम से कम 3 शनिवार करेंगे तो शारीरिक कष्‍ट दूर हो जाएगा।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाने का टोटका: सरसों के तेल में सिंके गेहूं के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के फूल, सिन्दूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात में किसी चौराहे पर रखकर कहें- ‘हे मेरे दुर्भाग्य, तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूं, कृपा करके मेरा पीछा ना करना।’ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *धन-समृद्धि हेतु: कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *सुख-शां‍ति हेतु: खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए किसी भी आश्रम में कुछ आटा और सरसों का तेल दान करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *नया घर चाहिए तो करें ये उपाय: शमी के पौधे के पास लोहे के दीये में तिल के तेल में सरसों का तेल मिलाकर काले धागे की बत्ती जलाएं। दीये का मुख 4 दिशाओं और 4 कोणों सहित आठों दिशाओं में करें। फिर दीये को जल में प्रवाहित कर दें। यह कार्य 27 शनिवार तक करेंगे तो निश्चित ही आप नए घर में प्रवेश कर जाएंगे।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *शराब छुड़वाने का टोटका: एक शराब की बोतल किसी शनिवार को शराब पीने वाले के सो जाने के बाद उसके ऊपर से 21 बार वार लें। फिर उस बोतल के साथ किसी अन्य बोतल में 800 ग्राम सरसों का तेल लेकर आपस में मिला लें और किसी बहते हुए पानी के किनारे में उल्टा गाड़ दें जिससे बोतलों के ऊपर से जल बहता रहे। यह उपाय किसी योग्य गुरु से पूछकर ही करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *मंदी से छुटकारा पाने के लिए: अगर आपके व्यापार या नौकरी में मंदी का दौर चल रहा है तो आप किसी साफ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा। व्यापार या नौकरी में उन्नति होती रहेगी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *रोग के कारण किसी के मरने की आशंका हो तो: गुड़ को तेल में मिश्रित करके जिस व्यक्ति के मरने की आशंका हो, उसके सिर पर से 7 बार उतारकर मंगलवार या शनिवार को भैंस को खिला दें। ऐसा कम से कम 5 मंगलवार या शनिवार को करें। यह उपाय भी किसी योग्य गुरु से पूछकर ही करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *मनोकामना तुरंत पूर्ण होती: पीपल के नीचे सरसों तेल का दीपक लगातार 41 शनिवार तक प्रज्वलित करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔

