PRABHAT KUMAR Dec 4, 2021

🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️ *#जय_श्री_शनिदेव_महाराज* 🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_शुभ_रात्रि_कालीन_वंदन* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *बड़ा चमत्कारी है ये तेल। तेल के बारह अचूक उपाय जो बदल दें आपका भाग्य, जरूर करें ?* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *तेल शनि से संबंधित पदार्थ है। तेल का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। तेल के कई फायदे भी हैं और नुकसान भी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *चमेली का तेल: को हर मंगलवार या शनिवार को सिन्दूर और चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए। नियमित रूप से हनुमानजी को धूप-अगरबत्ती लगाना चाहिए। हार-फूल अर्पित करना चाहिए। हनुमानजी को चमेली के तेल का दीपक नहीं लगाया जाता बल्कि तेल उनके शरीर पर लगाया जाता है। ऐसा करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *सरसों का तेल: एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपनी छाया देखकर उसे शनिवार के दिन शाम को शनिदेव के मंदिर में रख आएं। इसके अलावा आप अलग से शनिदेव को तेल चढ़ा भी सकते हैं। इस उपाय से आपके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *तिल का तेल: तिल के तेल का दीपक 41 दिन लगातार पीपल के नीचे प्रज्वलित करने से असाध्य रोगों में अभूतपूर्व लाभ मिलता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है। भिन्न-भिन्न साधनाओं व सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए भी पीपल के नीचे दीपक प्रज्वलित किए जाने का विधान है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *शारीरिक कष्ट दूर करने के लिए: शनिवार को सवा किलो आलू व बैंगन की सब्जी सरसों के तेल में बनाएं। उतनी ही पूरियां सरसों के तेल में बनाकर अंधे, लंगड़े व गरीब लोगों को यह भोजन खिलाएं। ऐसा कम से कम 3 शनिवार करेंगे तो शारीरिक कष्‍ट दूर हो जाएगा।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाने का टोटका: सरसों के तेल में सिंके गेहूं के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के फूल, सिन्दूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात में किसी चौराहे पर रखकर कहें- ‘हे मेरे दुर्भाग्य, तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूं, कृपा करके मेरा पीछा ना करना।’ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *धन-समृद्धि हेतु: कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *सुख-शां‍ति हेतु: खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए किसी भी आश्रम में कुछ आटा और सरसों का तेल दान करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *नया घर चाहिए तो करें ये उपाय: शमी के पौधे के पास लोहे के दीये में तिल के तेल में सरसों का तेल मिलाकर काले धागे की बत्ती जलाएं। दीये का मुख 4 दिशाओं और 4 कोणों सहित आठों दिशाओं में करें। फिर दीये को जल में प्रवाहित कर दें। यह कार्य 27 शनिवार तक करेंगे तो निश्चित ही आप नए घर में प्रवेश कर जाएंगे।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *शराब छुड़वाने का टोटका: एक शराब की बोतल किसी शनिवार को शराब पीने वाले के सो जाने के बाद उसके ऊपर से 21 बार वार लें। फिर उस बोतल के साथ किसी अन्य बोतल में 800 ग्राम सरसों का तेल लेकर आपस में मिला लें और किसी बहते हुए पानी के किनारे में उल्टा गाड़ दें जिससे बोतलों के ऊपर से जल बहता रहे। यह उपाय किसी योग्य गुरु से पूछकर ही करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *मंदी से छुटकारा पाने के लिए: अगर आपके व्यापार या नौकरी में मंदी का दौर चल रहा है तो आप किसी साफ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा। व्यापार या नौकरी में उन्नति होती रहेगी।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *रोग के कारण किसी के मरने की आशंका हो तो: गुड़ को तेल में मिश्रित करके जिस व्यक्ति के मरने की आशंका हो, उसके सिर पर से 7 बार उतारकर मंगलवार या शनिवार को भैंस को खिला दें। ऐसा कम से कम 5 मंगलवार या शनिवार को करें। यह उपाय भी किसी योग्य गुरु से पूछकर ही करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *मनोकामना तुरंत पूर्ण होती: पीपल के नीचे सरसों तेल का दीपक लगातार 41 शनिवार तक प्रज्वलित करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔

