Manoj manu Oct 5, 2021

+189 प्रतिक्रिया 53 कॉमेंट्स • 64 शेयर
Manoj manu Oct 2, 2021

🚩🔔जय सियाराम जी जय वीर बजरंग वली 🌹🙏 🌹🌿राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।🌿🌹🌿 🌿🌹सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।।🌹🌿 जीवन दर्शन :- कब ,कहाँ ,क्या ,कितना और कैसे प्राप्त करना एवं कब ,कहाँ ,क्या ,कितना और कैसे देना। इन प्रश्नों के उत्तर की प्राप्ति केवन प्रभु की भक्ति से ही संभव है। मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन में बहुत कुछ प्राप्त करने और बहुत कुछ देने में लगा रहता है। अपने संपूर्ण जीवन में भाग दौड करता रहता है। लेकिन विचारणीय प्रश्न यही है कि ,वह भूल जाता है कि कब ,कहाँ ,क्या,कितना और कैसे लेना और देना है। इसलिए प्रभु की भक्ति ही एक ऐसा दीपक है जिसके प्रकाश में वह अपना जीवन सार्थक कर सकता है। और जीवन की सार्थकता केवल ईश्वर भक्ति से ही संभव है। 🌿प्रभु श्री रामचंद्र जी महाराज सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय श्री राम जी 🌿🌹🙏

+161 प्रतिक्रिया 72 कॉमेंट्स • 130 शेयर
Manoj manu Sep 26, 2021

🚩🔔जय सियाराम जी जय वीर बजरंग वली 🌹🙏 🌹शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं 🌿ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। 🌹रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं 🌿वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥1॥ भावार्थ:-शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देने वाले, ब्रह्मा, शम्भु और शेषजी से निरंतर सेवित, वेदान्त के द्वारा जानने योग्य, सर्वव्यापक, देवताओं में सबसे बड़े, माया से मनुष्य रूप में दिखने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, करुणा की खान, रघुकुल में श्रेष्ठ तथा राजाओं के शिरोमणि राम कहलाने वाले जगदीश्वर की मैं वंदना करता हूँ॥1|| 🌹नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। 🌹भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥2॥ भावार्थ:-हे रघुनाथजी! मैं सत्य कहता हूँ और फिर आप सबके अंतरात्मा ही हैं (सब जानते ही हैं) कि मेरे हृदय में दूसरी कोई इच्छा नहीं है। हे रघुकुलश्रेष्ठ! मुझे अपनी निर्भरा (पूर्ण) भक्ति दीजिए और मेरे मन को काम आदि दोषों से रहित कीजिए॥2| 🌹अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। 🌿सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥3॥ भावार्थ:-अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्जी को मैं प्रणाम करता हूँ॥3|| 🌿🌺प्रभु श्री रामचंद्र जी महाराज सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय श्री राम जी 🙏 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹

+184 प्रतिक्रिया 113 कॉमेंट्स • 102 शेयर
Manoj manu Sep 21, 2021

🚩🔔जय सिया राम जी जय वीर बजरंग वली 🌹🙏 🌹🌹भक्ति की महिमा - श्री राम चरित मानस ज्ञान से :- कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई॥ राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर॥1 भावार्थ:-मैंने ज्ञान का सिद्धांत समझाकर कहा। अब भक्ति रूपी मणि की प्रभुता (महिमा) सुनिए। श्री रामजी की भक्ति सुंदर चिंतामणि है। हे गरुड़जी! यह जिसके हृदय के अंदर बसती है,॥1॥ *परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती॥ मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा॥2॥ भावार्थ:-वह दिन-रात (अपने आप ही) परम प्रकाश रूप रहता है। उसको दीपक, घी और बत्ती कुछ भी नहीं चाहिए। (इस प्रकार मणि का एक तो स्वाभाविक प्रकाश रहता है) फिर मोह रूपी दरिद्रता समीप नहीं आती (क्योंकि मणि स्वयं धनरूप है) और (तीसरे) लोभ रूपी हवा उस मणिमय दीप को बुझा नहीं सकती (क्योंकि मणि स्वयं प्रकाश रूप है, वह किसी दूसरे की सहायता से प्रकाश नहीं करती)॥2॥ * प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई॥ खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं॥3॥ भावार्थ:-(उसके प्रकाश से) अविद्या का प्रबल अंधकार मिट जाता है। मदादि पतंगों का सारा समूह हार जाता है। जिसके हृदय में भक्ति बसती है, काम, क्रोध और लोभ आदि दुष्ट तो उसके पास भी नहीं जाते॥3॥ * गरल सुधासम अरि हित होई। तेहि मनि बिनु सुख पाव न कोई॥ दब्यापहिं मानस रोग न भारी। जिन्ह के बस सब जीव दुखारी॥4॥ भावार्थ:-उसके लिए विष अमृत के समान और शत्रु मित्र हो जाता है। उस मणि के बिना कोई सुख नहीं पाता। बड़े-बड़े मानस रोग, जिनके वश होकर सब जीव दुःखी हो रहे हैं, उसको नहीं व्यापते॥4॥ * राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥ चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं॥5॥ भावार्थ:-श्री रामभक्ति रूपी मणि जिसके हृदय में बसती है, उसे स्वप्न में भी लेशमात्र दुःख नहीं होता। जगत में वे ही मनुष्य चतुरों के शिरोमणि हैं जो उस भक्ति रूपी मणि के लिए भली-भाँति यत्न करते हैं॥5॥ * सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई॥ सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटभेरे॥6॥ भावार्थ:-यद्यपि वह मणि जगत्‌ में प्रकट (प्रत्यक्ष) है, पर बिना श्री रामजी की कृपा के उसे कोई पा नहीं सकता। उसके पाने के उपाय भी सुगम ही हैं, पर अभागे मनुष्य उन्हें ठुकरा देते हैं॥6॥ * पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥7॥ भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥7॥ * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥8॥ भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥8॥ * राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा॥ सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई॥9॥ भावार्थ:-श्री रामचंद्रजी समुद्र हैं तो धीर संत पुरुष मेघ हैं। श्री हरि चंदन के वृक्ष हैं तो संत पवन हैं। सब साधनों का फल सुंदर हरि भक्ति ही है। उसे संत के बिना किसी ने नहीं पाया॥9॥ * अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा॥10॥ भावार्थ:-ऐसा विचार कर जो भी संतों का संग करता है, हे गरुड़जी उसके लिए श्री रामजी की भक्ति सुलभ हो जाती है॥10॥🌺🌿🌺जय श्री राम जी 🌺🌿🙏