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PRABHAT KUMAR Dec 3, 2021

🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 * #जय__माता__दी* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 *सभी आदरणीय साथियों को मंगलमय शुभकामनाओं के साथ शुभ रात्रि* 🙏 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना तथा जीवन शक्ति संसार में जहां कहीं भी दिखाई देती है, वहां देवी का ही दर्शन होता है। ऋषियों की विश्व दृष्टि तो सर्वत्र विश्वरूपा देवी को ही देखती है, इसलिए माता दुर्गा ही महाकाली महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *श्रीमद्भागवत में लिखा है कि देवी ही भगवान ब्रह्मा भगवान विष्णु और भगवान महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं। देवी सारी सृष्टि को उत्पन्न तथा नाश करने वाली परम शक्ति है। देवी ही पुण्यात्माओं की समृद्धि एवं पापाचारियों की दरिद्रता है। जगन्माता दुर्गा सुकृती मनुष्यों के घर संपत्ति, पापियों के घर में दुर्बुद्धिरूपी अलक्ष्मी, विद्वानों के हृदय में बुद्धि व विद्या, सज्जनों में श्रद्धा व भक्ति तथा कुलीन महिलाओं में लज्जा एवं मर्यादा के रूप में निवास करती है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *मार्कंडेयपुराण कहता है कि ‘हे देवि! तुम सारे वेद-शास्त्रों का सार हो। संसाररूपी महासागर को पार कराने वाली नौका तुम हो। भगवान विष्णु के हृदय में निरंतर निवास करने वाली माता लक्ष्मी तथा शशिशेखर भगवान शंकर की महिमा बढ़ाने वाली माता गौरी भी तुम ही हो।’* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *विंध्यवासिनी धाम प्रमुख शक्तिपीठों में एक है। मार्कंडेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य में कहा गया है कि जब देव-असुर संग्राम हुआ और देवता राक्षसों से पराजित होने लगे तो वे भगवान विष्णु के पास शरणागत हुए। तब भगवान विष्णु सर्वप्रथम अपने तेज को स्वयं से अलग करते हैं, फिर सभी देवता अपना-अपना तेज भाग देते हैं और उसी से आद्यशक्ति मां प्रकट होती हैं। दार्शनिक रूप से इसे काल (समय) के अग्नि रूप में प्रदर्शित किया गया। उसका वर्ण काला, किंतु सिंदूर से आवेष्ठित है और उससे किरणें निकलती रहती हैं। वह सभी प्राणियों की स्वामिनी हैं। ब्रह्मा, विष्णु, देवतागण, दैत्य, पशु-पक्षी एवं संपूर्ण चर-अचर जगत उन्हीं के प्रभाव से संचालित होते हैं।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *मुख्य रूप से चामुंडा संहार और विनाश की अधिष्ठात्री देवी हैं। आद्यशक्ति सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के रूप में कार्य करने वाली महाशक्ति कहा गया है और त्रिदेवों की स्त्री शक्ति के रूप में भी स्मरण किया जाता है। देवी पुराण में यही शक्ति दुर्गा, उमा, शिवा देवी, ब्राह्मणी, विंध्यवासिनी, चामुंडा, शक्ति, पराशक्ति, गौरी, कात्यायनी, कौशिकी, पार्वती, नारायणी, मीना, धूमा, अंबिका, लक्ष्मी, चंडी, कपालिनी, काली, महिषासुर मर्दनी, नंदा, भवानी, तारा, वैष्णवी, महालक्ष्मी, श्वेता एवं योगेश्वरी आदि सैकड़ों नामों से जानी जाती है। सभी देवियों की मूल प्रकृति, कार्य एवं महत्व एक हैं। विंध्याचल पर्वत के मस्तक पर विराजमान होने के कारण यही आद्यशक्ति विंध्यवासिनी देवी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। यह लोकहित के लिए विंध्य क्षेत्र में महासरस्वती, महाकाली एवं महालक्ष्मी का रूप धारण करती हैं। यद्यपि बाबा भोलेनाथ को काशी बहुत प्रिय है, परंतु शक्ति की उपस्थिति के कारण विंध्य क्षेत्र भी उन्हें उतना ही प्रिय है। इसी कारण इसे छोटी काशी कहा जाता है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त किया गया है ।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁