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PRABHAT KUMAR Dec 3, 2021

🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 * #जय__माता__दी* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 *सभी आदरणीय साथियों को मंगलमय शुभकामनाओं के साथ शुभ रात्रि* 🙏 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना तथा जीवन शक्ति संसार में जहां कहीं भी दिखाई देती है, वहां देवी का ही दर्शन होता है। ऋषियों की विश्व दृष्टि तो सर्वत्र विश्वरूपा देवी को ही देखती है, इसलिए माता दुर्गा ही महाकाली महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *श्रीमद्भागवत में लिखा है कि देवी ही भगवान ब्रह्मा भगवान विष्णु और भगवान महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं। देवी सारी सृष्टि को उत्पन्न तथा नाश करने वाली परम शक्ति है। देवी ही पुण्यात्माओं की समृद्धि एवं पापाचारियों की दरिद्रता है। जगन्माता दुर्गा सुकृती मनुष्यों के घर संपत्ति, पापियों के घर में दुर्बुद्धिरूपी अलक्ष्मी, विद्वानों के हृदय में बुद्धि व विद्या, सज्जनों में श्रद्धा व भक्ति तथा कुलीन महिलाओं में लज्जा एवं मर्यादा के रूप में निवास करती है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *मार्कंडेयपुराण कहता है कि ‘हे देवि! तुम सारे वेद-शास्त्रों का सार हो। संसाररूपी महासागर को पार कराने वाली नौका तुम हो। भगवान विष्णु के हृदय में निरंतर निवास करने वाली माता लक्ष्मी तथा शशिशेखर भगवान शंकर की महिमा बढ़ाने वाली माता गौरी भी तुम ही हो।’* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *विंध्यवासिनी धाम प्रमुख शक्तिपीठों में एक है। मार्कंडेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य में कहा गया है कि जब देव-असुर संग्राम हुआ और देवता राक्षसों से पराजित होने लगे तो वे भगवान विष्णु के पास शरणागत हुए। तब भगवान विष्णु सर्वप्रथम अपने तेज को स्वयं से अलग करते हैं, फिर सभी देवता अपना-अपना तेज भाग देते हैं और उसी से आद्यशक्ति मां प्रकट होती हैं। दार्शनिक रूप से इसे काल (समय) के अग्नि रूप में प्रदर्शित किया गया। उसका वर्ण काला, किंतु सिंदूर से आवेष्ठित है और उससे किरणें निकलती रहती हैं। वह सभी प्राणियों की स्वामिनी हैं। ब्रह्मा, विष्णु, देवतागण, दैत्य, पशु-पक्षी एवं संपूर्ण चर-अचर जगत उन्हीं के प्रभाव से संचालित होते हैं।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *मुख्य रूप से चामुंडा संहार और विनाश की अधिष्ठात्री देवी हैं। आद्यशक्ति सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के रूप में कार्य करने वाली महाशक्ति कहा गया है और त्रिदेवों की स्त्री शक्ति के रूप में भी स्मरण किया जाता है। देवी पुराण में यही शक्ति दुर्गा, उमा, शिवा देवी, ब्राह्मणी, विंध्यवासिनी, चामुंडा, शक्ति, पराशक्ति, गौरी, कात्यायनी, कौशिकी, पार्वती, नारायणी, मीना, धूमा, अंबिका, लक्ष्मी, चंडी, कपालिनी, काली, महिषासुर मर्दनी, नंदा, भवानी, तारा, वैष्णवी, महालक्ष्मी, श्वेता एवं योगेश्वरी आदि सैकड़ों नामों से जानी जाती है। सभी देवियों की मूल प्रकृति, कार्य एवं महत्व एक हैं। विंध्याचल पर्वत के मस्तक पर विराजमान होने के कारण यही आद्यशक्ति विंध्यवासिनी देवी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। यह लोकहित के लिए विंध्य क्षेत्र में महासरस्वती, महाकाली एवं महालक्ष्मी का रूप धारण करती हैं। यद्यपि बाबा भोलेनाथ को काशी बहुत प्रिय है, परंतु शक्ति की उपस्थिति के कारण विंध्य क्षेत्र भी उन्हें उतना ही प्रिय है। इसी कारण इसे छोटी काशी कहा जाता है।* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त किया गया है ।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁

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PRABHAT KUMAR Dec 2, 2021

🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#ऊँ_साईं_राम* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *सभी आदरणीय साथियों को रात्रि कालीन वंदन* 🙏🙏🙏 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_साईं_बाबा_मंदिर* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं की प्रसिद्धि दूर दूर तक है और यह पवित्र धार्मिक स्थल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है । यह साईं की धरती है जहां साईं ने अपने चमत्कारों से लोगों को विस्मृत किया । साईं का जीवन शिरडी में बीता जहां उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्य किए ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं की प्रसिद्धि दूर दूर तक है और यह पवित्र धार्मिक स्थल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है । यह साईं की धरती है जहां साईं ने अपने चमत्कारों से लोगों को विस्मृत किया । साईं का जीवन शिरडी में बीता जहां उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्य किए ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *उन्होंने अपने अनुयायियों को भक्ति और धर्म की शिक्षा दी । साईं के अनुयायियों में देश के बड़े-बड़े नेता, खिलाड़ी, फिल्म कलाकार, बिजनेसमैन, शिक्षाविद समेत करोड़ों लोग शामिल हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं का एक विशाल मंदिर है । मान्यता है कि, चाहे गरीब हो या अमीर साईं के दर्शन करने इनके दरबार पहुंचा कोई भी शख्स खाली हाथ नहीं लौटता है । सभी की हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_के_साईं_बाबा* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी के साईं बाबा का वास्तविक नाम, जन्मस्थान और जन्म की तारीख किसी को पता नहीं है । हालांकि साईं का जीवनकाल 1838-1918 तक माना जाता है । कई लेखकों ने साईं पर पुस्तकें लिखीं हैं । साईं पर लगभग 40 किताबें लिखी गई हैं ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं कहां से प्रकट हुए यह कोई नहीं जानता । साईं असाधारण थे और उनकी कृपा वहां के सीधे-सादे गांववालों पर सबसे पहले बरसी । आज शिरडी एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *साईं के उपदेशों से लगता है कि इस संत का धरती पर प्रकट होना लोगों में धर्म, जाति का भेद मिटाने और शान्ति, समानता की समृद्धि के लिए हुआ था । साईं बाबा को बच्चों से बहुत स्नेह था । साईं ने सदा प्रयास किया कि लोग जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं व मुसीबतों में एक दूसरे की सहायता करें और एक दूसरे के मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार करें । इस उद्देश्य के लिए उन्हें अपनी दिव्य शक्ति का भी प्रयोग करना पड़ा ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#शिरडी_का_साईं_मंदिर* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *शिरडी में साईं बाबा का पवित्र मंदिर साईं की समाधि के ऊपर बनाया गया है. साईं के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंदिर का निर्माण 1922 में किया गया था । साईं 16 साल की उम्र में शिरडी आए और चिरसमाधि में लीन होने तक यहीं रहे । साईं को लोग आध्यात्मिक गुरु और फकीर के रूप में भी जानते हैं । साईं के अनुयायियों में हिंदू के साथ ही मुस्लिम भी हैं । इसका कारण है कि अपने जीवनकाल के दौरान साईं मस्जिद में रहे थे जबकि उनकी समाधि को मंदिर का रूप दिया गया है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#साईं_मंदिर_में_दर्शन* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 साईं का मंदिर सुबह 4 बजे खुल जाता है. सुबह की आरती 5 बजे होती है । इसके बाद सुबह 5.40 से श्रद्धालु दर्शन करना शुरू कर देते हैं जो दिनभर चलता रहता है । इस दौरान दोपहर के वक्त 12 बजे और शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद भी आरती की जाती है । रात 10.30 बजे दिन की अंतिम आरती के बाद एक शॉल साईं की विशाल मूर्ति के चारो ओर लपेट दी जाती है और साईं को रुद्राक्ष की माला पहनाई जाती है । इसके पश्चात मूर्ति के समीप एक गिलास पानी रख दिया जाता है और फिर मच्छरदानी लगा दिया जाता है । रात 11.15 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है ।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴

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PRABHAT KUMAR Dec 1, 2021

💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢 #ऊँ_गं_गणपतेय_नमः 💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_मंगलमय_शुभ_रात्री* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। मनुष्य ही नहीं देवता भी अपने कार्यों को बिना किसी विघ्न के पूरा करने के लिए गणेश जी की अर्चना सबसे पहले करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि देवगणों ने स्वयं उनकी अग्रपूजा का विधान बनाया है।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शास्त्रों में जिक्र आता है कि भगवान शंकर त्रिपुरासुर का वध करने में जब असफल हुए, तब उन्होंने गंभीरतापूर्वक विचार किया कि आखिर उनके कार्य में विघ्न क्यों पड़ा?* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *तब महादेव को ज्ञात हुआ कि वे गणेशजी की अर्चना किए बगैर त्रिपुरासुर से युद्ध करने चले गए थे। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी का पूजन करके उन्हें लड्डुओं का भोग लगाया और दोबारा त्रिपुरासुर पर प्रहार किया, तब उनका मनोरथ पूर्ण हुआ।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता अर्थात सभी तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला बताया गया है। पुराणों में गणेशजी की भक्ति शनि सहित सारे ग्रहदोष दूर करने वाली भी बताई गई हैं।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रत्येक बुधवार के शुभ दिन गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और उसके जीवन से सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#ऐसे_करें_भगवान_गणेश_की_पूजा* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से निवृत्त होकर सर्वप्रथम ताम्र पत्र के श्री गणेश यन्त्र को साफ़ मिट्टी, नमक, नीम्बू से अच्छे से साफ़ कर लें। पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसन पर विराजमान होकर सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *शुद्ध आसन पर बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, इनकी आरती करें।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢

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PRABHAT KUMAR Nov 30, 2021

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#ऊँ_नमो_भगवते_वासुदेवाय_नमः* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *सभी आदरणीय साथियों को सपरिवार उत्पन्ना एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं* 🙏🙏🙏🙏🙏 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#जानें_क्यों_हुई_उत्पन्ना_एकादशी_की_शुरूआत* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *एकादशी का नाम सुनते ही मन में भगवान विष्णु की छवि अपने आप आ जाती है, क्योंकि एकादशी का व्रत एक ऐसा व्रत है जिसका महत्व हिंदू धर्म में बहुत ही अधिक माना जाता है, जो कि महीने में दो बार आती है एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। अब अगर हम बात करें एकादशी व्रत के लाभ की तो हर एक एकादशी व्रत को करने से अलग-अलग प्रकार के फल की प्राप्ति होती है। लेकिन आज हम एक ऐसी एकादशी के बारे में बात करेंगे जिससे एकादशी की शुरुआत हुई थी उस एकादशी का नाम है उत्पन्ना एकादशी। आइए जानते है कि उत्पन्ना एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है और इसका महत्व अलग क्यों हो जाता है।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *पुराणो के अनुसार एकादशी एक देवी का नाम है जिनका जन्म मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु से हुआ था। इस दिन एकादशी देवी की उत्पत्ति होने के कारण इस दिन को उत्पन्ना एकादशी व्रत के रूप में मनाया जाना लगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने माता एकादशी को आशीर्वाद दिया था और इस व्रत को महान व पूज्नीय बताया था। और कहा कि आज से जो व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखेगा उसके पूर्वजन्म और वर्तमान दोनों जन्मों के पाप नष्ट हो जाएगें। अगर आप भी पूर्ण वर्ष के एकादशी व्रत करने की सोच रहे है तो इस दिन से शुरू करना बेहद शुभ होगा। क्योंकि इसी दिन से तो माता एकादशी का जन्म हुआ था।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#उत्पन्ना_एकादशी_2021_व्रत_का_शुभ_मुहूर्त* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *एकादशी तिथि आरम्भ - 30 नवंबर को सुबह 04:13 बजे से* *एकादशी तिथि समापन - 01 नवंबर को रात 02: 13 बजे तक* *पारणा मुहूर्त - 1 दिसंबर को सुबह 07:37 बजे से 9:01 बजे तक* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#पूजा_विधि* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *इस दिन प्रातःकाल में उठ कर स्नान आदि से निवृत्त हो कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजन के लिए एक चौकी पर विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले जल, अक्षत, फूल अर्पित कर हल्दी का तिलक करें। भगवान को धूप, दीप,नैवेद्य अर्पित कर उत्पन्ना व्रत कथा का पठन या श्रवण करें। पूजन के अंत में आरती करें। उसके बाद प्रसाद ग्रहण करके दिन भर यथाशक्ति व्रत रखें और व्रत का पारणा अगले दिन शुभ मुहूर्त में करें। इसी के साथ इस एकादशी को विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते है कि इस दिन किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *इस दिन किसी भी प्रकार से तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए ताकि अगले दिन आपके पेट में अन्न का अंश न रहे। इसी के साथ जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, उन्हें भी इस दिन खासतौर पर चावलों का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत को कभी हरिवासर समाप्त होने से पहले पारण नहीं करना चाहिए। द्वादशी समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करना पाप के समान माना जाता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो तो इस स्थिति में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। द्वादशी तिथि पर प्रातः पूजन व ब्राह्मण को भोजन करवाने के पश्चात ही व्रत का पारण करना चाहिए।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#जानें_क्यों_हुआ_था_माँ_एकादशी_का_जन्म* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *उत्पन्ना एकादशी के नाम से हमको यह पता चलता है कि इसका अर्थ है उत्पन्न होना। इस खास लेख में हम जानेंगे कि देवी एकादशी का जन्म कैसे हुआ था और भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों युधिष्ठिर को उत्पन्ना एकादशी की कथा सुनाई।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *युधिष्ठिर श्रीकृष्ण से कहते है कि हे भगवन! आपने हजारों यज्ञ और लाख गौदान को भी एकादशी व्रत के बराबर नहीं बताया। सो यह तिथि सब तिथियों से उत्तम कैसे हुई, बताइए।