+192 प्रतिक्रिया 118 कॉमेंट्स • 41 शेयर
Manoj manu Sep 16, 2021

🚩🌹🔔जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🌹🌿🙏 🌹🌹जीवन दर्शन -कृष्ण ज्ञान :- जीवन में धर्म, कर्म और प्रेम का समन्वय करना कैसे हो यह 'श्री कृष्ण' सिखाते हैं। जहां ज्ञानी से परम ज्ञानी भी उनको वेद-पुराणों और ऋचाओं में नहीं खोज पाते हैं तो वहीं साधारण मनुष्य केवल प्रेम भावना से उन्हें प्राप्त कर लेता है। कृष्ण केवल ईश्वर के रूप में ही पूजनीय नहीं हैं, बल्कि उनका संपूर्ण व्यक्तित्व जीवन में आपको धर्म, कर्म, प्रेम और रिश्तें सभी में समन्वय करना सिखाता है। अगर मनुष्य उनको केवल पूजने के बजाए उनके जीवन से प्रेरणा ले तो वह जीवन में हर क्षेत्र में पार पा सकता है। श्री कृष्ण एक नाम नहीं अपितु एक कर्मयोगी, आदर्श और दार्शनिक हैं , यही कारण है कि केवल सनातन धर्म नहीं संपूर्ण विश्व में भगवान कृष्ण के अनुयायी हैं। वर्तमान समय के इस भागमभाग और तनाव से भरे हुए जीवन में कृष्ण के दिये हुए ज्ञान की महती आवश्यकताओं में सर्वोपरि है। क्या और कितना तथा कैसे प्राप्त करना है और क्या, कितना और कैसे देना है, यह आज के युग के लिए कृष्ण ज्ञान से ही संभव है। अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण ने जीवन का रहस्य और धर्म व कर्म को बहुत ही सरलता से समझाया है। 🌹🌹🌿जय श्री कृष्णा जी 🌿🌹🙏

+181 प्रतिक्रिया 84 कॉमेंट्स • 113 शेयर
Manoj manu Sep 14, 2021

🚩🌹🔔जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🌹🌿🙏 🌹🌹आप सभी को श्री राधा अष्टमी की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय बधाईयाँ,🌹🌿🌹 🌿🌹नमस्ते परमेश्वरी रासमण्डलवासिनी। 🌹🌿रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।। 🌿🌿रासमण्डल में निवास करने वाली हे परमेश्वरि ! आपको नमस्कार है। श्रीकृष्ण को प्राणों से भी अधिक प्रिय हे रासेश्वरि आपको नमस्कार है। 🌹🌿कर जोरि वन्दन करूंँ , मैं नित नित करूं प्रणाम_ 🌿🌹रसना से गाता रहूँ _ श्री राधा राधा नाम !! जो भी श्रद्धापूर्वक राधा जी के नाम का आश्रय लेता है वह प्रभु की गोद मै बैठ कर उनका स्नेह पाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में स्वयं श्री हरि विष्णु जी ने कहा है कि जो व्यक्ति अनजाने मैं भी राधा कहता है उसके आगे मैं सुदर्शन चक्र लेकर चलता हूं। उसके पीछे स्वयं शिव जी उनका त्रिशूल लेकर चलते हैं। उसके दाईं ओर इंद्र वज्र लेकर चलते हैं और बाईं तरफ वरुण देव छत्र लेकर चलते हैं। 🌹🌿🌹🌿राधे राधे जी 🌿🌹🌿🌹🙏

+218 प्रतिक्रिया 83 कॉमेंट्स • 272 शेयर