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PRABHAT KUMAR Dec 2, 2021

🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#ऊँ_साईं_राम* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *सभी आदरणीय साथियों को रात्रि कालीन वंदन* 🙏🙏🙏 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_साईं_बाबा_मंदिर* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं की प्रसिद्धि दूर दूर तक है और यह पवित्र धार्मिक स्थल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है । यह साईं की धरती है जहां साईं ने अपने चमत्कारों से लोगों को विस्मृत किया । साईं का जीवन शिरडी में बीता जहां उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्य किए ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं की प्रसिद्धि दूर दूर तक है और यह पवित्र धार्मिक स्थल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है । यह साईं की धरती है जहां साईं ने अपने चमत्कारों से लोगों को विस्मृत किया । साईं का जीवन शिरडी में बीता जहां उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्य किए ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *उन्होंने अपने अनुयायियों को भक्ति और धर्म की शिक्षा दी । साईं के अनुयायियों में देश के बड़े-बड़े नेता, खिलाड़ी, फिल्म कलाकार, बिजनेसमैन, शिक्षाविद समेत करोड़ों लोग शामिल हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं का एक विशाल मंदिर है । मान्यता है कि, चाहे गरीब हो या अमीर साईं के दर्शन करने इनके दरबार पहुंचा कोई भी शख्स खाली हाथ नहीं लौटता है । सभी की हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_के_साईं_बाबा* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं बाबा का वास्तविक नाम, जन्मस्थान और जन्म की तारीख किसी को पता नहीं है । हालांकि साईं का जीवनकाल 1838-1918 तक माना जाता है । कई लेखकों ने साईं पर पुस्तकें लिखीं हैं । साईं पर लगभग 40 किताबें लिखी गई हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं कहां से प्रकट हुए यह कोई नहीं जानता । साईं असाधारण थे और उनकी कृपा वहां के सीधे-सादे गांववालों पर सबसे पहले बरसी । आज शिरडी एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *साईं के उपदेशों से लगता है कि इस संत का धरती पर प्रकट होना लोगों में धर्म, जाति का भेद मिटाने और शान्ति, समानता की समृद्धि के लिए हुआ था । साईं बाबा को बच्चों से बहुत स्नेह था । साईं ने सदा प्रयास किया कि लोग जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं व मुसीबतों में एक दूसरे की सहायता करें और एक दूसरे के मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार करें । इस उद्देश्य के लिए उन्हें अपनी दिव्य शक्ति का भी प्रयोग करना पड़ा ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_का_साईं_मंदिर* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं बाबा का पवित्र मंदिर साईं की समाधि के ऊपर बनाया गया है. साईं के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंदिर का निर्माण 1922 में किया गया था । साईं 16 साल की उम्र में शिरडी आए और चिरसमाधि में लीन होने तक यहीं रहे । साईं को लोग आध्यात्मिक गुरु और फकीर के रूप में भी जानते हैं । साईं के अनुयायियों में हिंदू के साथ ही मुस्लिम भी हैं । इसका कारण है कि अपने जीवनकाल के दौरान साईं मस्जिद में रहे थे जबकि उनकी समाधि को मंदिर का रूप दिया गया है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#साईं_मंदिर_में_दर्शन* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 साईं का मंदिर सुबह 4 बजे खुल जाता है. सुबह की आरती 5 बजे होती है । इसके बाद सुबह 5.40 से श्रद्धालु दर्शन करना शुरू कर देते हैं जो दिनभर चलता रहता है । इस दौरान दोपहर के वक्त 12 बजे और शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद भी आरती की जाती है । रात 10.30 बजे दिन की अंतिम आरती के बाद एक शॉल साईं की विशाल मूर्ति के चारो ओर लपेट दी जाती है और साईं को रुद्राक्ष की माला पहनाई जाती है । इसके पश्चात मूर्ति के समीप एक गिलास पानी रख दिया जाता है और फिर मच्छरदानी लगा दिया जाता है । रात 11.15 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴

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PRABHAT KUMAR Dec 1, 2021

💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢 #ऊँ_गं_गणपतेय_नमः 💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_मंगलमय_शुभ_रात्री* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। मनुष्य ही नहीं देवता भी अपने कार्यों को बिना किसी विघ्न के पूरा करने के लिए गणेश जी की अर्चना सबसे पहले करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि देवगणों ने स्वयं उनकी अग्रपूजा का विधान बनाया है।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शास्त्रों में जिक्र आता है कि भगवान शंकर त्रिपुरासुर का वध करने में जब असफल हुए, तब उन्होंने गंभीरतापूर्वक विचार किया कि आखिर उनके कार्य में विघ्न क्यों पड़ा?* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *तब महादेव को ज्ञात हुआ कि वे गणेशजी की अर्चना किए बगैर त्रिपुरासुर से युद्ध करने चले गए थे। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी का पूजन करके उन्हें लड्डुओं का भोग लगाया और दोबारा त्रिपुरासुर पर प्रहार किया, तब उनका मनोरथ पूर्ण हुआ।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता अर्थात सभी तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला बताया गया है। पुराणों में गणेशजी की भक्ति शनि सहित सारे ग्रहदोष दूर करने वाली भी बताई गई हैं।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रत्येक बुधवार के शुभ दिन गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और उसके जीवन से सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#ऐसे_करें_भगवान_गणेश_की_पूजा* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से निवृत्त होकर सर्वप्रथम ताम्र पत्र के श्री गणेश यन्त्र को साफ़ मिट्टी, नमक, नीम्बू से अच्छे से साफ़ कर लें। पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसन पर विराजमान होकर सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शुद्ध आसन पर बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, इनकी आरती करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢

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