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *भगवन कहने लगे- हे युधिष्ठिर! सतयुग में मुर नाम का दैत्य उत्पन्न हुआ। वह बड़ा बलवान और भयानक था। उस प्रचंड दैत्य ने इंद्र, आदित्य, वसु, वायु, अग्नि आदि सभी देवताओं को पराजित करके भगा दिया। तब इंद्र सहित सभी देवताओं ने भयभीत होकर भगवान शिव से सारा वृत्तांत कहा और बोले हे कैलाशपति! मुर दैत्य से भयभीत होकर सब देवता मृत्यु लोक में फिर रहे हैं। तब भगवान शिव ने कहा- हे देवताओं! तीनों लोकों के स्वामी, भक्तों के दु:खों का नाश करने वाले भगवान विष्णु की शरण में जाओ।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *वे ही तुम्हारे दु:खों को दूर कर सकते हैं। शिवजी के ऐसे वचन सुनकर सभी देवता क्षीरसागर में पहुँचे। वहाँ भगवान को शयन करते देख हाथ जोड़कर उनकी स्तुति करने लगे‍कि हे देवताओं द्वारा स्तुति करने योग्य प्रभो! आपको बारम्बार नमस्कार है, देवताओं की रक्षा करने वाले मधुसूदन! आपको नमस्कार है। आप हमारी रक्षा करें। दैत्यों से भयभीत होकर हम सब आपकी शरण में आए हैं। आप इस संसार के कर्ता, माता-पिता, उत्पत्ति और पालनकर्ता और संहार करने वाले हैं। सबको शांति प्रदान करने वाले हैं। आकाश और पाताल भी आप ही हैं। सबके पितामह ब्रह्मा, सूर्य, चंद्र, अग्नि, सामग्री, होम, आहुति, मंत्र, तंत्र, जप, यजमान, यज्ञ, कर्म, कर्ता, भोक्ता भी आप ही हैं। आप सर्वव्यापक हैं। आपके सिवा तीनों लोकों में चर तथा अचर कुछ भी नहीं है।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *हे भगवन्! दैत्यों ने हमको जीतकर स्वर्ग से भ्रष्ट कर दिया है और हम सब देवता इधर-उधर भागे-भागे फिर रहे हैं, आप उन दैत्यों से हम सबकी रक्षा करें। इंद्र के ऐसे वचन सुनकर भगवान विष्णु कहने लगे कि हे इंद्र! ऐसा मायावी दैत्य कौन है जिसने सब देवताअओं को जीत लिया है, उसका नाम क्या है, उसमें कितना बल है और किसके आश्रय में है तथा उसका स्थान कहाँ है? यह सब मुझसे कहो भगवान के ऐसे वचन सुनकर इंद्र बोले- भगवन! प्राचीन समय में एक नाड़ीजंघ नामक राक्षस थ उसके महापराक्रमी और लोकविख्यात मुर नाम का एक पुत्र हुआ। उसकी चंद्रावती नाम की नगरी है। उसी ने सब देवताअओं को स्वर्ग से निकालकर वहाँ अपना अधिकार जमा लिया है। उसने इंद्र, अग्नि, वरुण, यम, वायु, ईश, चंद्रमा, नैऋत आदि सबके स्थान पर अधिकार कर लिया है।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *सूर्य बनकर स्वयं ही प्रकाश करता है। स्वयं ही मेघ बन बैठा है और सबसे अजेय है। हे असुर निकंदन! उस दुष्ट को मारकर देवताओं को अजेय बनाइए। यह वचन सुनकर भगवान ने कहा- हे देवताओं, मैं शीघ्र ही उसका संहार करूंगा। तुम चंद्रावती नगरी जाओ। इस प्रकार कहकर भगवान सहित सभी देवताओं ने चंद्रावती नगरी की ओर प्रस्थान किया। उस समय दैत्य मुर सेना सहित युद्ध भूमि में गरज रहा था। उसकी भयानक गर्जना सुनकर सभी देवता भय के मारे चारों दिशाओं में भागने लगे। जब स्वयं भगवान रणभूमि में आए तो दैत्य उन पर भी अस्त्र, शस्त्र, आयुध लेकर दौड़े। भगवान ने उन्हें सर्प के समान अपने बाणों से बींध डाला। बहुत-से दैत्य मारे गए। केवल मुर बचा रहा। वह अविचल भाव से भगवान के साथ युद्ध करता रहा। भगवान जो-जो भी तीक्ष्ण बाण चलाते वह उसके लिए पुष्प सिद्ध होता। उसका शरीर छिन्न‍-भिन्न हो गया किंतु वह लगातार युद्ध करता रहा। दोनों के बीच मल्लयुद्ध भी हुआ।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *10 हजार वर्ष तक उनका युद्ध चलता रहा किंतु मुर नहीं हारा। थककर भगवान बद्रिकाश्रम चले गए। वहां हेमवती नामक सुंदर गुफा थी, उसमें विश्राम करने के लिए भगवान उसके अंदर प्रवेश कर गए। यह गुफा 12 योजन लंबी थी और उसका एक ही द्वार था। विष्णु भगवान वहां योगनिद्रा की गोद में सो गए। मुर भी पीछे-पीछे आ गया और भगवान को सोया देखकर मारने को उद्यत हुआ तभी भगवान के शरीर से उज्ज्वल, कांतिमय रूप वाली देवी प्रकट हुई। देवी ने राक्षस मुर को ललकारा, युद्ध किया और उसे तत्काल मौत के घाट उतार दिया।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *श्री हरि जब योगनिद्रा की गोद से उठे, तो सब बातों को जानकर उस देवी से कहा कि आपका जन्म एकादशी के दिन हुआ है, अत: आप उत्पन्ना एकादशी के नाम से पूजित होंगी। आपके भक्त वही होंगे, जो मेरे भक्त हैं।* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *इसी के साथ भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई और एकादशी का सही अर्थ समझाया। जैसे युधिष्ठिर को जीवन में ज्ञान की प्राप्ति हुई वैसे आप को भी हो और भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। ऊँ नमो नारायणाय!* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

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PRABHAT KUMAR Nov 29, 2021

💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 💢💢💢💢 *#हर_हर_महादेव_ॐ_नमः_शिवाय* 💢💢💢💢 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *सभी आदरणीय साथियों को रात्रि कालीन वंदन* 🙏🙏🙏 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#शिव_अमृतवाणी* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 शिव अमृत की पावन धारा, धो देती हर कष्ट हमारा शिव का काज सदा सुखदायी, शिव के बिन है कौन सहायी शिव की निसदिन की जो भक्ति, देंगे शिव हर भय से मुक्ति माथे धरो शिव नाम की धुली, टूट जायेगी यम कि सूली शिव का साधक दुःख ना माने, शिव को हरपल सम्मुख जाने सौंप दी जिसने शिव को डोर, लूटे ना उसको पांचो चोर शिव सागर में जो जन डूबे, संकट से वो हंस के जूझे शिव है जिनके संगी साथी, उन्हें ना विपदा कभी सताती शिव भक्तन का पकडे हाथ, शिव संतन के सदा ही साथ शिव ने है बृह्माण्ड रचाया, तीनो लोक है शिव कि माया जिन पे शिव की करुणा होती, वो कंकड़ बन जाते मोती शिव संग तान प्रेम की जोड़ो, शिव के चरण कभी ना छोडो शिव में मनवा मन को रंग ले, शिव मस्तक की रेखा बदले शिव हर जन की नस-नस जाने, बुरा भला वो सब पहचाने अजर अमर है शिव अविनाशी, शिव पूजन से कटे चौरासी यहाँ वहाँ शिव सर्व व्यापक, शिव की दया के बनिये याचक शिव को दीजो सच्ची निष्ठां, होने न देना शिव को रुष्टा शिव है श्रद्धा के ही भूखे, भोग लगे चाहे रूखे-सूखे भावना शिव को बस में करती, प्रीत से ही तो प्रीत है बढ़ती। शिव कहते है मन से जागो, प्रेम करो अभिमान त्यागो। 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#दोहा* *दुनिया का मोह त्याग के शिव में रहिये लीन।* *सुख-दुःख हानि-लाभ तो शिव के ही है अधीन।।* भस्म रमैया पार्वती वल्ल्भ, शिव फलदायक शिव है दुर्लभ महा कौतुकी है शिव शंकर, त्रिशूल धारी शिव अभयंकर शिव की रचना धरती अम्बर, देवो के स्वामी शिव है दिगंबर काल दहन शिव रूण्डन पोषित, होने न देते धर्म को दूषित दुर्गापति शिव गिरिजानाथ, देते है सुखों की प्रभात सृष्टिकर्ता त्रिपुरधारी, शिव की महिमा कही ना जाती दिव्या तेज के रवि है शंकर, पूजे हम सब तभी है शंकर शिव सम और कोई और न दानी, शिव की भक्ति है कल्याणी कहते मुनिवर गुणी स्थानी, शिव की बातें शिव ही जाने भक्तों का है शिव प्रिय हलाहल, नेकी का रस बाटँते हर पल सबके मनोरथ सिद्ध कर देते, सबकी चिंता शिव हर लेते बम भोला अवधूत सवरूपा, शिव दर्शन है अति अनुपा अनुकम्पा का शिव है झरना, हरने वाले सबकी तृष्णा भूतो के अधिपति है शंकर, निर्मल मन शुभ मति है शंकर काम के शत्रु विष के नाशक, शिव महायोगी भय विनाशक रूद्र रूप शिव महा तेजस्वी, शिव के जैसा कौन तपस्वी हिमगिरी पर्वत शिव का डेरा, शिव सम्मुख न टिके अंधेरा लाखों सूरज की शिव ज्योति, शस्त्रों में शिव उपमान होशी शिव है जग के सृजन हारे, बंधु सखा शिव इष्ट हमारे गौ ब्राह्मण के वे हितकारी, कोई न शिव सा पर उपकारी 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢💢

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PRABHAT KUMAR Nov 28, 2021

🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 🚩🚩🚩🚩🚩 *#ऊँ_सूर्य_देवाय_नमः* 🚩 🚩🚩🚩🚩 *🌜 शुभ रात्रि प्रिय आदरणीय साथियों मधुर सपनों के साथ 🌛* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *#सूर्य_ग्रहण_की_कथा* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *वेदो,पुराणो तथा शास्त्रो में सूर्य ग्रहण एवम चन्द्र ग्रहण का कारण राहु-केतु को बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार दैविक काल में जब देवताओ को अमृत पान तथा दैत्यों को वारुणी पान कराया जा रहा था तब इस बात की खबर दैत्य राहु को हुआ। दैत्य राहु ने छुपकर देवता की पंक्ति में जाकर बैठ गया परन्तु अमृत पान के पश्चात इस बात को सूर्य एवम चन्द्र ने उजागर कर दिया।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *दैत्य के इस कार्य के लिए भगवान विष्णु अति क्रोधित हो गए और उन्होंने तत्काल ही अपने सुदर्शन चक्र से दैत्य राहु का सर धड़ से अलग कर दिया। जिससे दैत्य राहु का सर शरीर से अलग हो गया। परन्तु दैत्य राहु ने अमृत पान कर लिया था अतः वह निष्प्राण होने के बजाय ग्रहो की भांति हो गया।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *तदुपरांत, ब्रह्मा जी ने दैत्य राहु के दोनों हिस्सों में से एक राहु को चन्द्रमा छाया में जबकि केतु को पृथ्वी की चचाय में स्थान दिया है। अतः ग्रहण के समय राहु-केतु सूर्य और चन्द्रमा के समीप रहता है। इसलिए सूर्य या चन्द्र ग्रहण के समय राहु-केतु की पूजा करना मंगल प्रदान करने वाला है। राहु-केतु केवल सूर्य और चन्द्र ग्रहण के समय दिखाई देता है। * 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *#भारतीय_वैदिक_काल_और_सूर्य_ग्रहण* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *ऋग्वेद के अनुसार अत्रि मुनि को इस घटना का ज्ञान प्राप्त था तथा उन्होने परिवार को यह ज्ञान प्रदान किया था। ऋषि अत्रि ने सर्वप्रथम ग्रहण ज्ञान देने वाले प्राचार्य थे। उन्होंने ही सूर्य ग्रहण के संदर्भ को समाज में प्रस्तुत किया था।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *वेदो, पुराणो और शास्त्रो के अनुसार जब राहु चन्द्रमा को और केतु सूर्य को ग्रसता है इससे ही सूर्य ग्रहण पड़ता है। सूर्य ग्रहण के समय जठरागिन, नेत्र तथा पित्त जैसी बीमारियो का प्रकोप बढ़ता है। गर्भवती स्त्री को सूर्य या चन्द्र ग्रहण का दीदार नही करना चाहिए। इससे ग्रभपत की संभावना बढ़ जाती है। इस दिन स्त्री को चाकू या कैची का प्रयोग नही करना चाहिए। यह धार्मिक मान्यताओ के अनुसार अशुभ है।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *#विजया_एकादशी_की_कथा_एवं_इतिहास* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *सूर्य ग्रहण के समय भोजन ग्रहण नही करना चाहिए। क्योकि सूर्य ग्रहण के समय कीटाणु में बहुलता आ जाती है जो वातावरण में फ़ैल जाता है। ये कीटाणु खाद्य पदार्थ, जल आदि को दूषित कर देते है। सूर्य ग्रहण के समय भोज्य पदार्थ तथा जल को ढक कर रखे। हो सके तो इस कम भोजन बनाये और ग्रहण के पश्चात नहा धोकर पुनः भोजन पका ले।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहार पूर्व भोजन नही करना चाहिए। बूढ़े बालक एक प्रहार पूर्व भोजन ग्रहण कर सकते है। ग्रहण के दिन फूल, फल और लकड़ी नही तोडना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, भोजन करना आदि मनाही है। ग्रहण के समय गायो को घास, पक्षियों को अन्न, तथा गरीबो को वस्त्र दान में देना चाहिए। देवी भागवत के अनुसार ग्रहण के समय जमीन नही खोदना चाहिए।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *#सूर्य_ग्रहण_पूजन_विधि 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *सूर्य ग्रहण के पश्चात नदी, सरोवर या घर में उपलब्ध जल से स्नान करके भगवान का पूजा तथा प्राथना करें। मान्यता यह भी है की ग्रहण के समय भजन-कीर्तन करना चाहिए। ऐसा करने से प्रभु की कृपा से साधक के हर कार्य सिद्ध होते है। ग्रहण के पश्चात ब्राह्मणो तथा निर्धनो को अपने सामर्थ्य अनुसार दान दे। दान में वस्त्र, बर्तन, अन्न आदि दिया जाता है।* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *स्नान-ध्यान तथा पूजा करने के पश्चात भोजन पकाये। ग्रहण के पश्चात संभव हो तो डोम जाति को दान दे क्योकि राहु-केतु को डोम जाति का स्वरूप मन गया है। इस तरह सूर्य ग्रहण की कथा तथा महत्व की गाथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान सूर्य देव की जय। * 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞

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PRABHAT KUMAR Nov 27, 2021

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🍁🍁🍁🍁🍁 *#जय_श्री_काल_भैरव* 🍁🍁🍁🍁🍁 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *सभी आदरणीय साथियों को भगवान काल भैरव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#काल_भैरव_जयंती* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रुद्र रुप बताया गया है। वैसे तो हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मासिक कालाष्टमी व्रत किया जाता है। लेकिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जंयती के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव भगवान का अवतरण हुआ था। इस साल काल भैरव जंयती 27 नवंबर, शनिवार के दिन पड़ रही है। भगवान शिव का रुद्र रुप कहे जाने वाले काल भैरव भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। रात्रि के समय काल भैरव की पूजा की जाती है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *बता दें कि भगवान काल भैरव को दंडापणि (जिसके हाथों में दंड हो) कहा जाता है। काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देव कहे जाते हैं, वहीं अनैतिक कार्य करने वालों के लिए ये दंडनायक भी हैं। इतना ही नहीं, काल भैरव भगवान को लेकर ये मान्यता भी है कि भगवान कैल भैरव के भक्तों के साथ कोई अहित करता है तो उसे तीनों लोकों में कहीं भी शरण नहीं मिलती।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#कालभैरव_जयंती_शुभ_मुहूर्त* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 27 नवंबर 2021,* *शनिवार को प्रातः 05 बजकर 43 मिनट से* *मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी समापन- 28 नवंबर 2021,* *रविवार को प्रातः 06:00 बजे* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#पूजा_विधि* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *इस दिन सुबह उठ जाएं। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर लें। स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इसके बाद घर के मंदिर में या किसी शुभ स्थान पर कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *अब इसके चारों तरफ गंगाजल छिड़क लें। फिर उन्हें फूल अर्पित करें। फिर नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि चीजें अर्पित करें। फिर कालभैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप करें। फिर भैरव चालीसा का पाठ करें। फिर भैरव मंत्रों का 108 बार जाप करें। इसके बाद आरती करें और पूजा संपन्न करें।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#व्रत_कथा* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *पौराणिक कथा के अनुसार एक बार की बात है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता की लड़ाई चली। इस बात पर बहस बढ़ गई, तो सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *सबसे यही पूछा गया कि श्रेष्ठ कौन है? सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोजा लेकिन उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने अपना अपमान समझा।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है। शिवजी के इस रूप को देखकर सभी देवता घबरा गए।* *भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। इस प्रकार ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया। ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *भैरव बाबा को उनके पापों के कारण दंड मिला इसीलिए भैरव को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। इस प्रकार कई वर्षों बाद वाराणसी में इनका दंड समाप्त होता है। इसका एक नाम ‘दंडपाणी’ पड़ा था। इसी के साथ काल भैरव अवतार से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#काल_भैरव_जयंती_पर_किए_जाने_वाले_उपाय* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *काल भैरव जयंती के दिन भगवान शिव की पूजा करने से भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें और साथ ही मन में अपनी मनोकामना कहें। मान्यता है कि इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *मान्यता है कि इस दिन ऐसे मंदिर में जाकर पूजन करें जहां बहुत कम लोग जाते हो या फिर कई दिनों से किसी ने पूजा न की हो। ऐसा माना जाता है कि जो भैरव बहुत कम पूजे जाते हैं उनका पूजन करने से भगवान भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस दिन मंदिर जाकर दीपक प्रज्वलित करें और भगवान भैरव को नारियल, जलेबी का भोग लगाएं।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *भगवान भैरव का वाहन श्वान यानी कुत्ता माना गया है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने के साथ ही कुत्ते को भोजन अवश्य करवाएं। खासतौर पर काले कुत्ते को भोजन कराएं। इससे काल भैरव के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। ऐसा करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

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